मशाल रैली में घायल छात्राओं का मामला मानवाधिकार आयोग पहुंचा

अलीगढ़। गत 10 द‍िसम्‍बर को आयोजित की गई मतदाता जागरूकता मशाल रैली में गभाना के जसराम सिंह सरस्वती इंटर कॉलेज की छात्राएं मनीषा, जागृति, राखी, कल्पना और निधि मशाल की आग में झुलस गई और घायल हो गयीं थीं। जिस पर सामाजिक संस्था पहल सोसायटी की कोषाध्यक्ष व अधिवक्ता पूनम प्रतीक चौधरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) में शिकायत दर्ज करायी है।

समाजसेवा के साथ- साथ वकालत करने वाली जनपद न्यायालय अलीगढ़ की अधिवक्ता पूनम प्रतीक चौधरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को ऑनलाइन माध्यम से दर्ज करायी गयी शिकायत में कहा है कि रिकार्ड बनाने के चक्कर में अलीगढ़ में 687 किलोमीटर लंबी मशाल रैली का यह आयोजन किया गया, इसके लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स संस्था को भी बुलाया गया और अलीगढ़ का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।

इस आयोजन में सबसे आपत्तिजनक जो बात रही, वह यह थी कि स्कूल के छोटे-छोटे बच्चों को इस रैली में शामिल किया गया। उनके हाथों में आग से जलती हुई मशालें थमाई गई और उनके जीवन से खिलवाड़ करते हुए उनके जीवन की परवाह न करते हुए उन्हें रैली में मशाल लेकर चलने को बाध्य किया गया जिसके फलस्वरूप एक बहुत बड़ी घटना भी अलीगढ़ में हुई जो बेहद खेदजनक , शर्मनाक और आपत्तिजनक है।

अलीगढ़ के गभाना के जसराम सिंह सरस्वती इंटर कॉलेज की छात्राएं मनीषा, जागृति, राखी, कल्पना और निधि इस मशाल की आग में झुलस गई और घायल हो गयीं हालांक‍ि कोई गंभीर हादसा नहीं हुआ और उनकी जान बच गई। आग उगलती मशालें लेकर चल रही छात्राओं पर जब इन मशाल की आग गिरी तो इसमें उनकी जान भी जा सकती थी। यह सीधे- सीधे मानवाधिकार व संविधान के अनुछेद 21, जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। दिनांक 11/12/ 2021 के समाचार पत्रों ने छात्राओं की तस्वीर उनके फोटो के साथ प्रकाशित की जिसमें उनके झुलसे हुए हाथ नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों को देख कर मुझे पीड़ा हुई।
अभिभावक बच्चों को स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं ना की मशाल रैली जैसी चीजों में अपना जीवन झोंकने के लिए।

एडवोकेट पूनम प्रतीक चौधरी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से इस मामले का संज्ञान लेकर मानवाधिकार व संवैधानिक मूलाधिकार अनुछेद 21 जीवन जीने का अधिकार का उल्लंघन करने वाले दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। साथ ही अपील की है कि ऐसी मशाल रैली जो कि लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में महज नाम दर्ज करवाने के लिए की गई जिसमें क‍ि यह मासूम स्कूली छात्राएं आग में झुलस गईं, इनको इस रैली में शामिल करने के लिए बाध्य करने वाले अधिकारियों पर इनके जीवन से खिलवाड़ करने को लेकर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए व मिसाल कायम की जाए जिससे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो। इसके अलावा मांग की है क‍ि सरकारी रैलियों व अन्य रैलियों में स्कूली छात्र छात्राओं का प्रवेश पूर्णतया वर्जित रखा जाए एवं छात्र छात्राओं को स्कूल में पढ़ने दिया जाए और जबरन रैलियों में शामिल करने से रोका जाए।
– Legend News

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