भारतीय मूल के अक्षय वेंकटेश को गणित का नोबेल कहे जाने वाले फील्ड्स मेडल से नवाजा

न्यूयॉर्क। भारतीय मूल के गणितज्ञ अक्षय वेंकटेश को गणित का नोबेल कहे जाने वाले फील्ड्स मेडल से नवाजा गया है। दिल्ली में जन्मे अक्षय को गणित में विशिष्ट योगदान के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया। वह दो साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ दिल्ली से ऑस्ट्रेलिया जाकर पर्थ शहर में बस गए थे।
रियो डी जेनेरियो में बुधवार को गणितज्ञों की अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस में 36 वर्षीय वेंकटेश को फील्ड्स मेडल प्रदान किया गया। वह इस समय अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उनके साथ तीन अन्य गणितज्ञों को भी यह पुरस्कार प्रदान किया गया। वेंकटेश के अलावा यह पुरस्कार पाने वालों में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कौचर बिरकर, स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी के एलिसो फिगासी और बॉन यूनिवर्सिटी के पीटर स्कूल्ज शामिल हैं।
चार साल पर दिया जाता है यह पुरस्कार
फील्ड्स मेडल चार वर्ष में एक बार दिया जाता है। इस पुरस्कार के लिए 40 साल से कम उम्र के दो से चार प्रतिभाशाली गणितज्ञ चुने जाते हैं। सभी विजेताओं को सोने का मेडल और 15-15 हजार कनाडाई डॉलर (करीब आठ लाख रुपये) का नकद पुरस्कार दिया जाता है। कनाडा के गणितज्ञ जॉन चा‌र्ल्स फील्ड्स के आग्रह पर 1932 में इस पुरस्कार की शुरुआत की गई थी।
मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय
वेंकटेश फील्ड्स मेडल जीतने वाले दूसरे भारतवंशी बन गए हैं। इससे पहले 2014 में मंजुल भार्गव ने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता था। वह अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं वेंकटेश
वेंकटेश ने 12 साल की उम्र में इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड और गणित ओलंपियाड में मेडल जीता था। 13 साल की उम्र में हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी कर उन्होंने वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था। वेंकटेश ने 16 साल की उम्र में गणित ऑनर्स से प्रथम श्रेणी में स्नातक डिग्री हासिल की। 2002 में 20 साल की उम्र में पीएचडी करने के बाद वह मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी से जुड़ गए।
गणित पर किया है काफी काम
वेंकटेश ने ज्यामिति समेत अंकगणित के कई सिद्धांतों पर काम किया है। वह अपने शोध कार्यो के लिए कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं। वह भारत के रामानुजन पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं।
-एजेंसी

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