भारत और यूरोपीय संघ की साझेदारी विश्व शांति एवं स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण: पीएम

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 वें भारत-यूरोपीय संघ (वर्चुअल) शिखर सम्मेलन में कहा कि हमें कोरोना वायरस के कारण मार्च में भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन रद्द करना पड़ा। यह अच्छा है कि हम आज वर्चुअल माध्यम से एक साथ आने में सक्षम हैं। वर्तमान चुनौतियों के अलावा जलवायु परिवर्तन जैसी दीर्घकालिक चुनौतियां भी भारत और यूरोपीय संघ के लिए प्राथमिकता हैं। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने के हमारे प्रयासों में हम यूरोप से निवेश और प्रौद्योगिकी आमंत्रित करते हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ प्राकृतिक साझेदार हैं। हमारी साझेदारी विश्व की शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यह वास्तविकता आज वैश्विक स्थिति में और भी स्पष्ट हो गई है।
ज्ञात रहे कि भारत के लिए ईयू सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर देश है। दोनों के बीच वर्ष 2019 में 80 अरब यूरो का कारोबार हुआ था। भारतीय कंपनियों ने अभी तक वहां 50 अरब यूरो का निवेश किया हुआ है। ईयू की तरफ से भारत के कई ट्रेड नियमों, खास तौर पर घरेलू उद्योगों को ज्यादा प्रश्रय देने के नियमों से परेशानी है। अब जबकि केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत पर जोर देना शुरू कर दिया है तो यह भी ईयू को नागवार गुजर सकता है।
लेकिन कई जानकार यह मानते हैं कि चीन जिस तरह से तेजी से ईयू के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की तरफ बढ़ रहा है तो भारत को पीछे नहीं छूटना चाहिए। भारत सरकार का मानना है कि ईयू में सत्ता संभाल चुके नए प्रशासन के साथ लंबी अवधि के रणनीतिक हितों पर चर्चा शुरू करने का यह सही समय है। ईयू के जर्मनी, फ्रांस जैसे देश पहले से ही भारत के बेहद मजबूत रणनीतिक साझीदार हैं।
-एजेंसियां

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