IAS बी चंद्रकला के मथुरा में हैं कई राखीबंद भाई, इसके अलावा जानिए और बहुत कुछ…

कभी मथुरा में जिलाधिकारी के पद पर काबिज़ रहीं महिला IAS बी चंद्रकला के कृष्‍ण की पावन जन्‍मस्‍थली में भी कई राखीबंद भाई हैं। मजे की बात यह है कि बी चंद्रकला के ये भाई अलग-अलग कार्यक्षेत्रों से हैं और अलग-अलग फन में माहिर हैं।
इस बात का खुलासा दरअसल तब हुआ जब बी चंद्रकला के मथुरा में तैनाती के दौरान रक्षाबंधन का पर्व आया। बस फिर क्‍या था, बी चंद्रकला से राखी बंधन कराने को उनके तथाकथित भाई न सिर्फ लाइन लगाकर जिलाधिकारी आवास व कार्यालय पर जा खड़े हुए बल्‍कि तत्‍काल अपने राखीबंद भाई होने का सुबूत तत्‍काल सोशल साइट्स और विशेषकर फेसबुक पर पोस्‍ट भी कर दिया।
2008 बैच से यूपी कैडर की IAS बी चंद्रकला के इन सभी भाइयों ने उनसे संबंधों की निकटता का बढ़-चढ़कर प्रचार प्रसार किया और अपने कर्तव्‍य को तिलांजलि देकर राखीबंंद भाई होने का धर्म निभाने में जुट गए।
इन भाइयों का अपनी बहना से भावनात्‍मक लगाव किस हद तक है, इसकी जानकारी बी चंद्रकला के यहां खनन घोटाले में पड़ी सीबीआई की रेड के बाद भी दिखाई दिया।
बी चंद्रकला के कुछ भाई तो उनके यहां रेड पड़ने के साथ ही यह कहते हुए सुने गए कि मोदी सरकार उनकी बहना को परेशान कर रही है और उनकी बहना तो गंगा की तरह पवित्र तथा यमुना की तरह पावन रही है।
इसके अलावा कुछ भाइयों ने यह भी कहा कि कौन अधिकारी आज के दौर में दूध का धुला है, हमारी बहना ने कुछ किया भी है तो ऐसा क्‍या कर दिया।
एकआध भाई को मलाल है कि यदि आय से अधिक संपत्ति में से बहना ने उनके नाम भी कुछ कर दिया होता तो वह फंसती नहीं और वो मौका आते ही उनका पाई-पाई का हिसाब कर देते। वो जानते हैं कि बहना के माल पर बुरी नजर रखने वाले का मुंह काला होता है।
अपने इन भाइयों की भावना का लाभ उठाते हुए बी चंद्रकला ने मथुरा में यथासंभव अपने पद का ‘उपयोग’ किया।
बताया जाता है कि बी चंद्रकला अकेली अधिकारी नहीं हैं जिन्‍होंने मथुरा वासियों को कच्चे धागे के रिश्‍ते में बांधा हो। पूर्व में यहां तैनात रहे पुरुष आला अधिकारी भी ऐसा करते रहे हैं, और उन्‍होंने अपनी सुविधा से कई-कई ‘भाई’ बनाए हैं।
अपने मेड इन मथुरा भाइयों से प्राप्‍त ठोस सूचना के आधार पर तत्‍कालीन आबकारी अधिकारी को लखनऊ जाते वक्‍त बीच रास्‍ते से लौटने के लिए मजबूर करके उनकी नोटों से भरी अटैची छीन लेने जैसी इस पुरुष अधिकारी की ”अजब कला” का ज्ञान बहुत से आम व खास लोगों को भी है किंतु मुंह खोलने की हिम्‍मत नहीं है क्‍योंकि भाई अब भी आगरा में जमे हैं। पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए।
उक्‍त अधिकारी पड़ोसी जनपद आगरा में तैनाती के चलते अपनी करामाती कार्यप्रणाली से योगीराज में भी मलाई मार रहे हैं।
ये बात दीगर है कि उन्‍होंने अपने संबंधों का ऐसा प्रचार नहीं किया जैसा बी चंद्रकला ने किया।
ऑनलाइन चार्ज लेकर बनाया रिकार्ड
अखिलेश सरकार के ताकतवर IAS अधिकारियों में शुमार बी चंद्रकला ने मथुरा से तबादला हो जाने के बाद दुबई में बैठे-बैठे ऑनलाइन बुलंदशहर के जिलाधिकारी का चार्ज लेकर तथा मेल के जरिए वहां के नए सीडीओ की ज्‍वाइनिंग कराकर सबको आश्‍चर्य में डाल दिया था।
ब्‍यूरोक्रेट्स की मानें तो ऐसा कारनामा करने वाली वह पहली आईएएस अधिकारी थीं।
मेरठ में बनाया सबसे लंबी पेंटिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड
मेरठ में डीएम रहते हुए बी चंद्रकला ने 14 नवंबर को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिवस पर विश्व की सबसे लंबी पेंटिंग बनवाकर विश्व रिकॉर्ड बनवाया था। ये पेंटिंग 1400 मीटर लंबी थी। इसे बनाने में 3500 कलाकार लगे थे। इसके लिए डीएम के तौर पर उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
इससे पहले सबसे लंबी पेंटिंग चीन के हॉग कांग वेटलेंड पार्क की ओर 17 अक्टूबर 2009 में बाई नंबर बनाई गई थी। यह पेंटिंग 959.35 मीटर लंबी और 1.2 मीटर ऊंची थी। बर्ड्स एंड वेटलेंड्स थीम पर बनायी गई इस पेंटिंग को 2041 लोगों ने बनाया था।
CBI के छापे से 9 दिन पहले खरीदी थी प्रॉपर्टी
नई जानकारी के अनुसार खनन घोटाले में सीबीआई (CBI) का छापा पड़ने से महज नौ दिन पहले ही बी चंद्रकला ने अपने गृह राज्‍य तेलंगाना में एक प्रॉपर्टी खरीदी थी। यह प्रॉपर्टी एक आवासीय प्लॉट के रूप में है। बी चंद्रकला ने 107 नंबर के इस प्लॉट की रजिस्‍ट्री तेलंगाना के मलकाजगिरी जिला अंतर्गत ईस्ट कल्याणपुरी इलाके में 27 दिसंबर 2018 को करवाई है।
खास बात ये है कि इस प्लॉट को उन्होंने बिना किसी बैंक लोन के खरीदा है। छापे से तीन दिन पहले ही चंद्रकला की ओर से एक जनवरी 2019 को आईपीआर (Immovable Property Return) दाखिल किया गया था। वर्ष 2018 की संपत्तियों के ब्योरे के लिए भरे इस रिटर्न में उन्होंने अपनी कुल सैलरी 91,400 रुपये महीना बताई।
इस सबमें चौंकाने वाली बात यह रही कि एक जनवरी 2019 को भरे इस रिटर्न में IAS बी चंद्रकला ने अपने पास सिर्फ इसी प्रॉपर्टी की जानकारी दी है। उसके पूर्व के वर्षों में भरे रिटर्न में उन्होंने जिन संपत्तियों की सूचना दी थी, उसके बारे में नए रिटर्न में कोई सूचना नहीं दी है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या चंद्रकला (IAS Chandrakala) ने पूर्व की सारी प्रॉपर्टीज बेच दीं या फिर किन वजहों से उन्होंने नए रिटर्न में उसकी सूचना नहीं दी। एक ब्यूरोक्रेट की मानें तो हर साल के रिटर्न में अपनी सभी संपत्तियों की जानकारी देनी होती है, जो संबंधित अफसर और उसके परिवार के पास होती हैं, भले ही इसकी सूचना आप पूर्व में क्‍यों न दे चुके हों।
अखिलेश यादव सरकार में हमीरपुर, मथुरा, बुलंदशहर, मेरठ सहित पांच प्रमुख जिलों में डीएम रहने के बाद बी चंद्रकला ने नई सरकार आते ही दिल्ली में प्रतिनियुक्ति मांग ली।
योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद यूपी के बजाए दिल्ली में काम करने के उनके फैसले की चर्चा रही थी।
बहरहाल, मार्च 2017 में ही वह दिल्ली पहुंचीं और स्वच्छ भारत मिशन की निदेशक बन गईं। फिर केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की निजी सचिव बनीं। इसके बाद फिर वह पिछले साल ही दोबारा यूपी लौटीं और माध्यमिक शिक्षा विभाग में विशेष सचिव का चार्ज लेने के बाद ही स्टडी लीव (शैक्षिक अवकाश) पर चली गईं। हमीरपुर में डीएम रहते चंद्रकला और सपा एमएलसी रमेश मिश्रा सहित कुल 10 लोगों के खिलाफ अवैध खनन का आरोप है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जांच में जुटी सीबीआई ने शनिवार (5 जनवरी) को उनके अलावा अन्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की। एक जनवरी 2019 को उनके खिलाफ सीबीआई के डिप्टी एसपी केपी शर्मा ने खनन मामले में केस दर्ज किया है।
-Legend News

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