बड़े भाई मुकेश से बात बन जाती तो अनिल को यह दिन न देखने पड़ते

नई दिल्ली। अगर बड़े भाई मुकेश के साथ अनिल की बात बन जाती तो शायद उन्हें यह दिन देखना नहीं पड़ता लेकिन मुकेश अंबानी ने छोटे भाई अनिल अंबानी के पुराने कर्ज चुकाने से इंकार कर दिया और अनिल के दिन फिरने की सारी उम्मीदें धूमिल हो गईं।
रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) ग्रुप ने गुरुवार को अपने कर्जदाताओं से कहा कि वे ग्रुप के खाते से 260 करोड़ रुपये सीधे स्वीडन की टेलिकॉम गीयर निर्माता कंपनी एरिक्सन को ट्रांसफर करने की अनुमति दें। ग्रुप ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरकॉम चेयरमैन अनिल अंबानी और ग्रुप के दो डायरेक्टरों को आदेश की अवहेलना का दोषी पाए जाने के ठीक एक दिन बाद उठाया। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एरिक्सन को 550 करोड़ रुपये भुगतान करने की समय-सीमा पार करने को अपने आदेश की अवहेलना माना और चार सप्ताह के अंदर एरिक्सन को 453 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर चार सप्ताह में एरिक्सन को 453 करोड़ रुपये नहीं मिले तो अनिल अंबानी समते दोनों डायरेक्टरों को तीन महीने तक जेल की सजा काटनी होगी।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, ‘रिलायंस कम्युनिकेशंस ग्रुप ने इनकम टैक्स रिफंड के रूप में अपने बैंक अकाउंट में आए 260 करोड़ रुपये सीधे एरिक्सन को ट्रांसफर करने की तुरंत स्वीकृति मांगी।’ बयान में कहा गया है कि 118 करोड़ रुपये सुप्रीम कोर्ट में पहले ही जमा किए जा चुके हैं।
प्रवक्ता ने कहा, आरकॉम को और 200 करोड़ रुपये जुटाने का भरोसा है ताकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से चार सप्ताह की तय की गई मियाद के अंदर एरिक्सन का पूरा 550 करोड़ रुपये बकाया और उस पर बना ब्याज पूरी तरह चुका दिया जाए।’
बड़े भाई से नहीं बनी बात
इससे पहले दो भाइयों रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के बीच ऐसेट्स की खरीद-बिक्री की बातचीत परवान नहीं चढ़ सकी थी। अब हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली चार सप्ताह की मियाद इस बार चूक गए तो अनिल अंबानी को तीन महीने की जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी। इतना ही नहीं, उनके पास अपनी कंपनी को बैंकरप्ट्सी प्रॉसिडिंग्स से भी बचाने का कोई चारा नहीं दिख रहा है।
मुकेश के मुकरने से मुश्किल में अनिल
दरअसल, जियो ने टेलिकॉम डिपार्टमेंट को एक पत्र लिखकर सरकार से यह आश्वासन मांगा था कि उसे आरकॉम के पुराने कर्जे चुकाने को नहीं कहा जाएगा। इसी पत्र ने सब किए धरे पर पानी फेर दिया। मुकेश के मुकरने के बाद टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने अनिल को आरकॉम के स्पेक्ट्रम ऐसेट्स रिलायंस जियो को बेचने की अनुमति नहीं दी जिससे अनिल को 23 हजार करोड़ रुपये मिल सकते थे।
सुप्रीम कोर्ट की नजर में जियो जिम्मेवार
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ऑरकॉम की ऐसेट्स की बिक्री नहीं हो पाने का जिम्मेवार टेलिकॉम डिपार्टमेंट को नहीं बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो को मानता है। कोर्ट ने कहा कि वह ऑरकॉम-जियो की डील को फलदायी बनाने का सर्वोत्तम प्रयास किया। उसने टेलिकॉम डिपार्टमेंट को निर्देश दिया कि वह बैंक गारंटी की जगह कॉर्पोरेट गारंटी लेकर आरकॉम को अपना स्पेक्ट्रम जियो के हाथों बेचने के साथ-साथ स्पेक्ट्रम यूजर चार्ज (एसयूसी) के एवज में आरकॉम की ग्रुप कंपनी के जमीन बेचने की अनुमति दे दे।
ध्यान रहे कि अनिल अंबानी 47 हजार करोड़ रुपये के कर्ज तले दबे हैं। फिर जब मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो ने बेहद सस्ता प्लान पेश कर अनिल के आरकॉम की कमर तोड़ दी तो अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गईं। आइए जानते हैं कब क्या हुआ…
➤ 25 जनवरी, 2013- एरिक्सन और आरकॉम ने एक समझौता किया जिसके तहत एरिक्सन ने आरकॉम को सर्विसेज प्रवाइड करने पर सहमति जताई।
➤ 7 मई, 2017- इनसॉल्वंसी कोड के तहत एरिक्सन ने आरकॉम और इसकी यूनिट्स को नोटिस जारी किया।
➤ 7 सितंबर, 2017- एरिक्सन ने आरकॉम के साथ हुआ समझौता खत्म कर दिया।
➤ 8 सितंबर, 2017- एरिक्सन ने एनसीएलटी में आरकॉम के खिलाफ इनसॉल्वंसी याचिका दायर की और 1,500 करोड़ से ज्यादा का बकाया मांगा।
➤ 15 मई, 2018- एनसीएलटीसी ने आरकॉम के खिलाफ इनसॉल्वंसी पिटिशन को स्वीकार कर लिया।
➤ आरकॉम ने एनसीएलएटी में आदेश के खिलाफ अपील की, दोनों कंपनियों के साथ सेटलमेंट की बातचीत शुरू हुई।
➤ 30 मई, 2018- एनसीएलएटी ने आरकॉम को आदेश दिया कि सेटलमेंट पैक्ट के तहत 30 सितंबर तक एरिक्सन को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करे।
➤ आरकॉम के चेयरमैन ने जिम्मेदारी ली कि डेडलाइन के अंदर इस रकम का भुगतान कर दिया जाएगा।
➤ इसके बाद आरकॉम सुप्रीम कोर्ट चली गई और एनसीएलटी में इनसॉल्वंसी प्रॉसिडिंग्स को रद्द करने की गुहार लगाई।
➤ सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आरकॉम को 30 सितंबर की डेडलाइन तक एरिक्सन को पैसे देने होंगे।
➤ आरकॉम ने सुप्रीम कोर्ट/एनसीएलएटी का रुख किया और पेमेंट डेडलाइन के लिए 60 दिन की मोहलत और मांगी, 30 सितंबर की डेडलाइन निकल गई।
➤ 1 अक्टूबर, 2018- एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट में आरकॉम के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज किया।
➤ 23 अक्टूबर, 2018- सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को 15 दिसंबर तक एरिक्सन को पैसा देने को कहा।
➤ आरकॉम ने दूसरी डेडलाइन भी मिस कर दी, इसके बाद फिर मोहलत मांगी, एससी ने मोहलत देने से ना कर दिया।
➤ 20 जनवरी, 2019- एरिक्सन ने अनिल अंबानी के खिलाफ अवमानना की दूसरी अर्जी दाखिल की।
➤ जनवरी- सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी को अवमानना का नोटिस भेजा और कोर्ट में हाजिर होने को कहा।
➤ 21 जनवरी- आरकॉम ने एरिक्सन से अंबानी के खिलाफ याचिका वापस लेने पर बकाया देने को कहा, लेकिन एरिक्सन ने करने से इनकार कर दिया।
➤ 1 फरवरी- आरकॉम ने बैंकरप्ट्सी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
➤ 20 फरवरी- सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाया और टेलिकॉम कंपनी को 4 हफ्तों में 453 करोड़ बकाया चुकाने को कहा नहीं तो अंबानी को जेल जाना होगा।
-एजेंसियां

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