युद्ध की नई रणनीति इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप्स पर काम कर रही है भारतीय सेना

नई दिल्‍ली। पाकिस्तान की नापाक हरकतों और चीन की धमकियों के बीच भारतीय सेना खुद को और बेहतर करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। इसमें युद्ध की स्थिति में नए कॉन्सेप्ट से काम किया जा सकता है, जिसे इंटिग्रेटिड बैटल ग्रुप्स (IBG) नाम दिया गया है। आने वाले कुछ महीनों तक पंजाब के वेस्टर्न कमांड में इसका अभ्यास भी किया जाएगा। नए प्लान को आर्मी ने रक्षा मंत्रालय के पास भेज दिया है। वहां से ऑर्डर के बाद परीक्षण किया जाएगा और सफल रहने पर इसे लागू किया जाएगा।
IBG कॉन्सेप्ट के अभ्यास के लिए सेना दल को दो हिस्सों में विभाजित कर अभ्यास करवाया जाएगा। इसमें से पहले का रोल क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन्स में आक्रामक भूमिका निभाने का होगा। वहीं दूसरा दल दुश्मन के हमले रोकने और अपने क्षेत्र का बचाव करने का काम करेगा। आर्मी इस कॉन्सेप्ट को ब्रिगेड व्यवस्था की जगह लाना चाहती है। आईबीजी खुद अपने आप में युद्ध की स्थिति से निपटने में सक्षम टीम होगी। वहीं ब्रिगेड व्यवस्था को युद्ध की स्थिति में साजो-सामान के लिए इंतजार करना पड़ता है। ब्रिगेड में कम से कम 3 से 4 यूनिटस् होती हैं। प्रत्येक यूनिट में 800 सैनिक होते हैं। वहीं आईबीजी कॉन्सेप्ट में युद्ध के सभी जरूरी सामान पर भी जोर होगा। जैसे तोप, टैंक, एयर डिफेंस आदि।
आईबीजी की आक्रमकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें टैंक्स की संख्या और क्वॉलिटी पर खासा ध्यान दिया गया है, जिससे वह दुश्मन की सीमा पर जाकर जमकर शक्ति प्रदर्शन कर सकें। हमले का काम आर्मी के मुख्य दलों का होगा। ये दल क्रॉस बॉर्डर होनेवाले आक्रमक ऑपरेशन्स को अंजाम देंगे। एक डिवीजन में ऐसे कुल चार दल होंगे, जिनमें टैंक और तोप बड़ी संख्या में मौजूद होंगे।
बचाव के लिए भी नई रणनीति
अपनी सीमा का बचाव करने के लिए भी आर्मी ने नई रणनीति बनाई है। डिफेंस करने के लिए भी आने वाले वक्त में पहले के मुकाबले ज्यादा थल सैनिक मौजूद होंगे। इनका काम मुख्य स्ट्राइक ग्रुप का साथ देना और अपने क्षेत्र का बचाव करना होगा। इसबारे में अधिकारी ने कहा, ‘अगर इस कॉन्सेप्ट ने काम किया तो देखेंगे कि इसे सबसे पहले कहां एप्लाई किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर हम एक डिवीजन को दो आईबीजी में बांट सकते हैं या फिर ब्रिगेड को ही अपग्रेड कर सकते हैं।’
-एजेंसियां

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