ट्रंप के कदम से प्रभावित हो सकता है भारत का तेल आयात

नई दिल्‍ली। अमेरिका, भारत का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है लेकिन ईरान के साथ इसका कथित सभ्यतागत संबंध है। साथ ही भारत, पाकिस्तान को नजरअंदाज करते हुए मध्य एशिया एवं अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए वैकल्पिक रास्ता निकालने की फिराक में है जो ईरान के चाबहार पोर्ट से होकर गुजरता है।
इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र में करीब-करीब 80 लाख भारतीय नागरिकों के निवास के कारण भारत के लिए तेहरान से मुंह मोड़ना करीब-करीब असंभव है।
‘ट्रंप ने भारत को मुश्किल में डाला’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ‘गैर-जिम्मेदाराना रवैये’ से भारत के सामने मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। ट्रंप ने जो किया, उसे अंतर्राष्ट्रीय कानून की नजर में उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इससे जवाबी कार्यवाही को उकसावा मिलेगा और भारत के व्यापक हितों को ठेस पहुंचेगी।’
वैसे तो भारत ने अमेरिका के दबाव में पहले ही ईरान से तेल आयात काफी कम कर दिया है और अब इराक भारत के बड़े तेल निर्यातकों में शुमार हो चुका है, बावजूद इसके क्षेत्र में सैन्य कार्यवाही बढ़ी तो भारत का तेल आयात प्रभावित हो सकता है।
पूर्व राजनयिक और मध्य-पूर्व एशिया के बड़े जानकार तलमीज अहमद कहते हैं कि भारत की प्रतिक्रिया पारंपरिक द्विपक्षीय एवं पारस्परिक हितों पर आधारित है।
उन्होंने कहा, ‘मेरा अपना नजरिया है कि भारत को अब मैदान से बाहर नहीं रहना चाहिए बल्कि इसे क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा का माहौल सुनिश्चित करने के लिए तीखी राजनयिक भूमिका निभाने की अपनी ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए। हालात बिगड़ते रहे तो पुरानी नीतियों पर आगे बढ़ने से फायदा क्या है।’ उन्होंने कहा कि क्षेत्र में किसी तरह का सैन्य संघर्ष बढ़ा तो कुछ दिनों में ही हजारों भारतीयों की जिंदगियां प्रभावित होंगी।
भारत ने ईरान के टॉप जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के मद्देनजर क्षेत्र में शांति व्यवस्था को लेकर चिंता प्रकट की। भारत ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से पूरी दुनिया चिंता में पड़ गई है। इसने कहा कि क्षेत्र की शांति और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। भारत ने शुक्रवार को ईरान के खिलाफ की गई अमेरिकी कार्यवाही पर बेहद सधी प्रतिक्रिया देते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। भारत सरकार ने कहा, ‘जरूरी है कि हालात काबू से बाहर नहीं जाएं। भारत ने लगातार संयम बरतने को तवज्जो दिया है और आगे भी यही करेगा।’ ईरान के रिवॉल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स कुद्स फोर्स के चीफ कासिम सुलेमानी को खाड़ी देशों के दूसरे सबसे ताकतवर नेता माना जाता था।
‘अब भारत को किस मुंह से लेक्चर देगा अमेरिका’
भारत के सामने कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। जैसे ट्रंप का हवाई हमला बेशक पूरी तरह घरेलू राजनीति के मद्देनजर हुआ है लेकिन इससे उसके भारत जैसे मित्र देशों पर असर जरूर पड़ सकता है।
‘अमेरिका को अब भरत को पाठ पढ़ाने और आर्टिकल 370 एवं नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर सुझाव देने से पहले खुद के अंदर गंभीरता से झांकना चाहिए।’
-एजेंसियां

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