भारत-अफगानिस्‍तान मैच: कोहली को सताने लगा था हार का डर

क्रिकेट वर्ल्ड कप में शनिवार को भारत और अफगानिस्‍तान का मुक़ाबला था. रोमांच से भरपूर इस मुक़ाबले में भारत 11 रनों से जीत दर्ज करने और वर्ल्ड कप में अजेय रहने का सिलसिला बरकरार रखने में सफल रहा.
टीम इंडिया का तो पता नहीं, लेकिन प्रशंसकों में शायद ही किसी को इस बात का ज़रा भी अहसास रहा हो कि वनडे में नई नवेली अफगान टीम भारत को इतनी कड़ी चुनौती देगी कि करोड़ों क्रिकेट प्रशंसक भारत की जीत पर अगर-मगर करने लगेंगे.
आम तौर पर वर्ल्ड कप में भारत के मुक़ाबले के दिन सोशल मीडिया पर लोग ख़ासे सक्रिय हो जाते हैं लेकिन शनिवार को मैच से एक घंटे पहले तक इक्का-दुक्का लोग ही इस मुक़ाबले में दिलचस्पी दिखा रहे थे.
क्रिकेट प्रशंसकों को शायद ये लग रहा हो कि जिस टीम को उनका देश क्रिकेट का ककहरा पढ़ाने में योगदान दे रहा है, उससे पार पाने में क्या मुश्किल?
लेकिन यही खेल है और इसका न भूलने वाला सिद्धांत भी कि विपक्षी टीम को कम करके न आंका जाए… और वो भी ऐसी टीम को जो पिछले साल ही एशिया कप में भारत को हार की कगार तक धकेलने में कामयाब रही थी.
भारत का डर
ख़ैर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत सिर्फ़ 224 रन ही बना सका और कप्तान विराट कोहली ने इसके लिए ये दलील दी कि उनके कुछ खिलाड़ी योजना के हिसाब से बल्लेबाज़ी नहीं कर सके और आड़े बल्ले से शॉट खेले जबकि विकेट जिस तरह का था, उन्हें सीधे शॉट लगाने चाहिए थे.
टॉस जीतते हुए कोहली ने पहले बल्लेबाज़ी चुनने में जरा भी देर नहीं की थी और उनका इरादा था कि उनके बल्लेबाज़ 250 से अधिक का स्कोर खड़ा करें.
लेकिन अफगान भी अब इस खेल में इतने कच्चे नहीं रहे, कप्तान गुलबुद्दीन नायब ने ये देखते हुए कि विकेट धीमा है, ऑफ़ ब्रेक गेंदबाज़ मुजीब उर रहमान को गेंद थमा दी.
मैच के बाद कोहली ने कहा, “जैसे ही मैं बल्लेबाज़ी के लिए विकेट पर पहुँचा, मैं विकेट का मिजाज भांप चुका था. मैंने सोचा कि इस विकेट पर आड़े बल्ले से खेलना ठीक नहीं रहेगा. मैंने सीधे शॉट लगाए और इस वजह से मैं स्ट्राइक बार-बार बदलने में कामयाब रहा.”
उन्होंने माना कि टीम इंडिया के बल्लेबाज़ों ने जिस तरह से शॉट लगाए, उनका चयन बेहतर हो सकता था. अगर विकेट के मिजाज के मुताबिक नहीं खेले तो विपक्षी टीम को मात नहीं दे सकते.
कोहली ने माना कि मैच के दौरान एक वक्त वो भी आया था, जब उन्हें हार का डर सताने लगा था.
उन्होंने कहा, “बीच के ओवरों में उन्होंने (अफ़ग़ानिस्तान) हम पर दबाव बनाया. अफ़ग़ानिस्तान जैसी टीम जो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से भरी हुई है जब वो आपको वैसे न खेलने दे जो आपका गेम प्लान हो तो दबाव बन ही जाता है.”
उम्मीद
कोहली ने इस मैच में 67 रनों की पारी खेली. मौजूदा वर्ल्ड कप में ये उनकी तीसरी हाफ सेंचुरी है. कोहली के अलावा हर भारतीय बल्लेबाज़ अपनी लय हासिल करने के लिए जूझता दिखा.
रोहित शर्मा को मुजीब ने बोल्ड आउट किया और इस वर्ल्ड कप में स्पिन के ख़िलाफ़ आउट होने वाला ये भारत का पहला विकेट भी था. केएल राहुल ने रिवर्स स्वीप खेलने की कीमत अपना विकेट देकर चुकाई और विजय शंकर ने स्वीप शॉट के ज़रिये गेंद को खाली पड़े फ़ाइन लेग क्षेत्र की तरफ़ भेजने की प्रयास किया और एलबीडब्ल्यू आउट हुए.
बड़े शॉट खेलने के माहिर महेंद्र सिंह धोनी ‘माही’ अफ़ग़ान गेंदबाज़ों के चक्रव्यूह की काट ढूंढने की कोशिश ही करते दिखे और उनके खाते में डॉट बॉल का हिस्सा बढ़ता ही चला गया.
आखिरकार जब उन्होंने राशिद ख़ान के ख़िलाफ़ आगे बढ़कर लंबा शॉट जड़ने का इरादा बनाया तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी और स्टंप आउट हुए. केदार जाधव ने 52 रनों की पारी ज़रूर खेली, लेकिन इस पारी में आत्मविश्वास की कमी दिखी.
तो जब बल्लेबाज़ स्कोरबोर्ड पर केवल 50 ओवरों में आठ विकेट पर 224 रन ही टांग सके तो भारतीय खेमे में चिंता होना लाजमी था.
इनिंग ब्रेक के दौरान भारत ने क्या योजना बनाई? इस सवाल के जवाब में कोहली बोले, “सभी को खुद पर भरोसा था. हमारे पास जसप्रीत बुमराह, शमी और युजवेंद्र चहल थे, लेकिन पारी के मध्य तक दिमाग़ में कुछ खटका हुआ था कि मैच में क्या होने जा रहा है, लेकिन ड्रेसिंग रूम में हरेक को खुद पर यकीन था. प्रत्येक खिलाड़ी को भरोसा था कि हम जीत सकते हैं.”
विराट कोहली ने हैट्रिक लेने वाले मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी की तारीफ़ की.
कोहली ने कहा, “हम बुमराह और शमी का अच्छा उपयोग करना चाहते हैं. शमी ने आखिरी ओवर में जान लगा दी. चहल की गेंदबाजी का भी लाभ मिला. शमी ने तो आज बहुत अच्छा किया, शुरुआत में उन्होंने रन भी रोके. विजय ने अच्छी फील्डिंग की. मुझे पता है कि इन खिलाड़ियों को मौके चाहिए. हमारी टीम आखिरी गेंद तक मुकाबला करती है और यही इसकी ख़ासियत है.”
-BBC

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