इमरान खान बोले, तालिबान ने गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं

अफगानिस्तान में तालिबानी राज 20 साल बाद वापस आता दिख रहा है। पूरी दुनिया में अमेरिका के सैनिक वापसी के फैसले और तालिबान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को तालिबान काबुल में घुस और राष्ट्रपति महल पर कब्जा कर लिया। कई देश इसकी निंदा कर रहे हैं अफगानिस्तान का पड़ोसी देश पाकिस्तान तालिबान के गुणगान कर रहा है। आतंकवादी संगठन की तारीफ में कसीदे और कई नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ‘तालिबान खान’ इमरान पढ़ रहे हैं।
तालिबान ने तोड़ दीं गुलामी की जंजीरें
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में इमरान खान कहते नजर आ रहे हैं, ‘दिमागी गुलामी की जंजीरों को तोड़ना सबसे ज्यादा मुश्किल होता है। अफगानिस्तान में अब उन्होंने (तालिबान) ने गुलामी की जंजीरें तोड़ दी हैं।’ पाकिस्तान पर पहले भी तालिबान का समर्थन करने के आरोप लगते रहे हैं। अफगानिस्तान में काम करने वाले कई पत्रकारों ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि तालिबान का समर्थन करने के चलते अफगानिस्तान में पाकिस्तान के लिए नफरत को साफतौर पर देखा जा सकता है।
काबुल स्थित दूतावास बंद नहीं करेगा पाकिस्तान
पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता देने का मन बना रहा है। इमरान का मुल्क पहले ही साफ कर चुका है कि वह काबुल में अपने दूतावास को बंद नहीं करेगा। तालिबान ने दूतावासों और राजनयिकों की सुरक्षा की गारंटी दी है जिस पर पाकिस्तान को भरोसा है। यह पहली बार नहीं है जब मुश्किल वक्त में पाकिस्तान ने अपने पड़ोसी मुल्क को धोखा दिया है। इससे पहले 1996 मे भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से तालिबान सत्ता में आया था।
पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने की मांग
काबुल पर कब्जा करने के बाद रविवार को अमेरिका सहित कई देशों में मौजूद अफगानों ने प्रदर्शन किया। इसमें प्रमुख रूप से अमेरिका में व्‍हाइट हाउस के सामने किया गया विरोध प्रदर्शन शामिल है। यहां प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के खिलाफ नारे लगाए और उन्हें ‘धोखेबाज’ बताया। प्रदर्शनकारियों ने अफगानिस्तान के आंतरिक मामले में दखल देने के लिए पाकिस्तान की निंदा की और इमरान के देश पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग उठाई।
-एजेंसियां

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