Celesta International का तीसरा दिन

लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में चल रहे चार दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय साँस्कृतिक ओलम्पियाड Celesta International-2018 का आज तीसरा दिन था।

सीएमएस कानपुर रोड आॅडिटोरियम में चल रहे इस कार्यक्रम का तीसरा दिन नृत्य व संगीत की सुमधुर धुनों व विभिन्नता में एकता का संदेश देते कोलाज से सराबोर रहा जिसके माध्यम से श्रीलंका, बांग्लादेश व देश के कोने-कोने से पधारे प्रतिभाशाली छात्रों ने अपनी अद्धितीय प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन प्रतिभागी छात्रों ने जहाँ एक ओर कोरियोग्राफी एवं आर्केस्ट्रा प्रतियोगिताओं में अपने हुनर का प्रदर्शन कर दर्शकों को ताल से ताल मिलाने पर मजबूर कर दिया तो वहीं दूसरी ओर कोलाज प्रतियोगिता के माध्यम से एकता व शान्ति पर आधारित आदर्श विश्व व्यवस्था का मनोहारी और विहंगम दृश्य प्रस्तुत किया।
इससे पहले ‘सेलेस्टा इण्टरनेशनल’ के अन्तर्गत आज तीसरे दिन की शुरुआत प्रार्थना सभा, शिक्षात्मक बाल फिल्मों एवं सी.एम.एस. संस्थापक व प्रख्यात शिक्षाविद् डा. जगदीश गाँधी के सारगर्भित अभिभाषण से हुई। इस अवसर पर अपने सम्बोधन में डा. गाँधी ने कहा कि संगीत हमें ईश्वर से जोड़ता है और आध्यात्मिक शिक्षा में संगीत का विशेष महत्व है। डा. गाँधी ने कहा कि अमेरिका में एक शोध से पता चला है कि संगीत के साथ बच्चों का पढ़ाई में भी ज्यादा मन लगता है व उनकी क्षमता में भी अभूतपूर्व वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय अवतारों के बताये रास्ते पर चलना, श्रेष्ठ गुणों को धारण करना व अपने ज्ञान व पुरुषार्थ को लोकहित में समर्पित करना, यही जीवन का संगीत है।

International Cultural Olympiad Celesta International -2018 The third day
International Cultural Olympiad Celesta International -2018 The third day

प्रतियोगिताओं का सिलसिला आज ‘आर्केस्ट्रा प्रतियोगिता’ से प्रारम्भ हुआ, जिसमें देश-विदेश की 20 टीमों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में प्रतिभागी छात्रों ने शान्ति, भाईचारे एवं देशभक्ति पर आधारित संगीत एवं विभिन्न वाद्यों के सुन्दर तालमेल से दर्शकोें का भरपूर मनोरंजन किया और दिखाया कि संगीत की शक्ति मानवता में नई ऊर्जा का संचार करने में सक्षम हैं। ‘रिवर्स आॅफ ज्वाय’ अर्थात ‘आनन्द की नदियाँ’ जैसी विभिन्न प्रस्तुतियों ने दर्शकों व निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जहाँ एक ओर श्रीलंका की टीम ने ढोल व डुगडुगी की मदद से पारम्परिक संगीत बड़े सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया तो वहीं एक अन्य टीम ने बाँसुरी, तबले, तानपुरा व हारमोनियम का अनूठा समन्वय दिखाया। कुछेक टीमों ने गिटार, सिन्थेसाइजर इत्यादि का मेल दिखाते हुए पाश्चात्य संगीत का भी प्रदर्शन किया। प्रत्येक टीम में 6 प्रतिभागी छात्र थे जिन्हें अपने प्रस्तुतिकरण के लिए छः मिनट का समय दिया गया।
थ्री-डी कोलाज प्रतियोगिता में 35 छात्र टीमों ने प्रतिभाग किया। इस प्रतियोगिता में तीन घण्टे के समय में प्रतिभागी छात्रों ने ‘रिदम्स आॅफ द यूनिवर्स’ विषय पर एक से बढ़कर एक शानदार कोलाज बनाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। प्रतियोगिता में छात्रों ने भूमण्डल के विभिन्न रंगो और उसके संगीत को चित्रों के माध्यम से कैनवस पर उतारा और दिखाया कि ध्वनि का एक विशेष महत्व है और सभी चाँद-तारे एक ही लय-ताल से चलते हैं, सबको अपना संगीत है जो मनुष्य को भौतिकवाद से ऊपर उठने का संदेश देते हैं।
इसी प्रकार अपरान्हः सत्र में सम्पन्न हुई ‘कोरियोग्राफी प्रतियोगिता’ में नृृत्य, संगीत व कला का सुन्दर संगम देखने को मिला। प्रतियोगिता में 21 टीमों ने प्रतिभाग किया तथापि प्रत्येक प्रतिभागी टीम में 6 से 8 छात्र सदस्य थे, जिन्होंने ‘यूनिटी इन डायवर्सिटी’ विषय पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया। इस प्रतियोगिता में छात्रों ने अपने नृत्य कौशल से दिखाया कि हम विभिन्न धर्म, जाति, रंग, रूप के होते हुए भी एक मनुष्य जाति हैं और प्रेम, भाईचारे व एकता में हम सबका एवं सम्पूर्ण मानवता का हित है। प्रतिभागी छात्रों ने दिखाया कि प्रकृति में इतनी विभिन्नता होते हुए भी एकता है तो इन्सानों में क्यों नहीं हो सकती। देश-विदेश की प्रतिभागी टीमों के सुन्दर प्रस्तुतिकरण, वेषभूषा तथा हावभाव नेे दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सी.एम.एस. के मुख्य जन-सम्पर्क अधिकारी श्री हरि ओम शर्मा ने बताया कि यह अन्तर्राष्ट्रीय साँस्कृतिक ओलम्पियाड अब अपने अत्यन्त सफल समापन की ओर बढ़ रहा है। कल 12 अगस्त को अपरान्हः 2.30 बजे सेलेस्टा इण्टरनेशनल-2018 पुरस्कार वितरण एवं समापन समारोह के साथ सम्पन्न हो जायेगा। यूनियन बैंक आॅफ इण्डिया के डी.जी.एम. श्री एस. सी. कार समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इस अवसर पर देश-विदेश के विजयी छात्रों को पुरष्कृत कर सम्मानित किया जायेगा तथापि सी.एम.एस. छात्र देश-विदेश से पधारे प्रतिभागी छात्रों व शिक्षकों के सम्मान में रंगारंग शिक्षात्मक-साँस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे।

मानव का मन सबसे अच्छा तीर्थस्थान है: Dr. Jagdish Gandhi

लखनऊ। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ के संस्थापक व प्रबन्धक शिक्षाविद् Dr. Jagdish Gandhi कहते हैं कि मनुष्य का जन्म तो सहज होता है लेकिन मनुष्यता उसे कठिन परिश्रम से प्राप्त करनी पड़ती है। सब कुछ हमारे अंदर स्थित मन रूपी तीर्थस्थान में ही है। स्वर्ग-नरक कहीं बाहर या आसमान में नहीं वरन् हमारे मन में ही है। यदि मन में हमने ईश्वरीय विचारों को बसा रखा है तो हमारे अंदर ही स्वर्ग है। यदि हमने अपने मन में स्वार्थ से भरे विचार भर रखे हैं तो जीवन नरक के समान है। हम संसार के किसी भी तीरथ में चले जाये यदि हमारे मन में अशांति है तो किसी भी तीरथ में शांति नहीं मिल पायेगी। क्योंकि हम अशांति की अपनी पूंजी साथ-साथ लेकर जायेंगे। अन्त में हम इस निष्कर्ष में पहुंचते है कि मानव का मन सबसे अच्छा तीर्थस्थान है।

 

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