मैं पैदा होते ही डिमांड में आ गया था: अनुपम खेर

मुंबई। लॉकडाउन के पहले तक मैं खुद को बहुत ही रेस्टलेस इंसान समझता था। मुझे हर जगह जाना होता था। हर काम करना होता था। मैं एक जगह बैठ ही नहीं सकता था। मगर जब 74 दिन से मैं घर पर बैठा, वो भी अकेला तो मुझे लगा कि मुझमें काफी संयम और ठहराव है।
बहुमुखी कलाकार अनुपम खेर इन दिनों चर्चा में हैं, अपने शो ‘कुछ भी हो सकता है’ को लेकर। लॉकडाउन में लोगों को उम्मीद देने के इरादे से वे अपने इस लोकप्रिय शो को अपने अपने डिजिटल पोर्टल पर लाए हैं। यहां वे अपने शो, कुछ भी हो सकता है मोमेंट, लॉकडाउन की चुनौती, सैलरी कट और जल्द ही शुरू होने वाली शूटिंग के मुद्दे पर बात करते हैं।
आपकी जिंदगी में सबसे पहला पल कौन-सा था, जब आपको लगा कि ‘कुछ भी हो सकता है’?
मुझे मेरे माता-पिता ने बताया था कि जब मैं पैदा हुआ था तो मुझे पैदा करने वाली एक अंग्रेज नर्स थी। उसने मेरी मां से कहा कि अभी आप सिर्फ 19 साल की हैं और आपके तो बहुत सारे बच्चे हो सकते हैं, यह बच्चा मुझे गोद में दे दीजिए। मैं इसको अडॉप्ट करना चाहती हूं। मेरी मां ने तो मुझे गोद नहीं दिया। पर इस बात से मुझे लगा कि मैं पैदा होते ही डिमांड में आ गया था। बाद में समझदार होने पर मुझे लगा कि अगर यह हो सकता है तो कुछ भी हो सकता है।
अपने शो कुछ भी हो सकता है को अपने डिजिटल पोर्टल पर लाने का विचार क्यों और कैसे आया?
-मैंने इसके बारे में सोचा नहीं था। मैंने 15 साल पहले यह प्ले शुरू किया था। मैं इस लॉकडाउन में एक दिन यह प्ले लगाकर देख रहा था, तब मुझे लगा कि अगर यह प्ले लोगों तक पहुंचाया जाए तो शायद कहीं न कहीं उनको एक ढांढस मिलेगा क्योंकि आज लोग बहुत घबराए हुए हैं और काफी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्ले मजाकिया होने के नाते लोगों का खूब मनोरंजन भी करेगा क्योंकि यह एक ऐसे इंसान के बारे में है, जो अपनी असफलता पर हंसता है। पर कभी उम्मीद नहीं छोड़ता है। इस लॉकडाउन में लोगों को उम्मीद देने के लिए मैं इस शो को अपनी वेबसाइट पर लाया।
लॉकडाउन के साथ आपने कैसे निबाह की?
-पॉजिटिव एटिट्यूड के साथ, मगर पॉजिटिव एटिट्यूड के लिए पॉजिटिव होना बहुत जरूरी है। अभी मैं 74 दिन से घर पर मुंबई में अकेला बैठा हूं और किरण जी (अभिनेत्री पत्नी किरण खेर) चंडीगढ़ में हैं। लॉकडाउन के पहले तक मैं खुद को बहुत ही रेस्टलेस इंसान समझता था। मुझे हर जगह जाना होता था। हर काम करना होता था। मैं एक जगह बैठ ही नहीं सकता था। मगर जब 74 दिन से मैं घर पर बैठा, वो भी अकेला, तो मुझे लगा कि मुझ में काफी संयम और ठहराव है। इस दौरान अपने आप से बहुत सारी बातें हुईं और मैंने अपने आपको काफी समझा। मैंने कुछ पॉइंट्स भी नोट किए हैं, शायद उससे कोई किताब निकलकर आए। बस अगर लॉकडाउन नहीं होता तो मैं अपनी मां से मिल लेता, इसी बात का अफसोस है। अनिल कपूर जो मेरे अच्छे दोस्त हैं उनसे मिल लेता।
लॉकडाउन में अकेले कोई परेशानी तो नहीं हुई?
-वैसे मेरा दिन अच्छे से कट जाता है। मैं शाम 4 से 5 थोड़ा उदास महसूस करता था इसलिए मैंने अपनी दिनचर्या बनाई हुई है। जैसे मैं सुबह जल्दी उठ जाता हूं, फिर किताबें पढ़ता हूं, एक्सरसाइज करता हूं, टीवी पर कुछ देख लेता हूं। पर मैं खबरें नहीं देखता हूं और न अखबार पढ़ता हूं। मैं अपने उन करीबी लोगों से रोज फेसटाइम पर बात करता रहता हूं। जो लोग मेरे अंदर दृढ़ता लाते हैं और मेरे स्तंभ का आधार हैं।
सरकार ने शूटिंग करने की अनुमति दे दी है, क्या कहना चाहेंगे?
-जैसा हमें कहा जाएगा, हम उसी तरह से शूटिंग करेंगे। बदलाव तो आएगा ही और सब चीज में बदलाव आया है। बदलाव पहले मुश्किल देता है फिर आदत पड़ जाती है। पहले हाथ से कपड़े धोते थे, फिर वाशिंग मशीन आई। उस वक्त मेरी मां को भी परेशानी हुई थी कि वाशिंग मशीन में कपड़े कैसे धुल सकते हैं। आज हम भूल चुके हैं कि डीमोनीटाइजेशन में कोई परेशानी हुई थी। शूटिंग में जो भी नए मानदंड बनाए जाएंगे, उनकी हमें कुछ ही समय में आदत हो जाएगी। कुछ समय में वे नॉर्मल लगने लगेंगे। हम नए निर्देशों के अनुसार शूटिंग करेंगे।
फिल्म इंडस्ट्री के कई सितारों ने प्रोड्यूसर्स को सहारा देने के लिए अपनी सैलरी कम करने की पहल की है, आपकी क्या राय है?
-जो चरित्र अभिनेता होते थे, वह तो उतना ही लेते थे, जितना उन्हें मिलता था। उनकी सैलरी में कभी कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं आया। हां, जिन लोगों को ज्यादा मिलता था, अगर वह कम पैसे लेंगे तो उससे काफी फर्क पड़ेगा। मैं यही चाहता हूं कि हमारे वर्कर्स के लिए हर इंसान को अपनी हर सैलरी से थोड़ा योगदान देना चाहिए। उनका जीवन बेहतर करना जरूरी है।
एक कलाकार होने के नाते जब आप किसी खास पॉलिटिकल आइडियोलॉजी के साथ अपने विचार व्यक्त करते हैं, तो आपको नहीं लगता कि एक अदाकार के रूप में यह आपकी इमेज को आघात पहुंचा सकता है?
-कलाकार होना मेरी जिंदगी का एक अंश है न कि मेरी पूरी जिंदगी। जो मेरे विचार हैं, वह मुझसे जुड़े हैं। अगर मैं अपने विचारों के साथ नहीं जी रहा तो मतलब मैं अपनी खुद की जिंदगी नहीं जी रहा। ऐसा दुनिया में कोई भी व्यक्ति नहीं है, जिसको सारे लोग पसंद करते हैं। मैं बस ऐसी कोई बात नहीं करना चाहता जिससे किसी का दिल दुखे। सारे लोगों को खुश करना वैसे भी बड़ा मुश्किल है, तो आपको कम से कम अपने विचारों के साथ मजबूती से खड़े रहना चाहिए।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *