इकॉनमी पर इंडिया इंक ने की मोदी सरकार की तारीफ, 10 में से 7 नंबर दिए

नई दिल्‍ली। इकॉनमी पर इंडिया इंक ने नरेंद्र मोदी सरकार की तारीफ की है, लेकिन एक्सपोर्ट और ऐग्रिकल्चर सेक्टर पर दबाव कम करने में सुस्ती से वह खुश नहीं है। नववर्ष की पूर्वसंध्या पर जारी देशभर में सीईओ के बीच एक सर्वे की रिपोर्ट से यह बात पता चली है।
अधिकतर पर्टिसिपेंट्स ने सरकार को अब तक के परफॉर्मेंस पर 10 में 7 नंबर यानी कुल 70% मार्क्स दिए। इससे पता चलता है कि मुश्किलों के बावजूद पॉलिटिकल लीडरशिप पर इंडिया इंक का भरोसा बना हुआ है।
सर्वे में शामिल होनेवाले ज्यादातर सीईओज ने कहा कि उन्हें अगले साल इकनॉमिक ग्रोथ में बहुत अधिक बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद नहीं है। उनका यह भी मानना है कि बैड लोन की समस्या भी बहुत जल्द नहीं सुलझने जा रही है। इकनॉमिक टाइम्स सीईओज पोल 10 दिनों तक चला, जिसमें रिपोर्टर ने आईटी से लेकर मेटल और हेवी इंजिनियरिंग सेक्टर के टॉप 51 सीईओज से बात की।
करीब 55 पर्सेंट पर्टिसिपेंट्स का मानना है कि 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 6.5-7 पर्सेंट रह सकती है। इसका मतलब यह है कि 2015-17 के बीच पस्त पड़ी इकॉनमी की रिकवरी में अधिक समय लगने की उम्मीद की जा रही है। 49 पर्सेंट पर्टिसिपेंट्स ने कहा कि वे नोटबंदी और जीएसटी संबंधी दिक्कतों से उबर गए हैं, लेकिन 43 पर्सेंट ने बताया कि वे अभी भी रिकवरी फेज में हैं। 67 पर्सेंट पर्टिसिपेंट्स ने कहा कि गुजरात चुनाव के नतीजों की वजह से अब केंद्र सरकार लोक-लुभावन नीतियों का ऐलान कर सकती है। गुजरात चुनाव में बीजेपी की सीटें कम हुईं, लेकिन वह सरकार बचाने में सफल रही।
33 पर्सेंट पार्टिसिपेंट्स ने कहा कि वे नए साल में कैपिटल एक्सपेंडिचर की योजना बना रहे हैं, जबकि 92 पर्सेंट ने ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर बेहतर उम्मीद जाहिर की। 73 पर्सेंट ने कहा कि वे नए साल में अधिक लोगों को नौकरी पर रखेंगे। इससे पता चलता है कि पिछले साल के स्लोडाउन का इन कंपनियों के हायरिंग प्लान पर असर नहीं पड़ा है।
2015-17 का समय भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए अच्छा नहीं रहा। इस दौरान कमोडिटीज के दाम गिरे, बैड लोन संकट पैदा हुआ और बैंकों को ग्रोथ की अनदेखी करके प्रोविजनिंग बढ़ानी पड़ी। नवंबर 2016 में नोटबंदी का ऐलान हुआ और जुलाई 2017 में जीएसटी लागू किया गया। इससे इंडिया इंक पर बुरा असर पड़ा। बड़ी कंपनियां इस मुश्किल से जहां जल्द उबर गईं, वहीं असंगठित और कृषि क्षेत्र को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
57 पर्सेंट पर्टिसिपेंट्स ने बताया कि सरकार ने एक्सपोर्ट ग्रोथ को बढ़ाने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड बढ़ाने की सरकार की कोशिशों से भी इंडिया इंक खुश नहीं है। 51 पर्सेंट पर्टिसिपेंट्स ने कहा कि इसके लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। वर्षा के असमान वितरण और फसलों की कम कीमत से परेशान किसानों की समस्या असरदार ढंग से नहीं सुलझाई गई। 78 पर्सेंट ने कहा कि सरकार सभी जरूरी उपाय कर रही है, जबकि 14 पर्सेंट ने कहा कि स्थितियों को ठीक से हैंडल नहीं किया गया।
-एजेंसी