तालिबान पर शांति के लिए दबाव डालने में भारत की भूमिका अहम: राजदूत

नई दिल्‍ली। भारत में अफ़ग़ानिस्तान के राजदूत फ़रीद मामुन्दज़ई ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा बिगड़ती स्थिति और इन हालात में दूसरे देशों की भूमिका को लेकर बात की.
उन्होंने भविष्य में ज़रूरत पड़ने पर भारत से सैन्य मदद माँगने पर हामी भरी लेकिन फ़िलहाल तालिबान पर शांति के लिए दबाव डालने में भारत की भूमिका को अहम बताया.
अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा स्थिति को लेकर फ़रीद मामुन्दज़ई ने कहा कि हालात बहुत मुश्किल और डरवाने हैं. 150 ज़िलों में संघर्ष चल रहा है. कुछ ज़िले तालिबान के कब्ज़े में चले गए हैं. पिछले 10 हफ़्तों में 3,600 लोगों की जान जा चुकी है. देश के अंदर ही दो लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं.
उन्होंने कहा, ”आम अफ़ग़ान नागरिकों में ये डर है कि अफ़ग़ानिस्तान फिर से 90 के दशक की तरफ़ लौट रहा है. अगर हमें उस स्तर तक सहायता नहीं दी जाती कि हम अफ़ग़ानिस्तान को पूरी तरह से सुरक्षित कर सकें और तालिबान से लड़ सकें तो हम निश्चित रूप से उस दिशा में वापस चले जाएंगे.”
हाल ही में भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने वाणिज्यिक दूतावास से अपने राजनयिकों और स्टाफ़ को वापस बुला लिया है.
क्या अफ़ग़ानिस्तान में उनके लिए कोई ख़तरा था? इसे लेकर फ़रीद मामुन्दज़ई ने कहा, ”हमें कंधार या हेरात में किसी ख़तरे का पता नहीं चला है लेकिन सामान्य सुरक्षा स्थिति अस्थिर है. ऐसे में जान-माल को लेकर किसी भी संभावित दुर्घटना से हम बचना चाहते हैं.”
अफ़ग़ानिस्तान की भारत से उम्मीदें
एक लंबे समय से भारत और अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते बहुत मज़बूत रहे हैं. भारत ने कई विकास परियोजनाओं में अरबों डॉलर का निवेश किया है. ऐसे में अब अफ़ग़ानिस्तान भारत से क्या चाहता है और भारत के इस निवेश का क्या होगा?
फ़रीद मामुन्दज़ई कहते हैं, ”भारत का निवेश दो क्षेत्रों में था एक हल्का बुनियादी ढांचा जैसे शिक्षा और दूसरा ठोस बुनियादी ढांचा जैसे सड़कें और इमारतें. अगर देश में सुरक्षा हालात ख़राब होते हैं तो दोनों तरह के बुनियादी ढांचे ख़तरे में पड़ सकते हैं.”
”हमने भारत से अभी तक सैन्य सहायता के लिए आधिकारिक रूप से कोई अनुरोध नहीं किया है. ये मदद हमें नेटो और अमेरिका से पहले ही मिली है जो काफ़ी है. हमारे पास उन संसाधनों और संपत्तियों का उपयोग करने की क्षमता है. अगर हमें और मदद की ज़रूरत होगी तो हम निश्चित रूप से भारत सरकार से मांगेंगे लेकिन अभी तक ऐसा नहीं है.”
”लेकिन निश्चित रूप से, भारत की ओर से दिया गया कड़ा संदेश तालिबान पर क्षेत्रीय आतंकी समूहों से संबंध तोड़ने के लिए दबाव बनाने में मदद करेगा. भारत की तरफ़ से ऐसा संदेश कि भारत अफ़ग़ानिस्तान को सहयोग करना जारी रखेगा और तालिबान को मुख्यधारा के समाज का फिर से हिस्सा बनना चाहिए. भारत अफ़ग़ानिस्तान की शिक्षा, राजनीतिक और राजनयिक तौर पर मदद करना जारी रख सकता है.”
हालांकि, उन्होंने भारत-पाकिस्तान तनाव के अफ़ग़ानिस्तान पर असर से साफ़ तौर पर इंकार कर दिया.
फ़रीद मामुन्दज़ई ने कहा, ”मेरे पास इसका ठीक जवाब नहीं है. आपको दोनों देशों के अधिकारियों से पूछना चाहिए. हम नहीं चाहेंगे कि अफ़ग़ानिस्तान को भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दों से जोड़ा जाए. हम चाहते हैं कि हमारे मामले और मुद्दे क्षेत्रीय राजनीति और कश्मीर में सुरक्षा स्थिति के इतर स्वतंत्र रूप से देखे जाएं.”
-एजेंसियां

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