कश्मीर में शिष्टमंडल भेजने का प्रस्ताव पर भारत ने दी OIC को तीखी प्रतिक्रिया

भारतीय विदेश मंत्रालय ने OIC के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह पाकिस्तान जैसे निहित स्वार्थी तत्वों को पक्षपातपूर्ण और एकतरफा प्रस्ताव के जरिये भारत विरोधी दुष्प्रचार के लिये समूह के मंच का इस्तेमाल न करने दे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ओआईसी चीफ के साथ बैठक के दौरान कई विषयों पर चर्चा हुई। हमारे राजदूत ने उन्हें बताया कि भारत के बारे में गलत धारणा को ठीक किये जाने की जरूरत है जो निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा फैलाया जाता है।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र में मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान अब इस्लामिक देशों के संगठन (OIC) के जरिए भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। पांच जुलाई को पाकिस्तान के बरगलाने पर गुमराह होते हुए ओआईसी ने कश्मीर में एक शिष्टमंडल भेजने बात की थी।
ओआईसी के कार्यकारी प्रमुख ने सऊदी अरब में भारतीय राजदूत के साथ दुर्लभ मुलाकात के दौरान भारतीय मुसलमानों के मुद्दे को उठाया और जम्‍मू-कश्‍मीर में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का प्रस्‍ताव दिया था।
पाकिस्तान के बहकावे में आया ओआईसी!
ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज दुनियाभर के मुसलमान मुल्कों का रहनुमा होने का दावा करता है। 25 सितंबर 1969 में बने इस संगठन का पाकिस्तान संस्थापक सदस्य है।
दुनिया में मुसलमानों की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी वाला भारत इस संगठन का सदस्य नहीं है। पाकिस्तान शुरू से ही इस संगठन का उपयोग भारत के खिलाफ करता आया है। खासकर कश्मीर मुद्दे पर कई बार ओआईसी ने भारत के खिलाफ बयान दिया है। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से इस संगठन के तेवर भारत को लेकर काफी नरम देखने को मिले हैं।
ओआईसी में सऊदी प्रभुत्व को चुनौती दे चुका है पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने 2019 में ओआईसी में सऊदी अरब के प्रभुत्व को चुनौती दी थी। जब भारत ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किया था, तब पाकिस्तान ने ओआईसी से कड़ी प्रतिक्रिया देने की अपील की थी लेकिन सऊदी अरब के झंडे तले चलने वाले इस संगठन ने भारत के दबाव में पाकिस्तान का साथ नहीं दिया था। कुरैशी के बयान के जवाब में सऊदी ने पाकिस्तान को कर्ज पर तेल की सप्लाई रोक दी थी और 3 बिलियन डॉलर के दूसरे कर्ज को तुरंत लौटाने को कहा था।
यूएन में भी भारत को घेरने में नाकाम रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और स्थायी प्रतिनिधि समेत जिनेवा में पाकिस्तानी राजदूत कई बार भारत को यूएन के मंच पर घेरने की नाकाम कोशिश कर चुके हैं। हर बार भारत ने कड़े लहजे के साथ पाकिस्तान के हर झूठ की बखिया उधेड़ी है। इतना ही नहीं यूएन में पाकिस्तान, चीन और तुर्की को छोड़कर सभी देशों ने भारत का ही साथ दिया है। यही कारण है कि पाकिस्तान अब ओआईसी के सहारे भारत को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।
-एजेंसियां

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