चीन को चौतरफा घेरने के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक किला बना रहा है भारत

नई दिल्‍ली। भारत का पड़ोसी मुल्क और विस्तारवादी सोच का प्रतिनिधित्व करने वाला चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। ऐसा नहीं है कि ये सोच उसकी सिर्फ भारत के साथ ही है बल्कि दुनिया के तमाम ऐसे मुल्क हैं जो चीन की इस आदत से वाकिफ हैं। भारत-चीन के बीच एलएसी पर तनातनी के बीच चीन हिंद महासागर पर भी अपना प्रभुत्व कायम रखना चाहता है। भारत भी चीन को घेरने के लिए चौतरफा एक कूटनीतिक और रणनीतिक किला बना रहा है।
पहली बार उच्चस्तरीय बैठक
चीन पश्चिमी हिंद महासागर में तेजी से अपने पैस पसार रहा है। ऐसे में भारत इस क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मेडागास्कर और कोमोरोस द्वीप समूह के साथ अपनी रक्षा और सुरक्षा दोनों को बढ़ाने की कोशिश में जुटा हुआ है। दोनों देशों ने रक्षा मंत्रियों की हिंद महासागर क्षेत्र की बैठक में अपनी भागीदारी की पुष्टि की है, जिसे भारत अगले सप्ताह आयोजित करेगा।
मेडागास्कर प्रतिनिधिमंडल को यहां की रक्षा मंत्री रिचर्ड राकोटोनिरिना लीड करेंगीं और कोमोरोस अपने विदेश मंत्री धोइहिर धूलकमल के तहत एक रक्षा प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। यह पहली बार है कि उच्च स्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडल अफ्रीका के पूर्वी तट से द्वीपसमूह से भारत का दौरा करेगा।
भारत करेगा मेजबानी
भारत 4 फरवरी को बेंगलुरु में एयरो इंडिया 2021 के साथ हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन थीम्ड एनहैंस्ड पीस सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन की मेजबानी करेगा। जैसा कि भारतीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि यह एक कॉन्क्लेव की संस्थागत और सहकारी वातावरण में संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास जो हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा दे सकता है। पिछले कुछ सालों में भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) से लेकर COVID-19 महामारी के दौरान भोजन और चिकित्सा की आपूर्ति बढ़ाई है। भारत ने 5 देशों मालदीप, मॉरीशस, मेडागास्कर, कोमोरोस और सेशेल्स की मदद की है।
चीन बढ़ा रहा अपनी मौजूदगी
मेडागास्कर और कोमोरोस के भू-राजनीतिक महत्व को स्वीकार करते हुए, जहां चीन अपनी कनेक्टिविटी और सेक्यू-रिटी संबंधी गतिविधियों को लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में 2029 में विदेश मंत्रालय ने हिंद महासागर के देशों श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस और सेशेल्स को एक डिविजन के अंतर्गत लाने का फैसला लिया था। विदेश मंत्रालय ने इसके लिए इंडियन ओसियन रीजन डिविजन के गठन का भी फैसला लिया था।
मेडागास्कर को अभी भी इंतजार
हालांकि मेडागास्कर 2019 से दोनों देशों के बीच एक रक्षा अधिकारी की नियुक्ति का इंतजार कर रहा है। रक्षा मंत्रालय को जल्द ही प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। भारत ने 2018 में मेडागास्कर के साथ एक रक्षा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत उन्हें मेडागास्कर के रक्षा कर्मियों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के लिए कई परियोजनाओं पर चर्चा करने के लिए कहा गया था।
चीन भी पीछे नहीं
चीन की ओर से भी कहा गया है कि वो सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नजर रखने के लिए मेडागास्कर में एक रक्षा अटैची नियुक्त करने पर भी विचार किया जा रहा है। भारत और चीन दोनों के लिए, भू-सामरिक द्वीपों के साथ द्विपक्षीय जुड़ाव को तेज करना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे पश्चिमी हिंद महासागर में अपनी नौसेना की उपस्थिति को बढ़ाते हैं।
-एजेंसियां

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