NavIC के नाम से इसरो ने डेवलप किया GPS का इंडियन वर्जन

भारत में भी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) ने GPS का इंडियन वर्जन डेवलप किया है, जिसे नेविगेशन विद इंडियन कॉन्सटेलेशन (NavIC) नाम दिया गया है।
अगर आपके मन में सवाल हो कि GPS के बावजूद NavIC की जरूरत क्यों तो बता दें कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान यूएस ने भारत को पाकिस्तानी सेना से जुड़ा GPS डेटा देने से इंकार कर दिया था, तब पहली बार भारत को अपने सैटलाइट नेविगेशन सिस्टम की जरूरत महसूस हुई।
दो दशक बाद, अब इसरो चिपमेकर्स से भारत में बिकने वाले स्मार्टफोन्स में NavIC इंटीग्रेट करने को लेकर बात कर रहा है।
उल्‍लेखनीय है कि अगर आपके एंड्रॉयड या आईओएस स्मार्टफोन में गूगल मैप्स ऐप इंस्टॉल है तो आप ग्लोबल पोजिशनिंग सर्विस (GPS) सैटलाइट नेविगेशन सिस्टम का प्रयोग कर रहे हैं। स्मार्टफोन यूजर्स के बीच जहां GPS का पॉप्युलर है, वहीं बहुत कम लोग जानते हैं कि GPS इकलौता सैटलाइट नेविगेशन सिस्टम नहीं है। रूस खुद का GLONASS तो वहीं यूरोपियन यूनियन और चीन Galileo और BeiDou नेविगेशन सैटलाइट सिस्टम (BDS) इस्तेमाल करते हैं।
क्वालकॉम और ब्रॉडकॉम से बात कर रहा है इसरो
इंडियन नेविगेशन सैटलाइट सिस्टम (IRNSS) के लॉन्च के साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने 2016 में NavIC सैटलाइट नेविगेशन सिस्टम लॉन्च किया था। इसरो इसे स्मार्टफोन्स में इंटीग्रेट करने को लेकर क्वालकॉम और ब्रॉडकॉम से बात कर रहा है।
स्मार्टफोन्स में जरूरी होगी एक नई चिप
NavIC सपोर्ट के लिए स्मार्टफोन्स में एक नई चिप की जरूरत पड़ेगी और चिपमेकर यह काम कर सकते हैं। भारत सबसे बड़े स्मार्टफोन मार्केट्स में से एक है, ऐसे में डिवाइसेज में NavIC सपॉर्ट गेमचेंजर साबित हो सकता है।
GPS के मुकाबले बेहतर होगा सिस्टम
NavIC नेविगेशन सिस्टम केवल भारत पर फोकस करता है और इसरो का कहना है कि GPS के मुकाबले यह ज्यादा सटीक जानकारी देगा। इसकी मदद से 5 मीटर तक की पोजीशन एक्युरेसी मिल सकेगी।
ड्यूल फ्रीक्वेंसी करता है सपोर्ट
GPS जहां केवल L बैंड पर काम करता है, NavIC ड्यूल फ्रीक्वेंसी पावर्ड है। यह S और L दोनों बैंड की मदद से काम करता है और इसलिए ज्यादा सटीक जानकारी दे सकता है। NavIC के लिए कुल 8 इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटलाइट्स (IRNS) काम कर रहे हैं और लगातार लोकेशन से जुड़ा डेटा जुटा रहे हैं।
ड्राइवर्स को देगा वॉइस इंस्ट्रक्शन
GPS की तरह ही NavIC नेविगेशन सिस्टम भी ड्राइवर्स को विजुअल टर्न-बाइ-टर्न वॉइस इंस्ट्रक्शन भी देगा।
बता दें कि 1 अप्रैल, 2019 के बाद रजिस्टर होने वाली कॉमर्शियल गाड़ियों में NavIC ट्रैकर्स जरूर होने चाहिए। ताइवान कंपनी SkyTraQ की ओर से इसरो के लिए मल्टीचिप मॉड्यूल (MCM) डिवेलप होने के बाद अब 30 से ज्यादा कंपनियां भारत में गाड़ियों के लिए NavIC ट्रैकर्स तैयार कर रही हैं।
वायुसेना भी लेगी NavIC की मदद
भारतीय वायु सेना के फाइटर जेट्स भी नेविगेशन से जुड़ी जरूरतों के लिए NavIC की मदद लेंगे। इसके अलावा भारत के इस नेविगेशन सिस्टम की मदद से आपदा प्रबंधन, भौगोलिक डेटा जुटाने और वायु या जलसेना के नेविगेशन जैसे काम भी किए जाएंगे।
-एजेंसियां

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