संस्कृति विश्वविद्यालय में Agriculture farm कार्यालय का उद्घाटन

Agriculture farm से अब अधिक उत्पादन की चुनौतियों से निपट सकेंगे मथुरा जनपद के किसानः कुलाधिपति सचिन गुप्ता
मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में अब जनपद मथुरा और उसके आसपास के जिलों के छात्र-छात्राओं और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक की न केवल जानकारी मिलेगी बल्कि अधिक उत्पादन की चुनौतियों से निपटने के उपाय भी बताए जाएंगे। इसी उद्देश्य को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में कृषि फार्म कार्यालय का उद्घाटन कुलाधिपति सचिन गुप्ता, कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक और कृषि संकाय के डीन प्रो. अरविन्द राजपुरोहित, विशेष ड्यूटी अधिकारी मीनाक्षी शर्मा द्वारा किया गया।
Agriculture farm कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर कृषि संकाय के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कुलाधिपति श्री गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में मौसम का मिजाज बदल रहा है, फलस्वरूप फसल चक्र में भी बदलाव हुआ है। बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती पर दबाव है और किसानों के सामने अधिक उत्पादन की चुनौतियां भी हैं। भारत सरकार 2022 तक कृषि उत्पादन को दोगुना बढ़ाना चाहती है, ऐसे में कृषि शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देकर ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। संस्कृति विश्वविद्यालय इस दिशा में ठोस और जमीनी प्रयास करने को संकल्पित है।

इस कृषि फार्म कार्यालय के माध्यम से न केवल छात्र-छात्राओं को कृषि की नई तकनीकों और अनुसंधानों से परिचित कराया जाएगा बल्कि जनपद मथुरा और उसके आसपास के किसान भी इससे लाभान्वित होंगे।

कुलपति डा. देवेन्द्र पाठक ने कहा कि संस्कृति विश्वविद्यालय में कृषि विज्ञान के स्नातक स्तर के कोर्स में बदलाव कर इसे अब व्यावहारिक अनुभव के साथ व्यावसायिक और रोजगारोन्मुख भी बनाया जा रहा है। नये पाठ्यक्रम में पारम्परिक कृषि कोर्स, प्रौद्योगिकी कोर्स, प्रतिभा उन्नति कोर्स एवं कृषि व्यापारिक कोर्स का समावेश किया गया है। हमारा जोर कृषि शिक्षा के साथ इसके प्रायोगिक इस्तेमाल पर भी है। हम चाहते हैं कि जनपद मथुरा के किसान परम्परागत खेती के बजाय कृषि में आधुनिक तकनीक और प्रयोग का समावेश करें ताकि उत्पादन में इजाफा किया जा सके।

कृषि संकाय के डीन प्रो. अरविन्द राजपुरोहित का कहना है कि संस्कृति विश्वविद्यालय में बीएससी कृषि, बीटेक एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एवं एमएससी कृषि विज्ञान विषयों का संचालन किया जा रहा है। कृषि संकाय के छात्र-छात्राएं प्रायोगिक तौर पर विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कर सकें इसके लिए ही कृषि फार्म कार्यालय खोला गया है।

प्रो. राजपुरोहित ने कहा कि कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। कार्य के पीछे छिपी भावना ही हमें सफलता से रू-ब-रू कराती है। प्रो. राजपुरोहित ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शिष्य मणीभाई देसाई को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उरलीकंचन पुणे में एक छोटे से कमरे में भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउंडेशन (बायफ) की स्थापना की थी, जो आज विश्व भर में अपनी पहचान रखती है। इसी भावना को दृष्टिगत रखते हुए संस्कृति विश्वविद्यालय में Agriculture farm कार्यालय का उद्घाटन किया गया है।