भारत ने यूएन में कहा, Masood Azhar को सजा न दिला देने तक चैन से नहीं बैठेंगे

भारत ने यूएन में कहा है कि जब तक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना Masood Azhar को सजा न दिला दें, हम चैन से नहीं बैठेंगे। अमेरिका ने कुछ महीने पहले नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे पर अजहर को ग्लोबल आतंकियों की लिस्ट में डाला था। कुछ दिन पहले चीन ने भी उसे आतंकी माना है। यूएन में भारत के रिप्रजेंटेटिव सैय्यद अकबरुद्दीन ने रविवार को बताया कि हमें उम्मीद है कि यूनाइटेड नेशन भी मसूद अजहर को आतंकी घोषित करेगा। उसके लिए अब वक्त कम बचा है।

बता दें कि Masood Azhar जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंटड है। भारत ने 18 साल पहले उसे प्लेन हाईजैकिंग केस में छोड़ा था। फिलहाल यूएनएससी ने जैश-ए-मोहम्‍मद पर बैन लगा रखा है लेकिन इसके सरगना अजहर पर कोई बैन नहीं है।
भारत ने पिछले साल मार्च में अजहर पर बैन लगाने के लिए यूनाइटेड नेशंस में प्रपोजल रखा था। उस वक्त चीन ने इसे 6 महीने (सितंबर तक) के लिए रोक दिया था। 15 सदस्यों वाली सिक्युरिटी काउंसिल में चीन इकलौता देश था, जिसने विरोध किया था। काउंसिल के बाकी 14 मेंबर ने इस प्रपोजल का सपोर्ट किया था। फिर सितंबर में इसे 3 और महीने के लिए रोक दिया था। पिछले साल 31 दिसंबर को यह रोक खत्म हुई थी। इसके बाद अमेरिका, फ्रांस और यूके ने मिलकर फिर से एक नया प्रपोजल लाए थे।
चीन फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन लू कांग ने मीडिया से कहा था, “जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर को इंटरनेशनल टेररिस्ट घोषित करने के प्रपोजल को बीजिंग इसलिए मंजूरी नहीं दे सकता, क्योंकि इसके लिए हमारी शर्तें अभी पूरी नहीं हुई हैं।”
भारत के प्रपोजल पर बार-बार अड़ंगा लगाता है चीन
चीन यूनाइटेड नेशन्स (यूएन) में भारत के उस प्रपोजल को बार-बार अटका देता है जिसमें अजहर को आतंकी डिक्लेयर करने की मांग की जाती है।
चीन अपनी वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर यूएन की 1267 कमेटी में अजहर के खिलाफ प्रपोजल को टेक्निकल होल्ड पर डाल देता है।
पिछले साल चीन ने अप्रैल, अक्टूबर और दिसंबर में इंडिया के प्रपोजल पर टेक्निकल होल्ड लगाया था।
क्या है 1267 कमेटी?
आतंकियों और आतंकी संगठनों पर बैन लगाने का फैसला यूएनएससी की 1267 कमेटी ही करती है। अक्टूबर 1999 में यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने 1267 रेजोल्यू्शन पास किया था। इसी के तहत ओसामा बिन लादेन को आतंकी घोषित करने के बाद उस पर और उसके संगठन अल कायदा पर बैन लगाया गया था।
आतंकी घोषित होने पर क्या होगा?
मसूद अजहर को आतंकियों के लिए लिस्ट में डाला जाता है तो यह भारत के लिए कामयाबी होगी।
अजहर की प्रॉपर्टी जब्त की जा सकेगी। वह खुलेआम पाकिस्तान में रैलियां नहीं कर सकेगा, जैसा कि अभी वह करता है।
एक देश से दूसरे देश की आवाजाही पर रोक होगी। बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद पर पहले से ही बैन लगा है।
पठानकोट हमले में क्या है मसूद अजहर का रोल?
2-3 जनवरी 2016 की दरमियानी रात पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पंजाब में एयरफोर्स के बेस पर हमला किया था। इसमें 7 जवान शहीद हुए थे। 4 दिन तक चले कॉम्बिंग ऑपरेशन में जवानों ने चारों आतंकियों को मार गिराया था।
यह खुफिया जानकारी मिली थी कि अजहर ने 2016 में पठानकोट हमले के बाद फोन के जरिए एक बड़ी रैली को ऐड्रेस किया था, जिसमें उसने भारत के खिलाफ फिर से जिहाद शुरू करने का ऐलान किया था।
पठानकोट अटैक मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने मसूद अजहर और जैश-ए-मोहम्मद तीन लीडर्स के खिलाफ प्रोक्लैमेशन ऑर्डर्स जारी किए हैं। पठानकोट अटैक के मामले में NIA की चार्जशीट में भी इसका नाम है।
18 साल पहले प्लेन हाईजैकिंग केस में मसूद को छोड़ा गया था
24 दिसंबर, 1999 को आतंकवादियों ने इंडियन एयरलाइन्स के IC-814 प्लेन को काठमांडू से हाईजैक किया था। इसमें 178 पैसेंजर सवार थे।
हाईजैक करने के बाद प्लेन को अमृतसर, लाहौर और दुबई के रास्ते अफगानिस्तान के कंधार एयरपोर्ट ले जाया गया था। दुबई में कुछ पैसेंजर्स को छोड़ दिया गया।
आतंकियों ने भारत के सामने 178 पैसेंजरों की हिफाजत के बदले तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया।
भारत की जेलों में बंद आतंकी मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख को कंधार ले जाया गया था। मसूद अजहर ने 2000 में जैश-ए-मोहम्मद बनाया था।
मियां की दौड़ मस्जिद तक
पाकिस्तान ने यूनाइटेड नेशंस (UN) में फिर कश्मीर मसला उठाने की बात कही है। इस पर भारत के टॉप डिप्लोमैट सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, “वर्ल्ड बॉडी में जिस मुद्दे पर चर्चा दशकों से नहीं हुई है, वहां इस्लामाबाद का कश्मीर इश्यू उठाने का फैसला ऐसे ही है, जैसे मियां की दौड़ मस्जिद तक।’ अकबरुद्दीन UN में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव हैं।
UN की जनरल असेम्बली सेशन में भारत के एजेंडे पर सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, “भारत प्रोग्रेसिव और फॉरवर्ड लुकिंग एजेंडा पर काम कर रहा है। हमने हमारी अप्रोच का खाका खींचा है, जो प्रोग्रेसिव है। हम अपने लक्ष्यों को लेकर चल रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसे देश हैं, जो बीते हुए कल के मुद्दों की बात कर रहे हैं तो वे बीते हुए कल के ही लोग हैं।
23 को UN में स्पीच देंगी सुषमा
अकबरुद्दीन ने कहा, “अगर पाकिस्तान का फोकस ऐसे मुद्दे पर है, जो यूएन की टेबल पर कई दशकों से नहीं रखा गया। अगर वे ऐसा ही चाहते हैं तो फिर ऐसा ही सही।”
पाकिस्तान के नए प्राइम मिनिस्टर शाहिद खाकन अब्बासी यूएन की जनरल असेम्बली सेशन में इसी हफ्ते स्पीच देंगे। PAK विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब्बासी यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे।
भारत ने पहले भी कहा- किसी को दखल का हक नहीं
इससे पहले मुस्लिम देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ द इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की ओर से पाकिस्तान ने यूएन में कश्मीर का मसला उठाया था।
भारत ने तब भी कहा था कि कश्मीर हमारा अभिन्न हिस्सा है। लिहाजा OIC को भारत के अंदरूनी मामलों में दखल का कोई हक नहीं है।”
यूएन में भारत की ओर से भारत के फर्स्ट सेक्रेटरी डॉ. सुमित सेठ ने कहा था, “भारत को अफसोस है कि OIC ने अपने बयान में भारत के अभिन्न और अविभाजित राज्य जम्मू-कश्मीर से जुड़े गलत फैक्ट्स शामिल किए हैं। भारत ऐसे बयान को पूरी तरह खारिज करता है। OIC को भारत के अंदरूनी मामलों में दखल करने का कोई हक नहीं है।”
UN में डिबेट के दौरान भी दिया था करारा जवाब
यूनाइटेड नेशंस में डिबेट के दौरान इंडियन डिप्लोमैट श्रीनिवास प्रसाद ने आतंकवाद को देश की पॉलिसी के टूल के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तान की निंदा की थी। भारत ने कहा कि पाकिस्तान ‘कल्चर ऑफ पीस’ के नाम पर यूनाइटेड नेशंस में जम्मू और कश्मीर का मसला उठाता है, जबकि सभी जानते हैं कि PAK आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह है।
UN में क्या कहा पाकिस्तान ने?
यूएन के कल्चरल फोरम में डिबेट के दौरान गुरुवार को पाकिस्तान के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव मलीहा लोधी ने कश्मीर का मसला उठाया था।
मलीहा लोधी ने कहा, “यहां पर बहुत अरसे से लटके पड़े मसले भी हैं, जिनमें किए गए अन्याय को अब ठीक किए जाने की जरूरत है। यहां लोगों को अभी भी उनकी इच्छा के अनुसार, जीने के मौलिक अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं।”

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने यहां कहा, ‘‘न्यायिक शब्दों में कहें तो यह मामला विचाराधीन है। इस समय यह मामला संयुक्त राष्ट्र की समिति के समक्ष है। हम उम्मीद करते हैं कि समिति Masood Azhar को आतंकी का दर्जा देने की अपनी भूमिका निभाएगी। हमने कई बार उसे आतंकी घोषित करवाने की कोशिश की है लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है।’’

पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के भारत के प्रस्ताव को अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन का समर्थन है। अगस्त में चीन ने इस प्रस्ताव पर अपनी तकनीकी रोक की अवधि को तीन माह का विस्तार दे दिया था।

चीन की तकनीकी रोक की अवधि दो नवंबर को खत्म हो रही है। यदि चीन ने रोक को यह विस्तार नहीं दिया होता तो Masood Azhar स्वत: ही संयुक्त राष्ट्र की ओर से एक आतंकी घोषित हो जाता।

-एजेंसी