रीपो रेट और रिवर्स रीपो रेट में बढ़ोत्तरी, ईएमआई बढ़ने की आशंका

नई दिल्ली। देश के केंद्रीय बैंक ने रीपो रेट में बढ़ोत्तरी का फैसला किया। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता वाली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी ने रीपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.5 कर दिया। साथ ही रिवर्स रीपो रेट को भी 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.25% कर दिया गया है। कमेटी ने वित्त वर्ष 2018-19 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। वहीं, जुलाई-सितंबर तिमाही में मंहगाई दर 4.6 प्रतिशत, जुलाई-दिसंबर छमाही में 4.8 प्रतिशत जबकि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
आरबीआई के इस कदम के बाद बैंक भी अपने लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिससे लोगों की ईएमआई बढ़ने की आशंका है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि साल 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% रहने का अनुमान है। पटेल ने कहा कि मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ने बढ़ती महंगाई को देखते हुए रीपो रेट में बढ़ोत्तरी करने का फैसला किया है।
चालू वित्त वर्ष के दूसरे द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में 2018-19 की पहली छमाही में खुदरा महंगाई दर 4.8-4.9 प्रतिशत जबकि दूसरी छमाही में 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। लेकिन, गर्मियों में सब्जियों के दाम बढ़ने की परिपाटी इस बार नहीं देखी गई और फलों के दाम भी घट गए जिससे पहली छमाही में वास्तविक महंगाई दर अनुमान से रहेगी।
कम रही महंगाई, लेकिन बढ़ने का अनुमान
दूसरी छमाही में महंगाई का स्तर कई कारकों पर निर्भर करेगा। मसलन, केंद्र सरकार द्वारा खरीफ की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) डेढ़ गुना किए जाने का खाद्य पदार्थों की महंगाई पर सीधा असर होगा। वहीं, मॉनसूनी का ओवरऑल परफॉर्मेंस भी मध्यावधि में फूड इन्फ्लेशन बढ़ाएगा। महंगाई बढ़ाने का तीसरा कारक कच्चा तेल हो सकता है जिसकी कीमत अभी तो थोड़ी नरम हुई है लेकिन आगे उच्च स्तर पर रहने का ही अनुमान है।
चौथे, केंद्र सरकार ने कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं पर लागू जीएसटी दरों में कटौती की है, जिसका महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है, बशर्ते घटी दरों का फायदा ग्राहकों तक पहुंचे। पांचवां, खाद्य एवं ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं पर महंगाई हाल के महीनों में बढ़ी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कंपनियों ने उत्पादन लागत में वृद्धि की रकम ग्राहकों से वसूली है। आखिर में, फाइनैंशल मार्केट में उथल-पुथल जारी रहने की आशंका है। इस आधार पर जारी वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मंहगाई दर 4.6 प्रतिशत, दूसरी छमाही (तीसरी और चौथी तिमाही) में 4.8 प्रतिशत जबकि वित्त वर्ष 2019-10 की पहली तिमाही में महंगाई दर 5 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गौरतलब है कि अक्टूबर 2013 के बाद पहली बार आरबीआई ने लगातार दो बार रीपो रेट में बढ़ोत्तरी की है।
-एजेंसी

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