भारत ने कोरोना से होने वाली मौतों पर लगाम कसी: स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय

नई दिल्‍ली। भारत में कोविड-19 के मामलों की संख्‍या अब ज्‍यादा तेजी से बढ़ रही है। पिछले हफ्ते जहां औसतन 3800 मामले रोज आ रहे थे, इस हफ्ते यह आंकड़ा बढ़कर 5500+ हो गया है।
शनिवार सुबह केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटों में 6,654 नए मामले सामने आए हैं। इस दौरान 137 लोगों की मौत हुई है। भारत में कुल मामलों की संख्‍या सवा लाख से ज्‍यादा हो गई है। इसके मुकाबले मरने वालों की संख्‍या 3,720 है। भारत ने कोरोना से होने वाली मौतों पर लगाम कसी है। देश में कोविड-19 से मृत्‍यु-दर 3% के आसपास है। वह दुनिया में सबसे कम मार्टलिटी रेट वाले चार देशों में शामिल हैं।
बाकी देशों के मुकाबले भारत के हालात बेहतर
दुनिया के कई देश कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित हैं। केसेज के मुकाबले मौतों का अनुपात देखें तो भारत और जर्मनी लगभग एक पोजिशन पर हैं।
शुक्रवार तक के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रति 39.18 केसेज पर एक मौत हो रही है। जर्मनी में यह आंकड़ा 37.27 है। जर्मनी वह देश है जिसके कोविड-19 कंटेनमेंट मॉडल ने खूब तारीफें बटोरी। रूस इस मामले में सबसे बेहतर पोजिशन पर है जहां हर 115 केस पर एक मौत हो रही है।
इटली, स्‍पेन, यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में 10 केसेज से भी कम पर एक मौत हुई है।
भारत का मार्टलिटी रेट लगातार सुधर रहा
भारत में कोरोना वायरस के चलते अबतक 3,720 लोगों की मौत हुई है। एक लाख केसेज से ज्‍यादा वाले देशों के आंकड़े देखें तो भारत का मार्टलिटी रेट कहीं बेहतर है। भारत का कोविड-19 मार्टलिटी रेट 2.9% है जो रूस, तुर्की और पेरू से ही कम है। ब्राजील, अमेरिका का मार्टलिटी का रेट 5% से ज्‍यादा है। स्‍पेन का करीब 10 पर्सेंट, इटली 14.24%, यूके 14.36% और फ्रांस का मार्टलिटी रेट 15.52% है।
टेस्‍ट के मुकाबले डेथ रेट भी कम
भारत अब रोज करीब एक लाख टेस्‍ट्स कर रहा है। टेस्‍ट के मुकाबले मौतों का अनुपात देखें तो भी भारत का नंबर सिर्फ रूस के बाद आता है। भारत में हर 755 टेस्‍ट पर एक मौत हो रही है। ब्राजीज जैसे देश में हर 37 टेस्‍ट के बाद एक पेशेंट की मौत हो जा रही है। फ्रांस में यह आंकड़ा 49 टेस्‍ट, यूके में 86, इटली में 100 और अमेरिका में 140 है।
भारत में मौतों की संख्‍या कम क्‍यों?
भारत में मार्टलिटी रेट कम होने की कई वजहें हो सकती हैं। लॉकडाउन सबसे अहम है। शुक्रवार को सरकार ने जो डेटा जारी किया, उसके मुताबिक लॉकडाउन 1 और 2 की वजह से 14 लाख से 29 लाख केसेज और 54,000 मौतों को रोका जा सका। बॉस्‍टन कंसल्टिंग ग्रुप की एक स्‍टडी भी बताती है कि लॉकडाउन की वजह से सीधे-सीधे 1.2 लाख से 2.1 लाख जिंदगियां बचाई जा सकीं। भारत में युवा और ग्रामीण आबादी बहुतायत में है, इसके अलावा टीबी के लिए BCG टीकाकरण, वायरस के थोड़े हल्‍के स्‍ट्रेन का फैलना भी मौतों की कम संख्‍या के पीछे वजह हो सकते हैं।
-एजेंसियां

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