प्रवासी नागरिकों से धन प्राप्‍त करने के मामले में भारत शीर्ष स्‍थान पर

नई दिल्‍ली। देश के बाहर रहने वाले नागरिकों द्वारा अपने देश में पैसे भेजने के मामले में भारत एक बार फिर अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखेगा। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट में शनिवार को बताया गया कि 80 अरब डॉलर के साथ भारत ने इस सूची में फिर से शीर्ष स्थान हासिल किया है।
ग्लोबल लेंडर के मुताबिक भारत के बाद दूसरे स्थान पर चीन (67 अरब डॉलर), तीसरे पर संयुक्त रूप से मैक्सिको और फिलीपींस (34 अरब डॉलर) और चौथे स्थान पर मिस्र (26 अरब डॉलर) है।
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि विकासशील देशों में रेमिटेंस (धन प्रेषण) 2018 में 10.8 प्रतिशत बढ़कर 528 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। यह नया रेकॉर्ड स्तर 2017 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि का के बाद का है।
ऐसा अनुमान जताया जा रहा है कि वैश्विक रेमिटेंस जिसमें हाई इनकम वाले देश भी शामिल हैं, 10.3 प्रतिशत बढ़कर 689 अरब डॉलर हो जाएगा।
भारत में रेमिटेंस 2016 में 62.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2017 में 65.3 अरब डॉलर हो गया था। कहा जा रहा है कि 2017 में रेमिटेंस भारत की जीडीपी का 2.7 प्रतिशत था।
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2018 में दक्षिण एशिया में रेमिटेंस 13.5 प्रतिशत बढ़कर 132 अरब डॉलर हो जाएगा, जो 2017 में 5.7 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले काफी अधिक है। इस बढ़ोत्तरी का कारण अमेरिका जैसे देशों की मजबूत आर्थिक स्थिति और कुछ जीसीसी देशों में तेल की कीमतों में वृद्धि के मद्देनजर सकारात्मक प्रभाव रहा। 2018 की पहली छमाही में यूएई जैसे देश के आउटफ्लो में 13 फीसदी की वृद्धि देखी गई।
वहीं, 2019 के लिए अनुमान लगाया जा रहा है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं के विकास में नियंत्रण, गल्फ देशों के लिए कम माइग्रेशन और तेल की कीमत में बढ़ोतरी के कारण इस क्षेत्र के लिए धन प्रेषण में वृद्धि 4.3 प्रतिशत तक धीमी हो जाएगी।
-एजेंसियां

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