Family income में पत्नी के बढ़ते योगदान से पति होते हैं परेशान : सर्वे

नई द‍िल्ली। यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ इंग्लैंड में क‍िए गए एक सर्वे से चला कि Family income में यद‍ि पत्नी का योगदान 40% या उससे ज्यादा होता है, तो पत‍ि तनाव में आ जाते हैं। इस Family income सर्वे में 2001 से 2015 तक तकरीबन 6,000 अमेरिकी दंपतियों को शामिल किया गया था। घर-गृहस्थी संभालने में रुपये पैसों से उनका योगदान बढ़ रहा है, लेकिन यह बात रुढ़िवादी मानसिकता वाले पुरुषों को पचती नहीं है।

महिलाओं में शिक्षा के बढ़ते स्तर और अपने अधिकारों को लेकर बढ़ती जागरूकता के साथ घर गृहस्थी संभालने में रुपये पैसों से उनका योगदान बढ़ रहा है, लेकिन यह बात रुढ़िवादी मानसिकता वाले पुरुषों को पचती नहीं है। इसका पता ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ के एक सर्वे से चला है जिसके मुताबिक, अगर पारिवारिक आमदनी में बीवी का योगदान 40 फीसदी या उससे ज्यादा होता है, तो शौहर तनाव में आ जाते हैं। इस सर्वे में 2001 से 2015 तक तकरीबन 6,000 अमेरिकी दंपतियों को शामिल किया गया था।

कामकाजी महिलाओं से ज्यादा परेशान उनके पति
यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ की स्टडी से यह भी पता चला है कि अगर पति घर का सारा खर्च अकेले उठाता है, तब भी वह मानसिक रूप से तनाव में रहता है। ऐसे में पीयू रिसर्च सेंटर के आंकड़े प्रासंगिक हो जाते हैं जिनके मुताबिक, एक तिहाई अमेरिकी औरतें अपने पति के बराबर या उनसे ज्यादा कमाती हैं। ऐसे में बाथ यूनिवर्सिटी की मानें तो वहां के कामकाजी मर्द तो तनाव से हलकान हो रहे होंगे जहां 1980 में 13% कामकाजी औरतें अपने पति से ज्यादा कमाती थीं जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर तिगुने से थोड़ा कम 33% तक पहुंच गई। बड़ी बात तो यह है कि यह ट्रेंड बना हुआ है।

भारत में ज्यादा गंभीर
भारत में यह समस्या ज्यादा गंभीर हो सकती है क्योंकि यहां कमाई को सीधे आत्मसम्मान से जोड़ा जाता है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इंसान आमतौर पर कमाई को आत्मसम्मान का प्रतीक मानता है और पुरुष अपनी वैल्यू कमाई से आंकते हैं। अगर बीवी ज्यादा कमाती है तो वह मनमुटाव और तानों के दौर का सबब बन सकता है। कई बार तो घर टूटने की नौबत आ जाती है। मॉन्स्टर सैलरी इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की औसत आमदनी 19 प्रतिशत कम है। विमिन ऑफ इंडिया इंक सर्वे में पता चला कि 2018 में घंटे के हिसाब से पुरुषों की औसत सैलरी 242.49 रुपये थी जो महिलाओं की 196.3 रुपये प्रति घंटे की सैलरी से 46.19 रुपये ज्यादा थी।

Family income में पत्नी का 40% योगदान
बाथ यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर पारिवारिक आय में पत्नी का योगदान 40 प्रतिशत तक होता है, पति उसे पचा जाता है। इससे उस पर परिवार का वित्तीय बोझ कम होता है और उसका ‘आत्मसम्मान’ भी बना रहता है। लेकिन यह घटने पर पतियों में मानसिक तनाव घर करने लगता है, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है। हालांकि, यह बात नहीं है कि सभी पतियों को पत्नी के ज्यादा कमाने से दिक्कत है। इस स्टडी के मुताबिक कई पुरुष ऐसी महिला से शादी करते हैं जो पहले से ज्यादा कमा रही होती है। ऐसे पुरुषों की दिमागी सेहत पर पत्नी के ज्यादा कमाने का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।

पति बेरोजगार और पत्नी का बढ़िया करियर तो
हालांकि, अगर पति बेरोजगार है लेकिन पत्नी का करियर बढ़िया चल रहा है तो हालात बदतर हो सकते हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों में पुरुष रुपये पैसों से योगदान नहीं कर पाता है तो उसमें हीन भावना पनपने का जोखिम होता है। पति खुद को हर तरह से ऊंचा साबित करने की कोशिश करता है, आत्मसंतुष्टि के लिए पत्नी के काम से लौटने पर तीखे कॉमेंट करता है। वह हर वक्त उसे नीचा दिखाने के मौके तलाशता है। इससे लड़ाई झगड़े की नौबत आ सकती है, जिसका अंजाम आखिर में परिवार के बिखराव से होता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की इकनॉमिस्ट डॉक्टर जोआना सायड्रा, ‘अगर पत्नी ज्यादा कमाती है तो पति में आत्मसम्मान को लेकर असुरक्षा की भावना घर कर लेती है। इसका शारीरिक और मानसिक सेहत पर घातक असर होता है। अगर ज्यादा कमाने वाली पत्नी कामकाजी तनाव या दूसरी परेशानी की वजह से थोड़ा उखड़कर बात करती है तो पति को यही लगेगा कि वह ज्यादा कमाई का धौंस दिखा रही है। नतीजा, छोटी-छोटी बातों पर भी झगड़े होने लगेंगे।’
– एजेंसी

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