सिविल एविएशन के हितार्थ Aircommand ने उठाये कदम

इलाहाबाद में स्थित मध्य Aircommand मुख्यालय भारत के मध्य भागों में भारतीय वायु सेना के एयरोड्रम को नियंत्रित करता है

आगरा। भारत सरकार की उड़ान संकल्पना की नयी सिविल एविएशन पॉलिसी रिजिनल कनेक्टविटी स्कीम, जो 2016 में लागू हुई थी, उसे मुख्य रुप से ‘उड़ान योजना’ (उड़े देश का आम नागरिक) को साकार करने में भारतीय वायु सेना ने अपना सक्रिय समर्थन प्रदान किया है। भारतीय वायु सेना ने इन उड़ानों को सुविधा हेतु कई पहल की हैं, जिसमें उड़ानों के लिए लैंडिंग व पार्किंग को प्रभार मुक्त करना, आर सी एस फ्लाइट के संचालन हेतु फास्ट ट्रैक क्लीयरेंस की सुविधा प्रदान करना, अधिकतम संख्या में उड़ानों की स्वीकृति प्रदान करना, और अधिक उड़ानों की आवाजाही हेतु संरचनात्मक निर्माण कार्यों को भी विस्तारित किया जाना रहा है तथा मिलिटरी एयर फील्ड को ज्वाइंट यूजर एयर फील्ड के रुप में इस्तेमाल करने की सुविधा प्रदान करना मुख्य हैं।

इलाहाबाद में स्थित मध्य Aircommand मुख्यालय भारत के मध्य भागों में भारतीय वायु सेना के एयरोड्रम को नियंत्रित करता है। मध्य वायु कमान मुख्यालय के आठ एयरोड्रम में से चार एयरोड्रम आगरा, इलाहाबाद, गोरखपुर तथा ग्वालियर ज्वाइंट यूजर एयरोड्रोम (जे यू ए) हैं। इस कमान के सक्रीय योगदान तथा वायु सेना मुख्यालय के यथोचित सहयोग से तीन और एयरोड्रम बरेली, बिहटा तथा दरभंगा को ज्वाइंट यूजर एयरोड्रम्स के रुप में विस्तारित करने हेतु रक्षा मंत्रालय से स्वीकृति मिल चुकी है। आर सी एस ऑपरेशन तथा सिविल फ्लाइट ऑपरेशन को विकसित करने हेतु मध्य Aircommand ने संरचनात्मक विकास के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आरम्भ कर दिया है। आर सी एस तथा सिविल फ्लाइट की संख्या में बढ़ोत्तरी हेतु अपनाये जाने वाले महत्वपूर्ण कार्य विशेष रुप से उल्लेखनीय है।

इलाहाबाद एयरफील्ड, जहाँ से एक दिन में पहले मात्र दो उड़ानें संचालित होती थीं, अब 28 आर सी एस उड़ानों को शामिल करके तीस सिविल उड़ानें भरी जाने लगी हैं। अधिक संख्या में सिविल एयरक्राफ्ट की आवाजाही को सुनिश्चित करने हेतु भारतीय वायु सेना ने एक नवीन एप्रोन का निर्माण किया है। इसके अलावा भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण द्वारा एक नये सिविल एयर टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है। रन-वे को नवीन सिविल टर्मिनल से जोड़ने के साथ ही भारतीय वायु सेना ने टैक्सी ट्रैक के निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध करायी है। इन्स्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आई एल एस) स्थापित कर दिया गया है और यह क्रियाशील है। एप्रोच लाइट के संस्थापन हेतु भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण द्वारा निर्माण कार्य प्रगति पर हैं, जिससे रात्रि के दौरान तथा कम दृश्यता की अवस्था में भी सिविल विमानों को सुरक्षित लैण्ड कराया जा सकेगा।

ज्वाइंट यूजर एयरफील्ड (जे यू ए) के नाम से संस्थापित नवीन एयरफील्ड बिहटा, पटना एयरपोर्ट से बिल्कुल करीब है। पटना एयरपोर्ट की ऑपरेशनल भीड़ को कम करने के उद्देश्य से विकल्प के तौर पर बिहटा को उपयुक्त समझा गया है। बिहटा में भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण द्वारा इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम तथा सिविल एयरक्राफ्ट के ऑपरेशन के लिए एप्रोच लाइट की सुविधा प्रदान करने हेतु भूमि के अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है। दरभंगा एयरबेस पर डिस्पर्सल, अस्थाई एयर टर्मिनल तथा टर्मिनल से डिस्पर्सल तक एप्रोच रोड के निर्माण हेतु भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्ताव को भी भारतीय वायु सेना ने स्वीकार कर लिया है।

आगरा तथा ग्वालियर, ज्वाइंट यूजर एयरोड्रोम के रुप में सिविल फ्लाइट के ऑपरेशन हेतु हर प्रकार की सुविधाओं से सम्पन्न हैं। इन एयरोड्रमों से जहाँ पहले एक दिन में केवल चार सिविल उड़ानों के संचालन की सुविधा उपलब्ध थी, वहाँ अब एक दिन में छह सिविल उड़ानों के नियमित संचालन (02 आर सी एस फ्लाइट को शामिल करके) तथा एक दिन में आठ सिविल फ्लाइट के संचालन (04 आर सी एस फ्लाइट को शामिल करके) की सुविधा क्रमशः उपलब्ध हो चुकी है। विगत एक वर्ष के दौरान गोरखपुर एयरफोर्स बेस से आर सी एस तथा सिविल फ्लाइट के ऑपरेशन की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। जहाँ पहले एक दिन में छह उड़ानें संचालित होती थी, वहाँ अब एक दिन में चौदह सिविल/आर सी एस उड़ानों का नियमित संचालन होने लगा है। अतिरिक्त पार्किंग बेस के निर्माण हेतु भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण द्वारा प्रस्तुत किया गया प्रस्ताव विचाराधीन है।

भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण की तरफ से आर सी एस फ्लाइट की डायरेक्ट रूटिंग हेतु विविध रूट का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। ये प्रस्ताव प्राथमिक रुप से फ्लाइट की टाइमिंग एवं इंधन की खपत को कम करने से संबंधित है, जो बाद में आम यात्रियों के यात्रा किराया के मूल्यों में कटौती में सहायक होगा। भारतीय वायु सेना ने अधिकांश प्रस्ताव स्वीकार कर लिये हैं। इसके साथ ही केन्द्र ने राज्य सरकार के साथ मिलकर आठ अप्रयुक्त/ कम प्रयुक्त सिविल एयरपोर्ट को क्रियाशील बना दिया है। चार एयरफील्ड हेतु कन्ट्रोल जोन स्थापित करने के बारे में भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण की तरफ से प्राप्त प्रस्ताव पर भारतीय वायु सेना ने अपनी संस्तुति प्रदान कर दी है और अन्य चार विचाराधीन हैं जिनपर शीघ्र ही निर्णय ले लिया जायेगा।

भारतीय वायु सेना तथा मध्य वायु कमान द्वारा आर सी एस तथा सिविल फ्लाइट ऑपरेशन के समर्थन में अपनायी जाने वाली सकारात्मक तथा त्वरित कार्य प्रणाली से न केवल सुरक्षित व स्वतंत्र उड़ान का संचालन सुनिश्चित होगा अपितु, अभी तक वायु यातायात से अछूते देश के स्थानों से भी भारत के आम आदमी को वायु यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु भारत सरकार की संकल्पना को प्रभावशाली ढंग से साकार करने की दिशा में भी सहायक सिद्ध होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »