भारत ने चीन के अनुचित दावों को कभी स्‍वीकार नहीं किया: अरिंदम बागची

नई दिल्‍ली। दिल्ली में 7 देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बैठक हुई। इस दौरान अफगानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा हुई। इस बैठक में पाकिस्तान को भी निमंत्रण दिया गया था। अफगान को लेकर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में पाकिस्तान ने हिस्सा नहीं लिया। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि इससे पता चलता है उनका अफगानिस्तान के मुद्दे पर क्या रवैया है।
वहीं, दूसरे मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि यूएस डिपार्टमेंट आफ डिफेंस की रिपोर्ट में चीन द्वारा भारत-चीन बार्डर के पास निर्माण कार्यों की जानकारी दी गई। चीन ने पहले भी सीमा से लगते क्षेत्र में निर्माण कार्य किए हैं जिसमें दशकों के दौरान अवैध रूप से कब्जा किया गया क्षेत्र शामिल है। भारत ने न तो अपने क्षेत्र पर इस तरह के अवैध कब्जे को स्वीकार किया है और न ही चीन के अनुचित दावों को स्वीकार किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा राजनयिक माध्यमों से ऐसी गतिविधियों का कड़ा विरोध किया है और भविष्य में भी ऐसा करती रहेगी। सरकार ने सीमा के बुनियादी ढांचे को भी बढ़ाया है, जिसमें सड़कों, पुलों का निर्माण शामिल है, जिसने सीमा पर स्थानीय आबादी को बहुत जरूरी संपर्क प्रदान किया है।
सरकार अरुणाचल प्रदेश सहित आजीविका में सुधार के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ बुनियादी ढांचे के निर्माण के उद्देश्य के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार भारत की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले विकास पर लगातार नजर रखे हुए है और संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी उपाय कर रही है।
ओआईसी के शीर्ष अधिकारियों का कश्मीर की यात्रा पर विदेश मंत्रालय अरिंदम बागची ने कहा कि यह हमारा आंतरिक मामला है। मैंने पहले भी कहा था कि हम गुलाम कश्मीर (PoJK) की इस तरह की यात्राओं को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानते हैं।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय लिया गया है कि लगभग 1500 तीर्थयात्रियों का एक जत्था 17-26 नवंबर से 1974 प्रोटोकाल के तहत भारत-पाक के बीच धार्मिक स्थलों की यात्रा पर पाकिस्तान जाएगा। गुरुद्वारा दरबार साहिब, श्री पंजा साहिब, डेरा साहिब, ननकाना जाने के लिए निर्धारित है। साथ ही साहिब, करतारपुर साहिब गुरुद्वारा सच्चा सौदा की यात्रा भी शामिल है।
-एजेंसियां

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