मैं सिंगल ही खुश हूं, शादी करने का कोई इरादा नहीं: तुषार कपूर

मुंबई। बॉलीवुड एक्‍टर तुषार कपूर सिंगल फादर हैं। सेरोगेसी के जरिए वह बेटे लक्ष्‍य के पिता बने हैं। 44 साल के तुषार ने अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर अब एक बड़ा बयान दिया है। एक्‍टर ने कहा कि वह कभी शादी नहीं करेंगे। एक इंटरव्‍यू में तुषार ने कहा कि वह सिंगल ही खुश हैं और भविष्‍य में कभी भी उनका शादी करने का कोई प्‍लान नहीं हैं। तुषार कहते हैं, ‘मैं खुद को किसी और के साथ शेयर नहीं करना चाहता हूं।’
‘अभी या भविष्‍य में कभी नहीं करूंगा शादी’
तुषार कपूर साल 2016 में लक्ष्‍य के पिता बने हैं। वह तब से अकेले ही बेटे की परवरिश कर रहे हैं। उनकी बहन एकता कपूर भी सिंगल मदर हैं और वह भी भाई की तरह अकेले ही बेटे रवि कपूर की देख-रेख कर रही हैं। तुषार कपूर ने इंटरव्‍यू में कहा कि उन्‍हें अपनी इस चॉइस पर कोई शक नहीं है। उनसे जब पूछा गया कि क्‍या भविष्‍य में वह कभी शादी करेंगे तो तुषार ने सिरे से इंकार कर दिया। उन्‍होंने कहा कि वह खुद को किसी और के साथ भविष्‍य में भी शेयर करना नहीं चाहेंगे।
‘मेरा दिन कैसे बीत जाता है पता नहीं चलता’
‘गोलमाल’ फेम एक्‍टर तुषार कपूर ने कहा, ‘कभी नहीं, क्योंकि अगर मुझे इसके बारे में कोई संदेह होता तो मैं सिंगल पैरेंट बनने की प्रक्रिया से नहीं गुजरता। मैंने यह ऐसे समय और उम्र में किया है, जब मैं इसकी पूरी जिम्‍मेदारी लेने के लिए तैयार था। मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं सही कदम उठा रहा हूं। आज और अभी तक, मुझे ऐसा लगता है कि मेरे पास इतना काम है कि मेरा दिन उसी से पूरा हो जाता है क्‍योंकि मुझे मेरे बेटे के साथ दिनभर बहुत कुछ करना होता है। मेरे पास और कोई विकल्प नहीं है, जिसे मैं चुन सकता था और यह किसी अन्य तरीके से नहीं होता। मैं अभी या भविष्य में भी कभी खुद को दुनिया में किसी के साथ शेयर नहीं करूंगा। तो इसलिए अंत भला तो सब भला।’
प्रकाश झा के करने पर लिया था सेरोगेसी का सहारा
तुषार कपूर ने इससे पहले एक इंटरव्‍यू में बताया था कि फिल्‍ममेकर प्रकाश झा के सुझाव पर ही उन्‍होंने सेरोगेसी से पिता बनने का फैसला किया था। तुषार ने तब कहा था, ‘एक मां डायपर बदलती है और बच्चों को खिलाती है। लोगों को लगता है कि यही बच्‍चों की परवरिश है जबकि पेरेंटिंग एक आकाशगंगा की तरह विशाल है। पेरेंटिंग की पहली जरूरी चीज है बिना शर्म प्‍यार। जैसे जैसे आपका बच्‍चा बड़ा होता है, आपको भी उसके विकास में शामिल होना पड़ता है। एक पिता अपनी भावनाओं को अलग तरीके से जाहिर करता है, क्‍योंकि मां और बाप दोनों का नजरिया बच्‍चे के लिए अलग होता है।
-एजेंसियां

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