अगर आप खुश नहीं हैं तो सेवा करें: श्री श्री रवि शंकर

संकट बहुत कुछ स्वयं ही स‍िखा देता है, कोरोना का संकट ऐसा ही एक अवसर है जब आप अध्यात्म से गहरे से जुड़ सकते हैं। श्री श्री रवि शंकर कहते हैं क‍ि अकसर देखने में ये भी आया है क‍ि कुछ लोग जो जिम्मेदारी लेते हैं, वो अक्सर प्रार्थना नहीं करते और जो प्रार्थना करते हैं वो जिम्मेदारी नहीं लेते।

अध्यात्म एक ही समय में दोनों को एक साथ लाता है। सेवा, सर्विस और अध्यात्मिक अभ्यास एक दूसरे से जुड़ता हुआ आगे बढ़ता है। आप अध्यात्म की गहराई में जितना जाते हैं, आप उतना ही अधिक इससे मिलने वाले आनंद को अपने चारों ओर के लोगों से साझा करते हैं। अगर आप दूसरों की सेवा करते हैं तो आप अपने आप योग्यता हासिल कर लेते हैं। कई लोग दूसरों की सेवा करते हैं क्योंकि यह उनके लिए बहुत सारा लाभ लाता है। अगर लोग खुश होते हैं तो प्राय: लोग महसूस करते हैं कि उन्होंने अतीत में अवश्य कोई सेवा की होगी। अगर आप खुश नहीं हैं तो सेवा करें। इससे आपकी आत्मा का उत्थान होगा और यह आपको खुशी देगा। जितना अधिक आप देते हैं, उतने ही अधिक शक्ति और विपुलता से आपको सम्मानित किया जायेगा।
जब हम जीवन में सेवा को सबसे अधिक प्राथमिकता देते हैं तो यह डर को खत्म कर देता है और हमारे ध्यान को केंद्रित करता है। यह कर्म को मकसद प्रदान करता है और लंबे समय तक के लिए आनंद बनाए रखता है। जब हम सेवा करते हैं तो यह हमारे प्राकृतिक स्वभाव और मानव मूल्यों को हममें सहज रूप से लाता है और एक ऐसे समाज के निर्माण में मदद करता है जो डर और निराशा से मुक्त हो।

युवा लोगों के लिए अध्यात्म साझा करने की गुणवत्ता को सामने लाना और आत्मविश्वास को बढ़ाने के बारे में है। अगर आप में दूसरों की मदद और सेवा करने की चाहत है तो खुद के बारे में परेशान ना हों। परमात्मा आपका खयाल रखेंगें, धन के बारे में भी सोच कर परेशान न हों। अगर आप प्यार और कृतज्ञता से परिपूर्ण हैं तो वहां डर के लिए कोई जगह नहीं है। सेवा अवसाद की सबसे बड़ी और सबसे प्रभावी दवा है।

जिस दिन आप आशाहीन और कमतर महसूस करते हैं तो उस दिन अपने कमरे से बाहर निकलें और लोगों से पूछें, “मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं?” वह सेवा जो आप करेंगे, वह आपके अंदर एक क्रांति लाएगा। यह तब होता है जब आप पूछते हैं “मैं क्यूं? या “मेरे बारे में क्या?” जिससे आप उदास हो जाते हैं। इसके बजाय कुछ सांस से संबंधित अभ्यास जैसे कि सुदर्शन क्रिया करें और हर रोज कुछ मिनटों के लिए चुप्पी बनाए रखने का प्रयास करें। यह आपके शरीर और मन को ऊर्जा देगा और आपकी ताकत बढ़ाएगा।

आनंद के दो प्रकार होते हैं। एक कुछ पाने की खुशी जैसे कि एक बच्चा। “अगर मैं कुछ पाता हूं तो मैं खुश हो जाउंगा। अगर मुझे खिलौना मिलता है तो मैं खुश हो जाउंगा।” हमलोग प्राय: इस स्तर पर अटक जाते हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि इससे आगे नहीं जा पाते। दूसरी प्रकार की खुशी कुछ देने में है। एक दादी अपने पोते पोतियों को मिठाईयां देकर खुश होती है। वह इस बात की परवाह नही करती कि उसे खुद के लिए क्या मिला है। कुछ देने की खुशी एक परिपक्व खुशी होती है।

भगवान आपसे किसी भी चीज की उम्मीद नहीं करता है। जब आप कोई भी काम कोई लाभ नहीं बल्कि केवल खुशी पाने के लिए करते हैं तो इसे ही सेवा कहते हैं। सेवा आपको उसी क्षण संतुष्टि दे देता है और यह काफी लंबे समय तक कायम भी रहता है। अपने भीतर भगवान को देखना ध्यान है और अपने आगे वाले में भगवान देखना सेवा है। लोग अक्सर इस बात से भयभीत रहते हैं कि अगर वो सेवा करते हैं तो दूसरे उनका शोषण करेंगे। बिना किसी निंदा के जागरूक और बुद्धिमान बनें। सेवा योग्यता लाती है, योग्यता आपको ध्यान की गहराई में जाने की अनुमति देता है और ध्यान आपकी मुस्कान वापस लाता है।

Dharma Desk: Legend News

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *