भारत की राह पर पाकिस्‍तान: कड़े विरोध के बीच चुनाव सुधार विधेयक पारित करने में कामयाब रही इमरान सरकार, अब EVM से होगा मतदान

जिस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन EVM को लेकर भारत में विपक्षी पार्टियां तमाम तरह के सवाल उठाती हैं अब पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार उसी EVM को अपने यहाँ के चुनावों में अपनाने जा रही है.
विपक्ष के कड़े विरोध के बीच पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार बुधवार को संसद के संयुक्त सत्र में चुनाव सुधार विधेयक (संशोधन) 2021 पारित करने में कामयाब रही.
इस क़ानून के तहत पाकिस्तान के आगामी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा और विदेश में रहने वाले पाकिस्तानियों को इंटरनेट के ज़रिए मतदान का अधिकार मिलेगा.
इन नए विधेयक के पास होने के बाद विपक्षी पार्टी के नेताओं ने सदन में ख़ूब हंगामा और वॉकआउट किया. इसके बाद सभी विपक्षी दलों के नेता भविष्य की कार्रवाई पर विचार करने के लिए नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ के कमरे में एकत्रित हुए.
संसद भवन के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि ये दिन “संसद के इतिहास में सबसे काले दिन” के रूप में याद किया जाएगा.
जमात-ए-इस्लामी के आमिर सिराजुल हक़ ने कहा कि नए क़ानून “अगले चुनाव में चोरी करने” के लिए पारित किए गए.
उन्होंने कहा कि यह “संसद के इतिहास का एक दुखद दिन” है.
संयुक्त सत्र 11 नवंबर को बुलाया जाना था लेकिन इमरान सरकार ने विपक्ष की नाराज़गी को देखते हुए और अपने सहयोगियों की आपत्ति के कारण इसे रद्द कर दिया था.
हालांकि, सभी सहयोगियों को साथ लाने के बाद, राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने बुधवार दोपहर को सत्र की बैठक बुलाई.
पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष, बिलावल भुट्टो-ज़रदारी ने भी अपने पिता आसिफ़ अली ज़रदारी के साथ सत्र में भाग लिया.
संसद में विधेयक के पारित होने के बाद योजना मंत्री असद उमर ने विपक्ष पर तंज़ कसते हुए ट्वीट किया कि हफ़्तों तक इस संयुक्त बैठक के ज़रिए सरकार गिराने का ख़ूब शोर किया गया लेकिन वे शायद भूल गए कि ‘इज़्ज़त और अपमान अल्लाह के हाथ में होता है’.
विपक्ष ने विधेयक को पास कराने के लिए की गई वोटिंग में धोखाधड़ी का आरोप लगाया है. विपक्ष ने तर्क दिया कि नेशनल असेंबली, 2007 के नियमों के अनुसार, सरकार को संयुक्त सत्र में विधेयक पारित कराने के लिए नेशनल असेंबली और सीनेट की कुल सदस्यता के बहुमत की आवश्यकता होती है, जो संख्या 222 है.
हालांकि, सरकार का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 72 के अनुसार, किसी विधेयक को पारित कराने के लिए संयुक्त बैठक के दौरान उपस्थित सदस्यों के आम बहुमत की आवश्यकता होती है.
नेशनल असेंबली के स्पीकर असद क़ैसर ने फैसला सुनाया कि ये वोटिंग संविधान संगत है.
स्पीकर और सरकार ने मिलकर संसद के नियमों की धज्जियां उड़ाईं: विपक्ष
सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि नियमों की उपेक्षा कर ये विधेयक पारित कराया गया.
शरीफ़ ने कहा, ”स्पीकर साहब ने मुझसे कहा था कि मैं अपनी पार्टी (पीटीआई) लाइन से अलग अपने विचार रखूंगा और निष्पक्ष रहूंगा लेकिन उन्होंने इसके ठीक उलट काम किया. हमने उनसे कहा कि आप ग़लत कर रहे हैं लेकिन वो नहीं माने.”
”बतौर नेता प्रतिपक्ष ये मेरा अधिकार है कि मैं प्वाइंट ऑफ़ एक्शन पर बात करूं लेकिन मेरी तमाम गुजारिशों के बाद भी उन्होंने मेरे माइक की आवाज़ बंद कर दी.
”पीटीआई और स्पीकर के गठजोड़ ने सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाईं.”
उन्होंने कहा, ”उनके वोट की गिनती ग़लत है, हमने स्पीकर से कहा कि वोट काउंट ग़लत है. उनके पास इतने सदस्य मौजूद ही नहीं हैं, लेकिन उन्होंने नहीं सुना और 221 वोटों पर अड़े रहे.”
”संयुक्त सत्र के नियम 10 के मुताबिक़ बहुमत के लिए कम से कम 222 वोट होने चाहिए वो सरकार के पास नहीं थे, हमारे नियमों का हवाला देने के बाद भी स्पीकर मनमानी करते रहे.”
”आज पाकिस्तान के लिए काला दिन है. उस ईवीएम को देश में लाया जा रहा है, जिसे चुनाव आयोग ख़ारिज कर चुका है. दुनिया के कितने देशों ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है, केवल आठ देश हैं जो इसे इस्तेमाल करते हैं. हम तो पहले ही आरटीएस (रिज़ल्ट ट्रांसमिशन सिस्टम) से परेशान हैं. इसने देश में एक जाली हूक़ूमत को सत्ता में बैठा दिया है. महंगाई से पाकिस्तान के 22 करोड़ लोगों की कमर टूट चुकी है, अब ये सरकार ईवीएम को हमारे ऊपर थोपना चाह रही है. स्पीकर ने क़ानून-क़ायदों को पांव तले रौंद कर बिल पास करवाया.”
”निराश होकर हमने वॉकआउट किया और मीडिया के पास आए हैं ताकि लोगों को बता सकें कि आवाम की किस्मत के साथ कैसे खिलवाड़ किया गया है.”
ईवीएम का मतलब है ‘ईविल एंड विशियस मशीन’
वोटिंग से पहले सदन में नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार ने ये सत्र बुलाने में देरी की क्योंकि उसके पास महत्वपूर्ण विधेयकों पर वोट हासिल करने के लिए बहुमत नहीं था.
शहबाज़ ने कहा, “अगर आज संशोधन के ज़रिए इन क़ानूनों को बर्बाद कर दिया गया तो देश और इतिहास नेशनल असेंबली के अध्यक्ष को माफ़ नहीं करेगा.”
इसके जवाब में स्पीकर असद क़ैसर ने कहा कि वह सत्र के दौरान नियमों का उल्लंघन नहीं होने देंगे.
उन्होंने सदन को सर्वसम्मति का महत्व याद दिलाते हुए कहा कि ”राष्ट्रीय कार्य योजना सहित सभी महत्वपूर्ण क़ानूनों को सभी की सहमति के माध्यम से हासिल किया गया था.”
शहबाज़ शरीफ़ ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को ‘ईविल एंड विशियस’ यानी ‘बुरी और शातिर मशीन’ बताया और कहा कि सरकार ने चुनावी संशोधनों पर आम सहमति बनाने के लिए ईमानदार कोशिश नहीं की.
शहबाज़ ने कहा कि सरकार और उसके सहयोगी महत्वपूर्ण विधेयकों को बर्बाद करना चाहते हैं. ये “ग़ैर-क़ानूनी” और संसद की परंपराओं के विपरीत है.
शहबाज़ शरीफ़ ने नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद क़ैसर को एक पत्र लिखकर बिलों को सर्वसम्मति के बिना पारित करने में जल्दबाज़ी को लेकर अपनी आपत्ति ज़ाहिर की थी.
उन्होंने कहा कि ”शुरू में इस संयुक्त सत्र में देरी हुई क्योंकि सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ चर्चा करेगी.”
”अध्यक्ष महोदय आपने मुझे और पूरे संयुक्त विपक्ष को एक पत्र भेजा, जवाब में मैंने सुझाव और अपना व्यापक जवाब भेजा लेकिन हमें आपसे कोई जवाब नहीं मिला.”
सरकार की विपक्ष के साथ चर्चा के प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, ”ये अधिक समय पाने की सरकार की ‘चाल’ थी ताकि सरकार ज़रूरी वोट जुटा सके. इस मुद्दे पर चर्चा करने का सरकार का कोई इरादा नहीं था.”
उन्होंने कहा कि ”चुनाव के दौरान हमेशा धांधली के आरोप लगते रहते हैं. यह इतिहास में पहली बार है जब चुनाव से पहले धांधली के आरोप लगे हैं.”
उन्होंने दावा किया कि “चुनी गई सरकार” ईवीएम लाना चाहती है क्योंकि वह अब लोगों से वोट मांगने की स्थिति में नहीं है.
शहबाज़ ने स्पीकर से संयुक्त सत्र स्थगित करने को कहा ताकि चुनावी संशोधन के मामले पर “व्यापक चर्चा” हो सके.
उन्होंने कहा, ”पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) जो देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए ज़िम्मेदार है, उसने भी अतीत में ईवीएम को लेकर आपत्ति जताई थी. इसके बावजूद सरकार इन क़ानूनों को पारित करना चाहती है.”
”जिस पार्टी ने कभी लोकतंत्र, पारदर्शिता और बदलाव की बात की थी, वह अब ‘काला क़ानून’ पारित करना चाहती है.”
शाहबाज़ ने स्पीकर क़ैसर को संबोधित करते हुए कहा, ”यदि आप इस काले क़ानून को पारित होने देंगे, तो इससे पाकिस्तान को भारी नुक़सान होगा जिसके ज़िम्मेदार आप और सत्ता दल दोनों होंगे. ”
शहबाज़ ने यह भी कहा कि कई देश ईवीएम को पूरी तरह ख़ारिज कर चुके हैं.
सरकार को आर्थिक मोर्चों पर फेल बताते हुए उन्होंने कहा, ”सरकार इस मुद्दे पर जितनी ऊर्जा लगा रही है उतनी ही ऊर्जा मुद्रास्फीति से निपटने में लगाती तो हमें अंतर दिखता. लेकिन उन्हें उसकी चिंता नहीं हैं. उन्हें केवल लोगों के वोट हासिल किए बिना सत्ता में बने रहने की चिंता है.”
ये काला क़ानून नहीं, कालेपन को मिटाने वाला क़ानून है
विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने सदन में अपने भाषण की शुरुआत इसे “ऐतिहासिक दिन” बताते हुए की. उन्होंने कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया “और भी पारदर्शी” बनेगी.
अपने विपक्षी शहबाज़ शरीफ़ पर निशाना साधते हुए उन्होने कहा, ”शहबाज़ ने कहा कि सरकार काला क़ानून लाना चाहती है. बिल्कुल नहीं, सरकार अतीत के कालेपन को धोना चाहती है.”
मंत्री ने कहा कि सरकार क़ानून को बर्बाद नहीं करना चाहती है, हमने विपक्षी सदस्यों से परामर्श किया था ताकि उनकी सुझावों को बिल में शामिल किया जा सके लेकिन “आपने तो ध्यान ही नहीं दिया.”
क़ुरैशी ने उस आरोप को भी ख़ारिज कर दिया कि सरकार ने संख्या के अभाव में पहले सत्र रद्द किया था. उन्होंने कहा, “अगर हमारे पास नंबर नहीं होते तो हम आज ये बिल कैसे पेश कर पाते? सरकार में एकजुटता है और हमारे सहयोगी हमारे साथ खड़े हैं.”
सदन में किसके पास कितने नंबर
दोनों सदनों में सत्तारूढ़ दल और उसके सहयोगियों के पास कुल 221 वोट हैं, जिनमें 179 वोट नेशनल असेंबली और 42 वोट सीनेटर से हैं.
दूसरी ओर विपक्ष के पास कुल 219 वोट हैं, जिनमें 162 वोट नेशनल असेंबली और 57 वोट सीनेटर के हैं.
नेशनल असेंबली में कुल 341 सीट हैं, जिनमें से एक सीट ख़ाली है और सीनेट के 99 सदस्यों में से एक सीट निलंबित है. इस तरह कुल मिलाकर 440 वोट दोनों सदनों के पास है.
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ पीटीआई के पास 156 असेंबली सदस्य और 27 सीनेटर हैं, जो कुल मिलाकर 183 हैं. इसकी सहयोगी पार्टी एमक्यूएम-पी के पास सात असेंबली सदस्य और तीन सीनेटरों के साथ कुल 10 वोट हैं. बीएपी के पास पाँच असेंबली सदस्य और नौ सीनेटरों के साथ कुल 14 वोट हैं.
पीटीआई की ही सहयोगी पीएमएल-क्यू के पास पाँच असेंबली सदस्य और एक सीनेटर के साथ छह वोट है. जीडीए के पास तीन असेंबली सदस्य और एक सीनेटर के कुल चार वोट हैं और एक-एक सदस्य जेडब्ल्यूपी, एएमएलपी के पास हैं. इसके अलावा एक निर्दलीय सदस्य का वोट भी पीटीआई के समर्थन में है. इस तरह दोनों सदनों में कुल 221 वोट इमरान ख़ान सरकार के पास रहे.
वहीं विपक्ष की बात करें तो पीएमएल-एन के पास 83 वोट असेंबली सदस्यों के हैं और 16 सीनेटरों के वोट हैं, जिनकी संख्या कुल मिलाकर 99 हैं. पीपीपी के पास 56 असेंबली सदस्य और 21 सीनेटर हैं और इस तरह कुल 77 वोट हैं.
एमएमएपी (जेयूआई-एफ़) के पास 15 असेंबली सदस्य और पाँच सीनेटर हैं जो कुल 20 हुए. बीएनपी-एम के पास चार असेंबली सदस्यों और दो सीनेटरों के साथ छह वोट हैं. एएनपी में एक असेंबली सदस्य और दो सीनेटर हैं.
जमात-ए-इस्लामी में एक सीनेटर है. पीकेएमएपी और एनपी में दो-दो सीनेटर हैं और तीन असेंबली सदस्य हैं. इसके अलावा दिलावर खान के छह सीनेटरों के साथ दोनों सदनों के मिलाकर कुल विपक्षी वोटों की संख्या 219 रही.
-एजेंसियां

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