इस बार बहनों ने द‍िया चीन को 5 हजार करोड़ से ज्यादा का झटका

नई द‍िल्‍ली। पिछले कुछ साल से चल रहे अभियान के पर‍िणामस्‍वरूप देशभर में बहनों ने भाई की कलाई पर भारत में बनी राखी ही बांधी और आम तौर पर चीन में बनी राखियों से परहेज किया।

रिटेल कारोबारियों के संगठन कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने यह जानकारी दी है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया की इस वर्ष हिन्दुस्तानी राखी के आह्वान के तहत देश के 40 हजार से ज्यादा व्यापारी संगठनों ने देश भर के सभी शहरों में एक महीने में घरों में काम करने वाली महिलाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ताओं और स्लम बस्तियों में रहने वाली निचले वर्ग की महिलाओं सहित अन्य से हिन्दुस्तानी सामान से बनी राखियां बड़ी संख्या में बनवाई।

देशभर के कारोबारियों ने भारतीय राखियां बनाकर चीन को 5 हजार करोड़ से ज्यादा का झटका दिया।

एक अनुमान के अनुसार कैट ने विभिन्न राज्यों के व्यापारिक संगठनों के सहयोग से करोड़ों राखियां बनवाई, जिन्हें उन्हीं संगठनों द्वारा व्यापारियों एवं उनके कर्मचारियों और आम लोगों को बाज़ारों में स्टाल लगाकर यह राखियां वितरित की गई। प्रति वर्ष देश में लगभग 50 करोड़ राखियों की मांग रहती है।

देश भर में पहली बार अनेक प्रकार की विशिष्ट राखियां बनवाई गई, जिसमें नागपुर में बनी खादी की राखी, जयपुर में सांगानेरी कला की राखी, पुणे में खेती के बीज राखी, मध्य प्रदेश के सतना में ऊन की राखी, झारखंड के जमशेदपुर में आदिवासी वस्तुओं की राखी, असम के तिनसुकिया में चाय की पत्तियों की राखी, कोलकाता में जूट की राखी, मुंबई में सिल्क की राखी, केरल में खजूर की राखी, कानपुर में मोती और बुंदों की राखी, बिहार में मधुबनी एवं मैथिली कला की राखी, पुडुचेरी में स्टोन राखी, बंगलौर में फूलों की राखी आदि प्रमुखता से बनाई गई। इससे अनेकता में एकता की भारत की अलग पहचान पूर्ण रूप से दिखाई दी।
– एजेंसी

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