सलाहकार समिति की बैठक में राहुल गांधी और विदेश मंत्री के बीच तीखी बहस

नई दिल्‍ली। विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक में शुक्रवार को तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने वैश्विक चुनौतियों, खासतौर पर चीन से निपटने के लिए स्‍पष्‍ट रणनीति की मांग की। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने काफी देर तक उन्‍हें जवाब दिया। चीन को लेकर मंत्री ने करीब घंटे भर का प्रजेंटेशन दिया, जिसे राहुल गांधी ने ‘लॉन्‍ड्री लिस्‍ट’ बताकर खारिज कर दिया। मीटिंग में मौजूद कांग्रेस के ही शशि थरूर ने भी यही बात दोहराई। गांधी और जयशंकर के बीच कई बार नोक-झोंक हुई। कुल मिलाकर करीब साढ़े तीन घंटे की मीटिंग में दो घंटे से ज्‍यादा वक्‍त तक जयशंकर और श्रृंगला जवाब ही देते रहे।
‘भारत के बॉर्डर इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर से चिढ़कर चीन ने पैदा किया तनाव’
राहुल ने सरकार के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगाते हुए कहा कि वह अपनी उपलब्धियां न गिनाएं, बल्कि एक ‘साफ और मजबूत’ रणनीति सामने रखे।
सूत्रों के मुताबिक जयशंकर ने कहा कि चीन ने पूर्वी लद्दाख में जो किया, उससे शांति भंग हुई है। उन्‍होंने कहा कि सरकार की रणनीति अभी ये है कि सीमावर्ती इलाकों में सैनिक तैनात रखे जाएंगे और सशस्‍त्र बलों को सपोर्ट किया जाए। विदेश मंत्री के मुताबिक चीन को समस्‍या भारत के बॉर्डर इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को मजबूत करने से है। उन्‍होंने कहा कि यह (इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का विकास) 2014 तक (जबतक यूपीए की सरकार थी) धीमा था। इसके बाद से सरकार ने इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बजट को बढ़ाया और उसे लागू करने की स्‍पीड को चौगुना कर दिया।
राहुल गांधी के सवाल
गांधी ने सरकार ने पूछा कि क्‍या उसके पास कोई ऐसी रणनीति है जिसे ‘तीन वाक्‍यों में समेटा जा सके?’
राहुल ने पूछा कि क्‍या सरकार उस स्थिति में क्‍या करेगी जब चीन की रणनीति सैन्‍य से हटकर क्षेत्रीय हो जाएगी। जहां पुरानी सिल्‍क रोड को बदलकर एक लैंड रूट में बदल दिया जाएगा जो चीन को यूरोप (बीआरआई) और पाकिस्‍तान (CPEC) के जरिए खाड़ी से जोड़ देगा ताकि भारत का केंद्रीय रूप कमजोर पड़ जाए। उन्‍होंने यह भी पूछा क्‍या भारत के पास और ‘बाइपोलर’ दुनिया (अमेरिका बनाम चीन) के लिए कोई रणनीति है।
विदेश मंत्री ने दिया यह जवाब
जयशंकर ने जवाब दिया कि बीआरआई और कनेक्टिविटी को लेकर भारत की रणनीति 2017 में पहले BRI फोरम से ही साफ कर दी गई थी। भारत की जो पोजिशन है, वैसी ही पोजिशन अब दुनिया के कई देश ले रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत इस कोशिश में है कि और मल्‍टी-पोलर दुनिया बन सके। इस दिशा में पहला कदम मल्‍टी-पोलर एशिया बनाना होगा।
राहुल ने कहा कि वह चाहते हैं कि मीटिंग के मिनट्स एडवांस में सर्कुलेट किए जाएं। इस पर जयशंकर ने कहा कि पहले के सालों में ऐसा होता रहा था मगर जब प्रणब मुखर्जी विदेश मंत्री थे तो उन्‍होंने सुरक्षा कारणों से ऐसा करना बंद करा दिया था।
-एजेंसियां

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