अगर मैं चुनाव जीतता हूं तो टेक्नोक्रेट की तरह काम करूंगा: ई श्रीधरन

पलक्कड़। बीजेपी उम्मीदवार ई श्रीधरन भले ही राजनीति में आ गए हैं लेकिन उनका कहना है कि मैं पॉलिटिशियन नहीं हूं और न ही पॉलिटिक्स की बात कर रहा हूं।
श्रीधरन ने कहा कि अगर मैं चुनाव जीतता हूं तो क्षेत्र को टेक्नोक्रेट की तरह ही चलाऊंगा। उन्होंने कहा कि यह लोगों को तय करना है कि उन्हें पॉलिटिशियन चाहिए या फिर काम करने वाला।
अपने अनुभव से नया वर्क कल्चर ला सकता हूं
लोग आपको क्यों वोट दें? इस सवाल पर श्रीधरन ने कहा कि मैं अपने अनुभव से नया वर्क कल्चर ला सकता हूं। इफेक्टिव गवर्नेंस दे सकता हूं और हम लोगों को दिखा सकते हैं कि प्रोजेक्ट वक्त पर पूरे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि केरल में छोटे छोटे प्रोजेक्ट भी वक्त पर पूरे नहीं होते हैं और यह बदलना चाहिए। मैं लोगों से विकास के लिए खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और इंडस्ट्री लाने के लिए वोट मांग रहा हूं। इंडस्ट्री आएगी तभी लोगों को रोजगार मिलेगा। अभी पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा राज्य से बाहर जाने को मजबूर हैं।
मैं पॉलिटिक्स की बिल्कुल बात नहीं करता
बीजेपी उम्मीदवार ने कहा कि मैं बस विकास की बात कर रहा हूं, मैं पॉलिटिक्स की बिल्कुल बात नहीं करता। मैं न किसी पर कोई आरोप लगा रहा हूं न किसी के लिए बुरा बोल रहा हूं। मैं लोगों को बता रहा हूं कि मैं क्षेत्र के लिए क्या कर सकता हूं। उम्र की बात होने पर वह कहते हैं कि यंग और एक्सपर्ट दोनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवा मुझसे बहुत अच्छे से कनेक्ट कर रहे हैं। मेरे आइडिया सुनकर वह बेहद उत्साहित हैं।
किंगमेकर बन कर उभरेगी बीजेपी
केरल में राजनीतिक हिंसा की बात पर ई श्रीधरन ने कहा कि अच्छी सरकार आएगी तो यह हिंसा बंद हो जाएगी और बीजेपी सत्ता में आती है तो राजनीतिक हिंसा रुक जाएगी। उन्होंने कहा कि मैं लोगों से कहना चाहता हूं कि जिनका भी देश के निर्माण में योगदान है उन्हें एक वक्त बाद राजनीति में आना चाहिए। तब हर राज्य को अच्छी सरकार मिलेगी। ई श्रीधरन ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि केरल में बीजेपी का परफॉर्मेंस अच्छा होगा और इतनी सीटें बीजेपी जीतेगी जिससे वह किंगमेकर बन कर उभरेगी।
केरल ने क्या अचीव किया?
श्रीधरन ने कहा कि मैं करीब दस साल पहले दिल्ली से केरल शिफ्ट हो गया था। यहां मैंने यूडीएफ सरकार के साथ भी काम किया है और एलडीएफ सरकार के साथ भी। इन दोनों के साथ काम करके और इनका परफॉर्मेंस देखकर मैं बहुत निराश हुआ। मुझे लगा की केरल में बड़े बदलाव की जरूरत है। पिछले 65 साल से यूडीएफ और एलडीएफ बारी बारी से शासन कर रही है। लेकिन केरल ने क्या अचीव किया?
केरल में सब ठीक…यह बुलबुला है
केरल अपने पड़ोसी राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश से काफी पीछे है, खासकर इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में। एक भी इंडस्ट्री केरल में नहीं आई। मैं चाहता हूं कि केरल मॉर्डन और वाइब्रेंट राज्य बने। उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि केरल में सब ठीक चल रहा है लेकिन यह बस एक बुलबुला है। करीब 75 हजार करोड़ रुपये केरल में बाहर से आया हैं। जो लोग बाहर जाकर काम करते हैं उनके मनीऑर्डर से यह पैसा आया है। यह बुलबुला कभी भी फूट सकता है।
-एजेंसियां

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