रेप्यूटेड जॉब के साथ अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं तो…

अगर आप रेप्यूटेड जॉब के साथ अच्छी सैलरी पाना चाहते हैं और मैथ्स से दोस्ती है तो इकनॉमिक्स में करियर बनाने के बारे में सोच सकते हैं।
इकनॉमिक्स एक ऐसा सब्जेक्ट जो आर्ट्स का होते हुए भी साइंस के किसी भी सब्जेक्ट को टक्कर देता है। यह एक ऐसा सब्जेक्ट है जिससे ग्रेजुएशन करने पर जॉब मार्केट अमूमन सीधे कुर्सी ऑफर करती है। यह एक ऐसा सब्जेक्ट है जिसके लिए डीयू में कटऑफ 95 फीसदी से भी ज्यादा पहुंचता है।
क्या है इकनॉमिक्स
इकनॉमिक्स एक बड़ा सब्जेक्ट है लेकिन इसे मोटे तौर पर विभिन्न बाजारों के अध्ययन के रूप में समझा जा सकता है। इस विषय में अर्थव्यवस्था शामिल होती है और कैसे बाजारों में खरीददार और विक्रेता अपने संसाधनों का उपयोग करके आगे बढ़ते हैं। पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था कैसे चलती है? लोगों के पॉकेट और मार्केट का क्या रिलेशन है? जीडीपी, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसे विषयों पर सरकारी नीति कैसे काम करती है?
किसे नहीं पढ़नी चाहिए?
इसके लिए 4 बातों का ध्यान रखना जरूरी है
•अगर कोई शख्स मैथ्स को देखकर परेशान होता है तो उसे सीनियर लेवल पर इकनॉमिक्स पढ़ने से पहले एक बार जरूर सोचना चाहिए। यह जरूरी नहीं कि ग्रेजुएशन में इकनॉमिक्स रखने के लिए उसे 12वीं स्तर का पूरा मैथ्स आता हो लेकिन मैथ्स के सवालों को देखकर सिर दुखता नहीं हो, यह जरूर होना चाहिए।
•राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आर्थिक मुद्दों में दिलचस्पी हो।
•उसकी सोच और उसका व्यवहार समस्याओं के निदान यानी प्रॉब्लम-सॉल्विंग पर ज्यादा हो क्योंकि कंपनी या सरकार में उसे नई-नई समस्या से दो-चार होना पड़ेगा।
•आंकड़ों (डेटा) से खेलने में मजा आता हो।
इंडस्ट्री और डिग्री में गैप?
वैसे तो कोर्स में इंडस्ट्री की कई तरह के जरूरतों की पूर्ति हो जाती है, लेकिन सिलेबस में वक्त के हिसाब से बदलाव नहीं हो पाते। डेटा और ई-व्यूज (स्टैटिस्टिकल फोरकास्टिंग: स्टैट के आधार पर भविष्य की गणना करना) ऐसे पॉइंट हैं, जिन पर हमें काम करने की जरूरत है। सच तो यह है कि जैसे ही डेटा और ई-व्यूज जैसी चीजें किसी इकनॉमिक्स ग्रेजुएट के सामने आती हैं, अमूमन वह समस्या से जूझने लगता है।
यहां इस बात को भी ध्यान में रखना जरूरी है कि हर किसी को डेटा साइंटिस्ट, रिसर्चर या पॉलिसीमेकर नहीं बनना है इसलिए इससे संबंधित स्किल भी उन्हीं को डिवेलप करनी चाहिए, जिन्हें ऐसे क्षेत्रों में जाना है।
जिन लोगों को विश्लेषक नहीं बनना बल्कि कॉरपोरेट जॉब करना है, उनके लिए इंटरपर्सनल ट्रेनिंग ज्यादा फायदेमंद है। इसे ग्रुप स्टडी, ग्रुप डिस्कशन आदि की तैयारी से हासिल किया जा सकता है।
ऑन्ट्रप्रनरशिप में कामयाबी के मौके?
वैसे स्टार्टअप तो कोई भी शुरू कर सकता है लेकिन एक इकनॉमिस्ट इसे अच्छी तरह संभाल सकता है। दरअसल, वह किसी भी संसाधन का बेहतर और पूर्ण उपयोग जानता है क्योंकि ये बातें इकनॉमिक्स में पढ़ाई भी जाती हैं। वह मार्केट शेयर, इनवेस्टर वैल्यू आदि को अच्छी तरह समझता है।
इंग्लिश की भूमिका कितनी?
सच तो यह है कि इकनॉमिक्स में करियर बनाने के लिए बहुत शानदार इंग्लिश की जरूरत नहीं है। इसमें भी उतनी ही इंग्लिश चाहिए, जितनी फिजिक्स को समझने के लिए। अगर इस फील्ड में विशेषज्ञ बनना है और राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करना है तो शानदार अंग्रेजी की जरूरत है।
ये हैं इकनॉमिक्स के आधार
इसकी अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि इस विषय के लिए अलग-से ‘नॉबेल पुरस्कार’ दिया जाता है। देश और विदेश में ऐसे अनेकों नाम हैं, जिन्होंने अर्थनीति को बार-बार परिभाषित किया है। भारत में अमर्त्य सेन LSE (लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स) में पढ़ाया है तो उर्जित पटेल और कौशिक बसु, एलएसई में पढ़ाई की है। रघुराम राजन, जगदीश भगवती, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कई ऐसे ही नाम हैं, जिन्होंने इकनॉमिक्स के क्षेत्र में खासा नाम कमाया है।
पोस्ट-ग्रेजुएशन है जरूरी?
अगर इकनॉमिक्स की पढ़ाई किसी अच्छे कॉलेज से हुई है तो जॉब मिल जाती है, लेकिन अच्छी जॉब और पैकेज के लिए पीजी करना भी जरूरी है। दरअसल, अंडर-ग्रेजएट कोर्स को स्पेशलाइजेशन नहीं माना जाता। जब कोई पीजी करके जॉब ढूंढता है तो पब्लिक पॉलिसीज से जुड़े फील्ड में भी आसानी से जॉब मिल जाती है। जैसे, सरकार के लिए नीति बनाना, कंपनी के लिए पॉलिसी मेकिंग आदि।
पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए देश के बेहतरीन कॉलेज
• दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (DSE)
• इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट (ISI)
• इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट एंड रिसर्च (IGIDR)
• जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU)
पीजी के बाद कहां पर जॉब?
गवर्नमेंट और प्राइवेट सेक्टर में पॉलिसी मेकिंग में इकनॉमिक्स के जानकारों की डिमांड है। नेशनल काउंसिल ऑफ अप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च (NCAER), इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) और इंस्टिट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ (IEG) जैसे विभिन्न संस्थानों में इनकी अच्छी डिमांड है। इकनॉमिस्ट इन संस्थानों में आर्थिक रुझानों का एनालिसिस, डिवेलपमेंट और इकनॉमिक ग्रोथ की भविष्यवाणी करते हैं। इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं के जरिए से इकनॉमिस्ट को बैंकिंग क्षेत्र में नियुक्त करता है। सरकार या केंद्रीय बैंक के साथ-साथ स्टूडेंट्स चाहें तो इंडियन इकनॉमिक सर्विस (IES) से भी जुड़ सकते हैं। इनके अलावा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं, मसलन, वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ जैसे ऑप्शन भी हैं, जहां अच्छे इकनॉमिस्ट की जरूरत होती है। हालांकि, इनमें पीएचडी वालों की डिमांड भी ज्यादा होती है।
पीजी के बाद कितनी कमाई?
अगर किसी स्टूडेंट ने देश या विदेश के बेहतरीन संस्थान से पोस्ट ग्रैजुएशन की डिग्री ली है तो उसे कम से कम 10 से 20 लाख रुपये का सलाना पैकेज ऑफर हो ही जाता है। कई बार 20 लाख से भी ज्यादा का पैकेज मिल जाता है।
ग्रेजुएशन लेवल पर क्या होती है पढ़ाई?
वैसे तो इकनॉमिक्स का सिलेबस हर यूनिवर्सिटी की अलग-अलग हो सकता है, लेकिन इकनॉमिक्स का परिचय, माइक्रोइकनॉमिक्स, मैक्रोइकनॉमिक्स, मैथ्स, स्टैट ऐसे विषय हैं जो ज्यादातर यूनिवर्सिटीज में पढ़ाए ही जाते हैं। इनके अलावा डेटा साइंस भी इसमें हो सकती है।
अंडरग्रेजुएशन के लिए देश के बेहतरीन कॉलेज
इस ग्रुप में ज्यादातर दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज हैं
• सेंट स्टीफंस कॉलेज
• हिंदू कॉलेज
• लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR)
• श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC)
इनके अलावा कोलकाता यूनिवर्सिटी का प्रेजिडेंसी कॉलेज और पुणे का फग्यूर्सन कॉलेज भी बेहतर हैं।
ग्रेजुएशन के बाद कहां पर जॉब?
इकनॉमिक्स से ग्रेजुएशन के बाद एक्चूरिअल (Actuarial) साइंस या रिस्क मैनेजमेंट फील्ड में एक प्रफेशनल के रूप में जुड़ सकते हैं। इस सेक्टर में पैकेज भी अच्छा मिलता है। इसके अलावा डेटा एनालिसिस है, जिसे बिजनेस एनालिटिक्स या डेटा साइंस या बिग डेटा एनालिटिक्स के रूप में भी जाना जाता है, इसमें भी शानदार करियर है। दरअसल, डेटा का पूरा खेल स्टैट से जुड़ा है, इसलिए इकनॉमिक्स वालों की मांग इसमें भी है।
ग्रेजुएशन के बाद कितनी कमाई?
अगर किसी स्टूडेंट ने अच्छे कॉलेज से इकनॉमिक्स से ग्रेजुएशन किया है तो 6 से 8 लाख रुपये सलाना तक के पैकेज ऑफर हो रहे हैं।
ग्रैजुएशन में पढ़ने के लिए 12वीं में क्या सब्जेक्ट हों?
किसी मान्यताप्राप्त बोर्ड से 12वीं कर चुका स्टूडेंट, चाहे वह किसी भी स्ट्रीम (आर्ट्स/साइंस/कॉमर्स) का हो, ग्रेजुएशन में इकनॉमिक्स रख सकता है। हालांकि, 12वीं तक मैथ्स एक विषय के रूप में अगर शामिल रहता है तो उन्हें ज्यादा तरजीह देते हैं, भारत के साथ-साथ विदेशों के टॉप कॉलेज वाले।
BA (ऑनर्स) या BSc (ऑनर्स)?
इकनॉमिक्स के लिए बीए और बीएससी ऑनर्स में से बेहतर कौन है, इस पर अक्सर चर्चा होती है। लोग इसे अब भी साइंस या आर्ट्स में बांटने की कोशिश करते हैं। सच तो यह है कि इकनॉमिक्स एक ऐसा सब्जेक्ट है जिसे आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स तीनों स्ट्रीम वाले पढ़कर अपना करियर बना सकते हैं। आज भी कुछ यूनिवर्सिटी इकनॉमिक्स से ग्रेजुएशन के बाद बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) की डिग्री प्रदान करती है जबकि दूसरी बैचलर ऑफ साइंस (BSc) की डिग्री देती है। मसलन कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी, जहां बीए (ऑनर्स) की डिग्री प्रदान करती है। वहीं लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (LSE) और कलकत्ता यूनिवर्सिटी बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री जारी करती है। बीए और बीएससी के अलावा BBE (बैचलर इन बिजनेस इकनॉमिक्स) में भी इकनॉमिक्स की पढ़ाई होती है, लेकिन इसमें इकनॉमिक्स की पूरी पढ़ाई नहीं होती। इसमें एक बड़ा हिस्सा बिजनेस स्टडी का होता है।
विदेशों की टॉप यूनिवर्सिटीज
QS यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2019 के आधार पर, इकनॉमिक्स के लिए टॉप 20 यूनिवर्सिटी में से 18 अमेरिका या ब्रिटेन में स्थित हैं।
ब्रिटेन
• LSE (लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स)
• ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी
• कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी
अमेरिका
• हार्वर्ड यूनिवर्सिटी
• MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी)
• स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी
इनके अलावा टॉप 50 में दूसरे देशों में सिंगापुर, कनाडा, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। इन यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल करने पर उसे नेशनल और इंटरनेशनल, दोनों स्तर पर काम करने का मौका मिल जाता है।
-एजेंसियां

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