अब भारत के पास भी होगा स्वदेशी GPS, गूगल मैप्स को देगा मात

नई द‍िल्ली। 2024 तक भारत के पास अपना GPS होगा, जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिगं सिस्टम (GPS – Global Positioning System) ज‍िससे नई पीढ़ी से लेकर बड़ी उम्र के लोग भी वाकिफ हैं।

अभी तक गूगल का GPS एप्लिकेशन दुनियाभर में करोड़ों लोगों को रास्ता ढूंढने में मदद कर रहा है। यह एप हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। कहीं भी आने-जाने या किसी का लोकेशन जानने के लिए हम गूगल की इस टेक्नोलॉजी पर निर्भर हैं लेकिन अब हमें हमारा स्वदेशी जीपीएस मिलने वाला है। ये भारत का अपना जीपीएस होगा, जिसे अपने देश में विकसित किया जा रहा है।

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग Department of Science and Technology – DST की मदद से सर्वे ऑफ इंडिया काम कर रहा है। इसमें आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया जैसे कई सरकारी संस्थानों से भी मदद ली जा रही है।

इस बारे में DST सचिव आशुतोष शर्मा का कहना है कि ‘इस तरह की डिजिटल मैपिंग पहले कभी नहीं हुई है। देश का यह अपना मैप गूगल मैप्स (Google Maps) से भी बेहतर रिजॉल्यूशन का होगा। इसमें आपके शहर के हर गली, सीमाएं साफ और सही दिखाई देंगी।’

सर्वे ऑफ इंडिया ने इसके लिए पूरे देश में हर 20 किमी की दूरी पर रेफरेंस प्वाइंट बनाया है, जिसे कॉन्टीन्यूअसली ऑपरेटेड रेफरेंस स्टेशन (CORS) नेटवर्क कहते हैं। इससे 3डी पोजिशनिंग मिलेगी और एक्यूरेसी 10 गुना तक ज्यादा होगी।

इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े स्तर पर ड्रोन आधारित डिजिटल मैपिंग चल रही है। भारत के शहरों की हर गली-नुक्कड़ की सही और वास्तविक इमेजिंग पर तेजी से काम चल रहा है। कुछ महीने पहले ही कर्नाटक, हरियाणा, महाराष्ट्र और गंगा बेसिन में यह काम शुरू हो चुका है।

पहले फेज में क्यों चुने गए महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक?
सचिव आशुतोष शर्मा ने बताया कि राज्यों को इस प्रोजेक्ट के लिए उनके उत्साह के आधार पर चुना गया है। जैसे हरियाणा में मैपिंग का खर्च वह राज्य खुद उठा रहा है। वहीं गंगा बेसिन के लिए नमामि गंगे एजेंसी खर्च वहन कर रही है।’

उन्होंने बताया कि अब से 5 साल पहले इसका खर्च करीब 10 हजार करोड़ आ रहा था। वही काम आज एडवांस्ड तकनीक के साथ करीब एक हजार करोड़ रुपये की लागत में हो रहा है।

लोगों के लिए कब तक उपलब्ध होगा ये जीपीएस?
बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) में डीएसटी सचिव आशुतोष शर्मा ने बताया कि भारत में आम लोगों के लिए यह स्वदेशी जीपीएस 2024 तक उपलब्ध हो जाएगा।

– एजेंसी

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