लापरवाही पर आईजी लखनऊ ने किए तीन सिपाहियों समेत चार निलंबित, 7 का वेतन रुका

IG Lucknow A satish ganesh
लापरवाही पर आईजी लखनऊ ने किए तीन सिपाहियों समेत चार निलंबित, 7 का वेतन रुका

लखनऊ। आईजी लखनऊ ए सतीश गणेश ने आज डालीगंज स्थित पुलिस ऑफिस का औचक निरीक्षण किया। आईजी के निरीक्षण से महकमे में हडक़ंप मच गया। आईजी ने काम में लापरवाही बरतने पर एक बाबू और तीन सिपाहियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
आईजी ए सतीश गणेश अचानक आज पुलिस ऑफिस पहुंचे। उन्होंने पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही हमेशा सतर्क रहने की हिदायत दी। इस दौरान काम में लापरवाही करते मिले एक बाबू और तीन सिपाहियों को फटकार लगाई।
आईजी तीन सिपाहियों समेत चार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

प्रदेश की सुरक्षा व्‍यवस्‍था के लिए उठाया गया ये कदम

यूपी में आदित्यनाथ योगी की नई सरकार महिलाओं की सुरक्षा के दृष्टिïगत एंटी रोमियो अभियान चला रही है। महिला अपराधों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस विभाग के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। थानों में शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादियों से अच्छा व्यहार करने और उनकी समस्याएं सुनकर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया गया है।

जनता को मोबाइल फोन और ऑनलाइन माध्यमों से शिकायत करने की सुविधा भी दी गई है, लेकिन जिस तरीके से ऊंचाहार से ट्रेन में बैठकर लखनऊ आ रही गैंगरेप पीडि़ता को एसिड पिलाकर मारने की कोशिश की गई, वह योगी सरकार को प्रदेश की वस्तु स्थिति से अवगत कराने के लिए काफी है। वहीं केंद्र सरकार की तरफ से ट्रेनों में यात्रियों को बेहतर सुरक्षा नहीं उपलब्ध हो  पा  रही है।

पुलिस  की  लापरवाही पर  एक्‍शन जरूरी

लखनऊ में जिस लडक़ी के साथ एसिड अटैक की घटना हुई, उसके साथ 2008 में गैंगरेप किया गया था। तीन आरोपी पकड़े भी गये थे। तब से पीडि़ता न्याय की आस में दर-दर भटक रही है। वह पुलिस विभाग के अधिकारियों के कार्यालय से लेकर कोर्ट तक के चक्कर काट रही है। पीडि़ता गैंगरेप के मामले की सुनवाई में गवाही के लिए ऊंचाहार से लखनऊ आ रही थी। उस पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। जान से मारने की धमकियां भी मिल रही थीं। लेकिन पुलिस ने सुरक्षा देने की जहमत नहीं उठाई। इसी बीच बदमाशों ने चलती ट्रेन में लडक़ी को एसिड पिलाकर मारने का प्रयास किया। बदमाशों को ट्रेन में बैठे अन्य लोगों का बिल्कुल भी खौफ नहीं था, क्योंकि उन्हें अच्छी तरह पता था कि समाज में अधिकांश लोग खुद पर मुसीबत आने के बाद ही एक्टिव होते हैं। यदि ऐसा नहीं होता, तो पीडि़ता को एसिड पिलाने वाले पकड़े जाते।
समाज में जब तक अपराधियों को कड़ी सजा देने और कोर्ट में मुकदमे निपटाने की समय सीमा तय नहीं होगी। ऐसी अनेकों लड़कियां न्याय के लिए भटकती रहेंगी इसलिए समाज को बेहतर बनाने के लिए नागरिकों को अपने अंदर बदलाव लाना होगा।

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