भारत ने अपनी सबसे बड़ी ‘तेल गुफा’ किराये पर दी

भारत ने अब अपनी सबसे बड़ी ‘तेल गुफा’ को किराये पर दे दिया है। अबु धाबी तेल कंपनी पादुर, कर्नाटक स्थित ‘रणनीतिक तेल भंडारण’ सुविधा का इस्तेमाल करेगी। इसके लिए अबु धाबी नेशनल ऑइल कंपनी (एडीएनओसी) ने शुरुआती समझौता किया है। आइए जानते हैं, क्या है ‘तेल गुफा’ और इसका महत्व…
भारत के पास 3 तेल गुफा
भारत के पास तीन स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं। जमीन के नीचे बनाए गए इन तेल गुफाओं में 53.30 लाख टन कच्चा तेल स्टोर करके रखा जा सकता है।
पादुर में सबसे अधिक क्षमता
विशाखापत्तनम स्थित तेल स्टोरेज 13.3 लाख टन तेल से भरा हुआ है। मैंगलोर की तेल गुफा की क्षमता 15 लाख टन है। पादुर स्थित तेल भंडार की क्षमता 25 लाख टन है, अभी यह खाली है। भारत अतिरिक्त 65 लाख टन क्षमता बढ़ाने के लिए पादुर और ओडिशा के चंदीखोल में तेल भंडार का निर्माण करने वाला है।
संकट के दौरान मददगार
जमीन के नीचे बनाए गए विशाल तेल भंडार देश को तेल सुरक्षा प्रदान करते हैं और किसी संभावित तेल संकट के दौरान बेहद मददगार साबित हो सकते हैं। मौजूदा 3 तेल भंडार से भारत 10 दिन के कच्चे तेल की जरूरत को पूरा कर सकता है। दो अन्य के निर्माण से यह क्षमता और 12 दिन बढ़ जाएगी। इसके अलावा भारतीय रिफाइनरीज के पास 65 दिनों के लिए पर्याप्त तेल भंडारण क्षमता है।
​तब केवल 3 दिन के लिए था तेल
1990 में खाड़ी युद्ध के दौरान तेल संकट उत्पन्न हुआ था और तब हमारे पास केवल 3 दिन के लिए तेल था।
तेल गुफा खोदने पर कितना खर्च
भारत ने इन 3 तेल गुफाओं के निर्माण पर 4,100 करोड़ रुपये खर्च किया था।
विदेशी कंपनी को गुफा देने से भारत को फायदा
विदेशी कंपनियों को ऑइल स्टोर किराये पर देने से भारत 10,000 करोड़ रुपये की बचत कर सकता है।
भारत का होगा पहला हक
यह समझौता भारतीय रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व इकाई आईएसपीआरएल और यूएई की एडीएनओसी के बीच हुआ है। समझौते के तहत एडीएनओसी इस भंडारगृह से कच्चे तेल की बिक्री और व्यापार कर सकती है। इसे स्थानीय रिफाइनरियों को भी बेचा जा सकता है, लेकिन आपात स्थिति में इस तेल पर पहला अधिकार भारत सरकार का होगा।
पहले भी हुआ समझौता
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की कंपनी के साथ इस साल यह दूसरा ऐसा समझौता हुआ है। अबु धाबी नेशनल ऑइल कंपनी ने इससे पहले इस साल फरवरी में मंगलूरू स्थित तेल भंडारण सुविधा की आधी क्षमता के बराबर तेल रखने का समझौता किया था।
-एजेंसियां

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