निलंबित डॉक्‍टर कफील खान पत्‍नी सहित मिले प्र‍ियंका वाड्रा से

लखनऊ। गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में करीब तीन वर्ष पहले ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चों की मौत के प्रकरण में निलंबित चल रहे बाल रोग विशेषज्ञ अब पूरी तरह से कांग्रेस की शरण में हैं।
डॉ. कफील खान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव तथा उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा के सम्पर्क में हैं। हाल ही में रासुका के तहत जमानत पर छूटे डॉ. कफील खान ने नई दिल्ली में सपरिवार प्रियंका गांधी से भेंट की और उनको उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संघ में शिकायत करने की जानकारी दी।
अलीगढ़ की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिर्टी मे सीएए के विरोध में देश विरोधी भाषण देने के मामले में रासुका के तहत छह महीने तक जेल में बंद रहे डॉ. कफील खान ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से नई दिल्ली में भेंट की। डॉक्टर कफील खान मथुरा जेल से बाहर आने के बाद प्रियंका गांधी के निर्देश पर सीधा जयपुर गए थे। इस दौरान कांग्रेस महासचिव ने लगातार कफील खान और उनके परिवार के लोगों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल लिया था और हर संभव मदद का वादा किया था। नई दिल्ली में डॉक्टर कफील खान ने अपने परिवार के साथ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात की।
डॉक्टर कफील के साथ उनकी पत्नी और बच्चे भी प्रियंका गांधी से मिले। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और अल्पसंख्यक कांग्रेस के चेयरमैन शाहनवाज आलम मौजूद थे। डॉ. कफील खान की रिहाई के लिए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में बड़ा अभियान चलाया था। हस्ताक्षर अभियान के साथ विरोध प्रदर्शन और जनता को पत्र लिखकर कांग्रेसियों ने डॉक्टर कफील खान की रिहाई के लिए आवाज बुलंद की थी।
सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ लिखा संयुक्त राष्ट्र का पत्र
गोरखपुर के डॉ. कफील खान ने योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को गति देते हुए अब तो इसको अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया है। डॉ. कफील खान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (यूएनएचआरसी) को एक पत्र लिखकर भारत में अंतरराष्ट्रीय मानव सुरक्षा मानकों के व्यापक उल्लंघन और असहमति की आवाज को दबाने के लिए एनएसए व यूएपीए जैसे सख्त कानूनों के दुरुपयोग करने की बात पत्र में लिखी है। पत्र में खान ने संयुक्त राष्ट्र के इस निकाय को शांतिपूर्ण तरीके से सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने के बाद उनके मानवाधिकारों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार से आग्रह करने के मसले पर धन्यवाद दिया और यह भी कहा कि सरकार ने उनकी अपील नहीं सुनी।
कफील खान ने लिखा, मानव अधिकार के रक्षकों के खिलाफ पुलिस शक्तियों का उपयोग करते हुए आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे भारत का गरीब और हाशिए पर रहने वाला समुदाय प्रभावित होगा। जेल में बिताए दिनों के बारे में खान ने लिखा, मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त किया गया और कई दिनों तक भोजन-पानी से भी वंचित रखा गया। क्षमता से अधिक कैदियों वाली मथुरा जेल में सात महीने की कैद के दौरान मुझसे अमानवीय व्यवहार किया गया। इसी बीच सौभाग्य से हाई कोर्ट ने एनएसए और तीन एक्सटेंशन को खारिज कर दिया।
कफील खान ने पत्र में 10 अगस्त, 2017 को गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बच्चों की जान जाने के मामले का भी उल्लेख किया। डॉ. कफील खान को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के आरोपों के बाद जेल से रिहा किया गया है और अब वह जयपुर में रह रहे हैं।
-एजेंसियां

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