संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के ‘रॉक स्‍टार’ ने चीन और पाकिस्‍तान को जमकर धोया

संयुक्‍त राष्‍ट्र के अंदर जम्‍मू-कश्‍मीर के मुद्दे को उठाकर इस पूरे मामले को अंतर्राष्‍ट्रीय रूप देने की चीन और पाकिस्‍तान की नापाक साजिश को शुक्रवार को भारत ने अपने दमदार तर्कों और सबूतों से खारिज कर दिया।
भारत की फील्डिंग इतनी शानदार रही कि रूस ने संयुक्‍त राष्‍ट्र की ‘बंद कमरे’ में बैठक शुरू होने से पहले ही जम्‍मू-कश्‍मीर को भारत-पाकिस्‍तान का द्विपक्षीय मसला बता दिया। बैठक के बाद भारत के जवाबी हमले का दौर आया। क्रिकेट के शौकिन संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के ‘रॉक स्‍टार’ राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन ने इसकी कमान संभाली और मुस्‍कराते हुए शब्‍दों की चाशनी में अपने लाजवाब तर्कों और तथ्‍यों को लपेटकर चीन और पाकिस्‍तान दोनों को ही ‘धो’ डाला।
राजनयिक हलके में भारत की जोरदार ‘फील्डिंग’ और बेहद आक्रामक ‘बल्‍लेबाजी’ का असर यह रहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने जम्‍मू-कश्मीर में हालात सामान्य करने के भारतीय प्रयासों की सराहना की।
UNSC ने जारी नहीं किया कोई बयान
यही नहीं, चीन और पाकिस्‍तान की तमाम कोशिशों के बाद भी इस बैठक पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ।
भारत ने UNSC की बंद कमरे में हुई बैठक में साफ किया जम्मू-कश्मीर में किया गया संवैधानिक बदलाव भारत का आंतरिक मामला है और इसका अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से कोई सरोकार नहीं है। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की UNSC के स्थायी सदस्य चीन और पाकिस्तान की कोशिश औंधे मुंह गिर गई। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद पाकिस्तानी दूत मलीहा लोधी ने जीत का दावा किया लेकिन UNSC ने कोई औपचारिक घोषणा नहीं की। भारत ने चीन और पाकिस्तान के दावे को खारिज करते हुए मजबूती के साथ पूरी दुनिया के सामने अपना पक्ष रखा।
चीन की मांग को भी UNSC ने नहीं दी कोई तवज्जो
सूत्रों ने कहा, चीन ने सलाह दी थी कि बैठक के बाद की घटनाक्रम के बारे में अनौपचारिक घोषणा UNSC अध्यक्ष जोएना रोनिका करें। हालांकि, चीन को इस मसले पर किसी दूसरे देश का समर्थन नहीं मिला। संयुक्त राष्ट्र में चीन के दूत जियांग जून ने मीडिया में दावा किया कि UNSC सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर ‘गंभीर चिंता’ जताई।
किसने क्या कहा
-संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी दूत मलीहा लोधी ने दावा किया कि कश्मीर मसले का अंतर्राष्ट्रीयकरण हो चुका है लेकिन UNSC के 15 सदस्य (5 स्थायी, 10 अस्थायी) देशों की बंद कमरे में हुई अनौपचारिक बैठक में न तो वोटिंग हुई और न ही कोई प्रस्ताव आया। UNSC ने इस मसले पर कोई बयान भी नहीं दिया।
-संयुक्त राष्ट्र ने चीन के दूत जियांग जून ने दावा किया जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर सदस्य देशों ने ‘गंभीर चिंता’ जताई।
-संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मसला है और इस पर भारत ने अपने संविधान के अनुसार काम किया है।
भारत की इस राजनयिक सफलता का पूरा श्रेय विदेश मंत्रालय की टीम को दिया जा रहा है जिसका नेतृत्‍व संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने किया।
पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ हैं अकबरुद्दीन
वर्ष 1985 में भारतीय विदेश सेवा जॉइन करने वाले सैयद अकबरुद्दीन के पिता एस बदरुद्दीन हैदराबाद स्थित उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के हेड थे। एस बदरुद्दीन बाद में कतर में भारत के राजदूत बनाए गए थे। अकबरुद्दीन की मां डॉक्‍टर जेबा इंग्लिश की प्रोफेसर थीं। अपनी हाजिरजवाबी और आत्‍मसंयम के लिए मशहूर अकबरुद्दीन पश्चिम एशिया के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्‍होंने विदेश मंत्रालय में अब तक कई महत्‍वपूर्ण पदों पर सफलतापूर्वक काम किया है।
अकबरुद्दीन वर्ष 2015 में हुए भारत-अफ्रीका फोरम समिट के चीफ कोआर्डिनेटर रह चुके हैं। अफ्रीका में चीन के बढ़ते दबदबे के बीच आयोजित यह समिट बेहद सफल रहा था। अकबरुद्दीन वर्ष 2012 से 2015 तक भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता रह चुके हैं। वह सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहते हैं और भारतीय विदेश नीति को आगे बढ़ाते हैं। ट्विटर पर उनके एक लाख 25 हजार फॉलोवर हैं।
सैयद अकबरुद्दीन इससे पहले भी वर्ष 1995 से 1998 तक यूएन में फर्स्‍ट सेक्रटरी रह चुके हैं। अकबरुद्दीन पाकिस्‍तान की राजधानी इस्‍लामाबाद में स्थित भारतीय उच्‍चायोग में काउंसलर रह चुके हैं। इसके अलावा अकबरुद्दीन सऊदी अरब और मिस्र में भी काम कर चुके हैं। अकबरुद्दीन ने राजनीतिक विज्ञान और अंतर्राष्‍ट्रीय संबंध में एमए किया है। वह खेलों के जबरा फैन हैं।
पाकिस्‍तानी पत्रकारों को कराया चुप
अकबरुद्दीन की इसी प्रतिभा और अनुभव का एक और शानदार नमूना शुक्रवार को देखने को मिला। UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने अपनी हाजिरजवाबी, तथ्यों और कूटनीतिक जवाबों से पाकिस्तानी पत्रकारों को निरुत्तर कर दिया। जम्‍मू-कश्मीर पर चर्चा के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी जिसमें पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने अकबरुद्दीन से बार-बार कश्मीर और मानवाधिकार के सवाल दागे।
भारतीय प्रतिनिधि ने एक-एक कर सभी के प्रश्नों का सटीक जवाब देकर उन्हें चुप करा दिया। पाक पत्रकारों ने अनुच्छेद 370 पर भी भारतीय राजनयिक को घेरने की कोशिश की पर नाकाम रहे। उन्होंने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने का फैसला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने सबसे पहले पाकिस्तान के तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और इस दौरान वह बेहद आत्मविश्वास में दिखे। उन्होंने कहा कि आप लोगों के मन में कोई संदेह नहीं रहना चाहिए क्योंकि मैं तीनों पाक पत्रकारों के सवालों के जवाब दे चुका हूं।
चीन को भी दिया सख्‍त संदेश
जैसे ही पाकिस्तान के आखिरी पत्रकार ने उनसे सवाल पूछा कि नई दिल्ली, इस्लामाबाद से कब वार्ता करेगा तो अकबरुद्दीन ने पोडियम से आगे जाकर बेहद आत्मविश्वास के साथ बोला, ‘चलिए, मुझे इसकी शुरुआत सबसे पहले आपसे रू-ब-रू होकर करने दीजिए। हाथ मिलाने दीजिए।’ उन्होंने एक-एक कर तीनों पत्रकारों से हाथ मिलाया और इस दौरान वहां पत्रकारों की हंसी भी सुनाई दी।
यह सैयद अकबरुद्दीन की तैयारी और आत्‍मविश्‍वास ही था जो उन्‍होंने सभी सवालों के जवाब दिए जबकि पाकिस्‍तान और चीन के प्रतिनिधि अपना बयान पढ़कर बिना मीडिया से बात किए ही वहां से निकल लिए। बैठक के बाद चीनी और पाकिस्तानी दूतों के मीडिया को संबोधित करने के बारे में अकबरुद्दीन ने कहा, ‘सुरक्षा परिषद बैठक समाप्त होने के बाद हमने पहली बार देखा कि दो देश (चीन और पाकिस्तान) अपने देश की राय को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की राय बताने की कोशिश कर रहे थे।’
कई बार भारत को दिला चुके हैं सफलता
ऐसा नहीं है कि उन्‍होंने ऐसा पहली बार किया है। कूटनीति के पिच पर आक्रामक अंदाज में सधी हुई बल्‍लेबाजी करने के लिए मशहूर अकबरुद्दीन पहले भी कई मौकों पर भारत को सफलता दिला चुके हैं। इसी साल पुलवामा हमले के बाद एक अमेरिकी टीवी चैनल के एंकर ने जब उनसे भारत के रुख को लेकर कई उकसावे से भरे सवाल पूछे तो उन्‍होंने अपनी हाजिरजवाबी से उसे लाजवाब कर दिया।
नवंबर 2017 में भारत के न्‍यायाधीश दलबीर भंडारी दोबारा अंतर्राष्‍ट्रीय न्‍यायालय के लिए चुने गए। ऐसा पहली बार हुआ जब संयुक्‍त राष्‍ट्र के एक गैर स्‍थाई सदस्‍य भारत ने यूएनएससी के स्‍थाई सदस्‍य को चुनाव में पीछे छोड़ दिया। इसका पूरा श्रेय अकबरुद्दीन को दिया गया हालांकि उन्‍होंने इससे साफ इंकार किया। यूएनएससी में इसी साल 9 जुलाई को एक बहस के दौरान उन्‍होंने पाकिस्‍तान का नाम लिए बिना दाऊद इब्राहिम, लश्‍कर-ए-तैयबा की मदद करने के लिए उसे धो डाला था। विशेषज्ञों के मुताबिक अकबरुद्दीन एक पर्दे के पीछे से काम करने वाले बेहद शांत और होशियार राजनयिक हैं। उनकी इसी प्रतिभा के कारण उन्‍हें यूएन में भारत का प्रतिनिधि बनाया गया है।
-एजेंसियां

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