राकेश अस्थाना मामले में इंवेस्टमेंट Banker मनोज प्रसाद को मिली बेल

नई दिल्‍ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को दुबई के इंवेस्टमेंट Banker मनोज प्रसाद को जमानत दे दी है। Banker मनोज पर सीबीआई घूसकांड में बिचौलिए की भूमिका निभाने और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के लिए घूस लेने का आरोप है।
11 दिसंबर को प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए उसके ऊपर सतीश सना द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को मानने से इंकार कर दिया था। प्रसाद ने कहा था कि वह कभी भी अस्थाना से मिला ही नहीं है।

कोर्ट में पेशी के वक्त मीडिया से बात करते हुए प्रसाद ने कहा था कि, ‘ये सब झूठ है। सब कुछ मनगढ़ंत है। जो भी उन्होंने दावा किया है ऐसा कुछ नहीं हुआ। मैंने कभी पैसे नहीं लिए और न ही कभी अस्थाना से मिला हूं। मुझे नहीं पता अस्थाना कौन है।’

राकेश अस्थाना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली सुधारात्मक याचिका हो चुकी है खारिज

गुजरात कैडर केआईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना को सीबीआई का विशेष निदेशक नियुक्त करने के केंद्र सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली सुधारात्मक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी थी। इससे पहले पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कॉमन कॉज द्वारा दायर सुधारात्मक याचिका में मेरिट का अभाव बताते हुए खारिज कर दिया था। चैंबर में हुई इस याचिका पर सुनवाई पर 11 दिसंबर को निर्णय लिया गया था लेकिन शुक्रवार को इसे सार्वजनिक किया गया।

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी के समक्ष राकेश अस्थाना के वकील अमरेंद्र शरण ने कहा कि जब रिश्वत मांगी ही नहीं गई तो भ्रष्टाचार का मामला कैसे बन गया। वहीं, मुकदमा दर्ज करने के लिए अनिवार्य सरकारी अनुमति नहीं ली गई। दूसरी ओर से जिस शख्स सतीश बाबू सना ने मोइन कुरैशी को दो करोड़ रुपये घूस देने की बात जांच अधिकारी व कोर्ट के समक्ष स्वीकार की, उस पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

उन्होंने कहा सीबीआई ने अस्थाना पर 15 अक्तूबर 2018 की रात 8 बजे एफआईआर दर्ज की थी, जबकि उसी दिन केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई को पत्र लिखकर किसी भी सीबीआई अधिकारी पर सरकारी अनुमति के बिना एफआईआर दर्ज न करने का निर्देश दिया था। एफआईआर करने से पहले प्रारंभिक जांच की जाती है, वह भी नहीं की गई।
-एजेंसी

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