तमिलनाडु: मंदिरों की मुक्ति‍ के ल‍िए अभ‍ियान तेज

कोयंबटूर। #FreeTNTemples हैशटैग के साथ #PeopleHaveSpoken ट्विटर पर देशभर में टॉप ट्रेंड की तरह चल रहा था। इसने महीने भर से पूरी दुनिया को आकर्षित किया हुआ है। 3 करोड़ से ज्यादा लोगों ने #FreeTNTemples अभियान का ऑनलाइन और जमीन, दोनों पर समर्थन दिया है।
सद्गुरु ने आज एक और वीडियो जारी किया है, जो पिछले एक महीने में उनके कई वीडियोज़ में से एक है। उसमें राज्य से अनुरोध किया गया है कि वह मंदिरों को मुक्त कर दे, जो द्रविड़ गरिमा का प्रतीक हैं। उन्होंने लोगों से इस अभियान का समर्थन करने का आग्रह करते हुए कहा, ‘मेरा वोट उनके लिए है जो मेरे संवैधानिक अधिकार को पुनः प्रदान करेंगे और #FreeTNTemples.

प्रसिद्ध व्यक्तियों, उद्योग अग्रणियों, मीडिया प्रतिनिधियों, और राजनीतिक नेताओं ने नागरिकों के साथ आकर सरकार से पूजा के हिंदू स्थानों के नियंत्रण के भेदभावपूर्ण चलन को खत्म करने आग्रह किया है।
लोकप्रिय अभिनेता काजल अग्रवाल ने अभियान के समर्थन में आज ट्विीट किया। उन्होंने लिखा, ‘यह दुःखद है और मुझे आशा है कि हम अपनी वास्तुकला, परंपरा और संस्कृति को बचाएंगे।’
एक टिवटर यूज़र ने लिखा, ‘मंदिर – एक समय में जो हमारे पूर्वजों की वास्तुकला के प्रतीक थे – अब शीशविहीन और जीर्ण बना दिए गए है। 3 करोड़ नागरिक महसूस करते हैं कि अगर भक्त इनका प्रबंध देखते, तो ऐसा नहीं हुआ होता। #PeopleHaveSpoken, अब कार्यवाही करने की नेताओं की बारी है।’

एक और यूज़र ने लिखा, ‘जिसका दिल तमिलनाडु के मंदिरों के लिए धड़कता है, वह तमिलनाडु में शासन करे। मेरा वोट उसके लिए है जो भक्तों को मंदिरों को संभालने देगा। ’ #PeopleHaveSpoken

मार्च की शुरुआत में सद्गुरु ने तमिलनाडु प्रशासन से मंदिरों को राज्य के नियंत्रण से मुक्त करने और उन्हें भक्तों को सौंप देने की गुहार का अभियान लॉन्च किया था। यह अभियान, राज्य सरकार की देखभाल के अंतर्गत मंदिरों की दशा पर, राज्य के हिंदू रेलिजस एंड चैरिटेबल एंडोमेंट विभाग की मद्रास हाईकोर्ट में दायर दिल दहलाने वाली जानकारी के फलस्वरूप है।
इस अभियान को तमिलनाडु राज्य में चुनावों के ठीक पहले शुरू करके, सद्गुरु ने मुख्यमुत्री ई पलनीसामी, और विपक्ष के नेता एमके स्टालिन को खुले पत्र लिखे, जिसमें उनसे मंदिरों को राज्य के नियंत्रण से मुक्त करने के उनके इरादों को अपने चुनावी घोषणापत्र में स्पष्ट करने का अनुरोध किया था।
हाल में, उन्होंने दोनों राजनीतिक नेताओं को दोबारा पत्र लिखा जिसमें उन्होंने समुदाय की भावनाओं से और अभियान को हर वर्ग से मिले जबरदस्त समर्थन से अवगत कराया।
एक महीने में ही, नागरिकों ने राज्यभर के मंदिरों की टूट-फूट की विभिन्न दशाओं पर तमामों वीडियो ट्विटर पर डाले हैं। कई सदियों पुराने हैं और कुछ हजारों साल पुराने हैं। उन पर झाड़ उगे हैं, दीवारें और छत गिर गई हैं, मूर्तियां और नक्काशी टूटी हुई हैं, और उनके चारों ओर कचरा पड़ा रहता है। मंदिर उदासीनता और उपेक्षा की शोकजनक कहानी कहते हैं।

– Legend News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *