वैश्विक मंचों पर मजबूत हो रही है भारत की स्‍थिति, 2023 में करेगा जी-20 के सम्मेलन की अध्यक्षता और मेजबानी

नई दिल्‍ली। पिछले कुछ वर्षों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि बदली है। एक्सपर्ट इसकी एक वजह यह मानते हैं कि भारत अब महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों पर काफी सक्रियता से भाग लेता है बल्कि दुनिया को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर काफी दृढ़ता से अपनी बात कहता है। यह वैश्विक व्यवस्था में कई खामियों का खामियाजा भी भुगत रहा है जिस कारण भी यह उन अवसरों की तलाश में रहता है जहां इसे उन गड़बड़ियों को दुरुस्त करने का मौका मिले।
महत्वपूर्ण बात यह है कि आने वाले वर्षों में भारत के सामने ऐसे ही अवसरों के द्वार खुलने जा रहे हैं। जी-20 के नेताओं ने रविवार को ऐलान किया कि 2023 में समूह के सम्मेलन की अध्यक्षता और मेजबानी भारत करेगा। वहीं, अगले वर्ष जनवरी से इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थाई सदस्यता भी मिल जाएगी। अगस्त 2021 और फिर 2022 में यूएनएससी के 15 अस्थाई सदस्य देशों के अध्यक्ष पद हासिल करेगा।
G-20 की अध्यक्षता के मायने
पहले बात जी-20 की अध्यक्षता की। जी-20 का मेजबान देश ही उस साल का अजेंडा सेट करता है। भारत के लिए यह ऐसा अवसर है जिसमें वो दुनिया के सबसे ताकतवर देशों को अपनी वैश्विक दृष्टि, शासन-प्रशासन की क्षमता और भविष्य के लिए अजेंडा सेटिंग के जरिए अपनी दूरदर्शिता का लोहा मनवा सकता है।
दरअसल, जी-8 से इतर जी-20 भारत जैसे विकासशील देशों को भी अमेरिका जैसे विकसित देशों के बराबर अधिकार देता है। जी-20 वैश्विक व्यवस्था के लिए अजेंडा सेट करता है जिसके आधार पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं निर्देशित होती हैं। जी-20 की अध्यक्षता इसके सदस्य देशों के बीच बदलती रहती है। इस कारण कोई भी देश अपना अजेंडा इस समूह पर नहीं थोप सकता है। ऐसे में भारत के पास दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के सामने राजनैतिक, आर्थिक और बौद्धिक क्षेत्र में अपना दमखम दिखाने का अवसर है।
पाकिस्तान पर कड़ा होगा FATF का शिंकजा
भारत अपनी दूरदर्शिता का इस्तेमाल ग्लोबल इकनॉमिक गवर्नेंस अजेंडा सेट कर सकता है। भारत के पक्ष में यह बात जाती है कि यह अब अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर पहले से ज्यादा सक्रिय है। भारत अपने अनुभवों का इस्तेमाल कर जी-20 देशों का ध्यान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक (World Bank) जैसे परंपरांगत वित्तीय संस्थानों से इतर डिजिटल इकॉनमी में ट्रेड और सर्विस का नया फ्रेमवर्क डिजाइन करने, वित्तीय गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए एक से दूसरे देशों के बीच धन की आवाजाही में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की तरफ खींच सकता है। स्वाभाविक है कि इससे वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) में भी भारत की स्थिति मजबूत होगी, तब पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा।
ध्यान रहे कि रियाद सम्मेलन में दुनिया के सबसे धनी 20 देशों के इस समूह के नेताओं ने मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग रोकने के लिए नीतिगत कार्यवाहियों का भी समर्थन किया जिनका विवरण कोविड-19 पर एफएटीएफ के पत्र में है। उन्होंने धनशोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण तथा शस्त्र प्रसार के लिए आर्थिक मदद की रोकथाम के लिहाज से वैश्विक मानक निर्धारण इकाई के तौर पर एफएटीएफ के प्रति अपना समर्थन दोहराया।
रियाद में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के बाद नेताओं ने घोषणापत्र में कहा, ‘हम इन खतरों के सभी स्रोतों, तकनीकों और माध्यमों से निपटने की अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराते हैं। हम एफएटीएफ के क्षेत्रीय इकाइयों के वैश्विक नेटवर्क को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराते हैं जिसमें परस्पर मूल्यांकनों में उनकी विशेषज्ञता का समर्थन करना तथा एफएटीएफ के वैश्विक मानकों के पूरी तरह, प्रभावी और त्वरित क्रियान्वयन का आह्वान करना शामिल है।’ घोषणापत्र में कहा गया, ‘हम 2021 में इटली में, 2022 में इंडोनेशिया में, 2023 में भारत में और 2024 में ब्राजील में अपने आगामी सम्मेलनों को लेकर आशान्वित हैं।’
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी भाग लिया।
दुनिया में भारत की बढ़ती स्वीकार्यता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के अस्थायी सदस्य के लिए हुए चुनाव में भारत को 192 मतों में से 184 मत मिले। स्पष्ट है कि भारत के खिलाफ सिर्फ आठ देशों ने वोट किए जिसमें पाकिस्तान, तुर्की, मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। यूएनएससी में भारत की अस्थाई सदस्यता के कारण सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद को फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग, कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत की स्थिति मजबूत होगी और पाकिस्तान को ग्लोबल प्लैटफॉर्म पर फजीहत सुनिश्चित होगी।
बहरहाल, सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर भारत का दो वर्ष का कार्यकाल 1जनवरी 2021 से शुरू होगा। यह सुरक्षा परिषद में नॉर्वे, केन्या, आयरलैंड और मेक्सिको के अलावा पांच स्थायी सदस्यों चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका तथा अस्थायी सदस्यों एस्तोनिया, नाइजर, सेंट विंसेंट, ट्यूनीशिया और वियतनाम के साथ बैठेगा। भारत अगस्त 2021 में 15 देशों वाली शक्तिशाली परिषद के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाएगा। हर सदस्य देश बारी-बारी से एक माह के लिए परिषद की अध्यक्षता करता है।
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता के कार्यालय से जारी सूचना के अनुसार भारत अगले साल अगस्त में परिषद की अध्यक्षता करेगा। इसके बाद भारत 2022 में एक माह के लिए परिषद का अध्यक्ष बनेगा। अगले साल जनवरी में ट्यूनीशिया परिषद का अध्यक्ष बनेगा। इसके बाद ब्रिटेन, अमेरिका, वियतनाम, चीन, एस्तोनिया, फ्रांस, भारत, आयरलैंड, केन्या, मेक्सिको और नाइजर एक-एक महीने के लिए अध्यक्ष बनेंगे। इससे पहले भारत 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 तथा 2011-2012 में परिषद का अस्थायी सदस्य बना था।
-एजेंसियां

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