डॉक्‍टर कोटनिस की याद दिलाकर भारतीय विदेश मंत्री ने चीन को संदेश दिया

नई दिल्‍ली। भारत, चीन और रूस के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक शुरू हो गई है। रूस के न्‍यौते पर हो रही इस त्रिपक्षीय बैठक के शुरुआत में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने डॉक्‍टर कोटनिस की याद दिलाकर चीन को संदेश देने की कोशिश की।
उन्‍होंने यह भी कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियों को हर तरीके से दूसरे के लिए उदाहरण बनना चाहिए और अंतर्राष्‍ट्रीय कानूनों का सम्‍मान करना चाहिए। साथ ही सहयोगी देशों के वैध हितों को मान्‍यता देनी चाहिए।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ‘दुनिया की प्रमुख शक्तियों को हर तरीके से उदाहरण बनना चाहिए। लंबे समय तक चलने वाली वैश्विक व्‍यवस्‍था को बनाने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय कानूनों का सम्‍मान और सहयोगी देशों के वैध हितों को मान्‍यता, सभी पक्षों को समर्थन और साझा हितों को बढ़ावा देना ही एकमात्र रास्‍ता है।’ उन्‍होंने कहा कि डॉक्‍टर कोटनिस उन पांच भारतीय डॉक्‍टरों में शामिल थे जो दूसरे चीन-जापान युद्ध के दौरान वर्ष 1938 में चिकित्‍सा सहायता देने के लिए गए थे।
व‍िदेश मंत्री ने चीन को दिया बड़ा संदेश
माना जा रहा है कि जयशंकर ने कोटनिस की याद दिलाकर चीन को यह अहसास कराने की कोशिश की कि भारत हर संकट में चीन के साथ खड़ा रहा है और उसे भारत के वैध हितों को मान्‍यता देनी चाहिए। विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत और चीन के बीच लद्दाख में तनाव चरम पर है।
उधर, दोनों देशों के सैन्‍य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद चीन के व‍िदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत और चीन बातचीत और सलाह के जरिए तनाव को कम करने पर सहमत हुए हैं।
बता दें कि रूस भारत और चीन के बीच चरम पर पहुंचे तनाव को कम करने की कोशिशों में जुट गया है। मॉस्को पिछले दरवाजे से बातचीत के जरिए मुद्दे को सुलझाने की जुगत कर रहा है। हालांकि रूस के इन कोशिशों के पीछे कई अन्य अहम कारण भी हैं। हाल ही में चीन पर रूस ने खुफिया जानकारी एकत्र करने का आरोप लगाया है। ऐसे में रूस अपने पुराने दोस्त भारत को लेकर ज्यादा एक्टिव हो गया है। भारत और चीन दोनों से बेहतर रिश्तों का इस्तेमाल कर रूस इस तनाव को कम करवाना चाह रहा है। यही वजह है कि तनाव के बाद भी मॉस्को में विक्ट्री डे परेड के जरिए रूस भारत और चीन के साथ बैठक कर रहा है।
-एजेंसियां

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