पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब देने को भारत ने उठाया नायाब कदम

अमृतसर। सीमा पर पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भारत अब रेडियो हथियार का इस्तेमाल करने वाला है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे अटारी के घरिंडा गांव में पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का जवाब देने के लिए भारत सरकार ने यह नायाब कदम उठाया है। 20 किलोवॉट फ्रीक्वंसी मॉड्यूलेशन (एफएम) ट्रांसमीटर सितंबर से अमृतसर का पहला एफएम रेडियो ब्रॉडकास्ट 24 सितंबर से शुरू करेगा। यह न सिर्फ भारत बल्कि सीमा पार पाकिस्तान के शेखूपुरा, मुरीदके, कसूर, ननकाना साहिब और गुजरनवाला तक सुना जा सकेगा।
भारत सरकार का यह काम पाकिस्तान सरकार के रेडियो प्रोग्राम पंजाबी दरबार के ब्रॉडकास्ट का बाद जरूरी हो गया था। ऑल इंडिया रेडियो और सीमावर्ती इलाकों के निवासियों के मुताबिक पंजाबी दरबार 30 साल से भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा चला रहा है। यहां तक कि उसके जरिये खालिस्तान को भी बढ़ावा दिया जाता है। भारतीय पंजाब के लोगों को जरनैल सिंह भिंडरांवाले के भाषण आज तक सुनाए जाते हैं।
भारत के खिलाफ प्रसारण
हर शाम 7 से 7:30 चलने वाले प्रोग्राम की शुरुआत सिख धार्मिक प्रार्थनाओं से होती है। ऐसी ही एक ब्रॉडकास्ट में भारत के पंजाब की सड़कें खराब होने की बात कही जा रही थी। उसमें बताया गया कि साल 2016 में एक बस के खाई में गिर जाने से 7 स्कूली बच्चों की जान चली गई थी। उसमें यह भी दावा किया गया कि उस गांव से पंजाबी दरबार को खत लिखकर इस बारे में चिंता जताई गई थी।
जवाब में प्रोपेगैंडा नहीं करेगा भारत
पाकिस्तान के रेडियो प्रोपेगैंडा को मॉनिटर करने वाले इंटेलीजेंस सूत्रों के मुताबिक इंटरनेट से पहले के वक्त में वहां के रेडियो स्टेशन भारतीय अखबारों से खबरें लेकर भारत अब भारत अपनी एएम सेवा बंद कर एफएम टेक्नोलॉजी में पांच दशक पुराना कार्यक्रम देस पंजाब ब्रॉडकास्ट करेगा। AIR जालंधर के अधिकारियों का मानना है कि इससे वह भारत सीमा के पार श्रोताओं तक पहुंच सकेंगे। असिस्टेंट डायरेक्टर संतोष ऋषि ने बताया कि भारत पंजाबी दरबार का जवाब प्रोपेगैंडा से नहीं देगा बल्कि क्वॉलिटी प्रोग्राम को तरजीह दी जाएगी। पाकिस्तान से पहले भी उन्हें कई खत मिल चुके हैं।
हर दिन एफएम 103.6 पर देस पंजाब कार्यक्रम दो घंटे चलेगा। इसमें जवाब हाजिर है, गुलदस्ता, राब्ता जैसे संस्कृति और साहित्य से जुड़े कार्यक्रम होंगे। साथ ही सीमा के पास हो रहे विकास, मेडिकल, शिक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के बारे में बताया जाएगा।
-एजेंसियां

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