नए साल से कंपनियों के लिए GST के नियमों में होने जा रहा है अहम बदलाव

नई दिल्‍ली। नए साल यानी एक जनवरी से कंपनियों के लिए एक अहम नियम में बदलाव होने जा रहा है। संक्षिप्त रिटर्न और मासिक माल एवं सेवा कर (GST) के भुगतान में देरी करने वाली कंपनियों को आगे के महीनों के लिए जीएसटीआर-1 बिक्री रिटर्न फॉर्म दाखिल करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

ये होगा फायदा
शुक्रवार को लखनऊ में हुई जीएसटी परिषद की 45वीं बैठक में अनुपालन को सुसंगत बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए। इन फैसलों में कंपनियों द्वारा रिफंड का दावा करने के लिए आधार सत्यापन को अनिवार्य किया जाना भी शामिल है। इन कदमों का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि इससे माल और सेवा कर (जीएसटी) की चोरी के कारण राजस्व रिसाव को रोकने में मदद मिलेगी।
ये है मौजूदा नियम
परिषद ने अगले साल से केंद्रीय जीएसटी नियम के नियम 59 (6) में संशोधन करने का फैसला किया है। नए नियम के अनुसार अगर कोई पंजीकृत व्यक्ति पिछले महीने के जीएसटीआर-3बी फॉर्म में रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो उसे जीएसटीआर-1 जमा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मौजूदा समय में यदि पंजीकृत व्यक्ति पिछले दो महीने के जीएसटीआर-3बी फॉर्म में रिटर्न दाखिल नहीं करता, तब उसे जीएसटीआर-1 जमा करने की अनुमति नहीं होती है।
क्या है जीएसटीआर-1 फॉर्म?
कारोबारी हर महीने का जीएसटीआर-1 फॉर्म अगले महीने में 11 दिनों के भीतर दाखिल करता है। इसमें कारोबारी द्वारा की गई उत्पाद या सेवाओं की आपूर्ति का लेखा जोखा होता है।

क्या है जीएसटीआर-3 फॉर्म?
इसी तरह, हर महीने का जीएसटीआर-3बी फॉर्म उसके अगले महीने की 20-24 तारीख के बीच भरा जाता है। इसी फॉर्म में दी गई जानकारियों के तहत कारोबारी पर वास्तविक टैक्स या जीएसटी की गणना होती है।
आधार सत्यापन भी जरूरी
परिषद ने जीएसटी पंजीकरण के आधार सत्यापन को भी अनिवार्य किया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 21 अगस्त 2020 से जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार प्रमाणीकरण को अधिसूचित किया था। अधिसूचना में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कारोबारी आधार संख्या प्रदान नहीं करते हैं तो व्यवसाय के स्थान के भौतिक सत्यापन के बाद ही जीएसटी पंजीकरण दिया जाएगा।
आयकर अधिनियम के तहत फैसला

शुक्रवार को वित्त मंत्रालय ने अनुसूचित बैंक द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) के निवासी को किए गए ब्याज भुगतान के स्रोत पर कर कटौती (TDS) से संबंधित आयकर अधिनियम 1961 के नियमों में संशोधन किया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि अधिनियम की धारा 194ए के तहत निम्नलिखित भुगतान पर कर की कटौती नहीं की जाएगी- किसी निर्दिष्ट क्षेत्र में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के सदस्य को एक निर्दिष्ट क्षेत्र में स्थित अनुसूचित बैंक द्वारा किए गए प्रतिभूतियों पर ब्याज के अलावा ब्याज की प्रकृति में भुगतान अधिनियम की धारा 10 में संदर्भित है।
-एजेंसियां

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