भारत ने की पाकिस्तान से Most favored nation का दर्जा वापस लेने की घोषणा

नई दिल्‍ली। भारत ने पाकिस्तान से Most favored nation का दर्जा वापस लेने की घोषणा की है। केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने इसकी जानकारी कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी पर हुई बैठक के बाद दी है।
जेटली के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ़ के काफिले पर हुए हमले के बाद के हालात पर चर्चा हुई। जेटली ने कहा कि चरमपंथी संगठन और उनके मददगारों को किसी क़ीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि पीएम के नेतृत्व में CCS की बैठक हुई और पुलवामा अटैक के आंकलन पर चर्चा हुई। सीसीएस ने शहीद जवानों के सम्मान में 2 मिनट का मौन रखा और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। जेटली ने बताया कि घटना की विस्तृत जानकारी पर चर्चा हुई है लेकिन सब कुछ शेयर नहीं किया जा सकता है। सीआरपीएफ शहीदों के पार्थिव शरीर को उनके परिजनों को सौंपने के लिए कदम उठा रही है।
पाकिस्तान को अलग-थलग करेंगे
जेटली ने कहा कि विदेश मंत्रालय हरसंभव कूटनीतिक कदम उठाएगा, जिससे पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में अलग-थलग किया जा सके। इसके लिए मौजूद साक्ष्यों को सामने रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि Most favored nation का पाकिस्तान को दिया गया दर्जा वापस ले लिया गया है। वाणिज्य मंत्रालय इसके संबंध में जल्द सूचना जारी करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 33 साल पहले भारत ने UN में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रस्ताव रखा था लेकिन यह पारित नहीं हुआ क्योंकि आतंकवाद की परिभाषा पर सबकी सहमति बाकी थी। विदेश मंत्रालय प्रयास करेगा कि आतंकवाद की परिभाषा को संयुक्त राष्ट्र में जल्द स्वीकार किया जाए।
सुरक्षाबल देंगे मुंहतोड़ जवाब
उन्होंने कहा कि जहां तक हमारे सुरक्षाबलों का सवाल है वे हरसंभव कदम उठाएंगे, जिससे घाटी में शांति और सुरक्षा बनी रहे। इसके साथ-साथ हमले में शामिल और समर्थन देने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़े, सुरक्षाबल इसके लिए भी कदम उठाएंगे।
कश्मीर जा रहे राजनाथ, कल सर्वदलीय बैठक
उन्होंने बताया कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह कश्मीर जा रहे हैं। वह कल सुबह सर्वदलीय सम्मेलन में घटना की जानकारी देंगे।
क्या है Most favored nation का दर्जा?
एमएफ़एन यानि Most favored nation दर्जा मिलने वाले देश को व्यापार संबंधी सुविधाएं मिल जातीं हैं. व्यापार संबंधी फ़ायदों का मतलब कम कीमतें और आयात को बढ़ावा देने वाले कदम होता है। विश्व व्यापार संगठन यानी डब्लूटीओ के सदस्य देश आपस में एक दूसरे को Most favored nation का दर्जा दे सकते हैं।
इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन करना होता है और आम धारणा ये है कि आर्थिक रूप से थोड़े कमज़ोर देशों की अर्थव्यवस्थाओं को इससे लाभ पहुँच सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार के मुक्त व्यापार क्षेत्र, आबकारी संघ और साझा बाज़ारों को Most favored nation प्रावधानों से छूट दी गई है।
सरल भाषा में कहें तो सर्वाधिक वरीयता प्राप्त देश का दर्जा ‘विशेष और बेहतर व्यवहार’ देना या प्राप्त करना
भारत-पाकिस्तान और एमएफ़एन
डब्ल्यूटीओ बनने के साल भर बाद भारत ने पाकिस्तान को 1996 में Most favored nation का दर्जा दिया था लेकिन पाकिस्तान की ओर से भारत को ऐसा कोई दर्जा नहीं दिया गया था।
एमएफएन का दर्जा मिल जाने पर दर्जा प्राप्त देश को इस बात का आश्वासन रहता है कि उसे कारोबार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
इसके तहत आयात-निर्यात में विशेष छूट मिलती है। यह दर्जा प्राप्त देश कारोबार सबसे कम आयात शुल्क पर होता है। डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश खुले व्यापार और बाज़ार से बंधे हैं मगर एमएफएन के क़ायदों के तहत देशों को विशेष छूट दी जाती है. सीमेंट, चीनी, ऑर्गेनिक केमिकल, रुई, सब्जियों और कुछ चुनिंदा फलों के अलावा मिनरल ऑयल, ड्राई फ्रूट्स, स्टील जैसी कमोडिटीज़ और वस्तुओं का कारोबार दोनों देशों के बीच होता है।
वर्ष 2015-16 में भारत के 641 अरब डॉलर के अंतर्राष्ट्रीय निर्यात में पाकिस्तान का हिस्सा महज़ 2.67 अरब डॉलर का था।
ऐसोचैम के मुताबिक़ पाकिस्तान के साथ होने वाला व्यापार भारत के कुल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 0.41% है जबकि Bharat में होने वाले आयात में से पाकिस्तान से होने वाला आयात सिर्फ़ 0.13 % है।
पाकिस्तान ने अभी तक भारत को एमएफ़एन का दर्ज नहीं दिया है
जानकारों के अनुसार डब्लूटीओ में ‘सुरक्षा सबंधी कारणों’ वाले प्रावधान के चलते कोई सदस्य देश किसी को दिए गए एमएफ़एन दर्जे में कुछ व्यापारों पर प्रतिबंध लगा सकता है।
-BBC

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