भारत के पहले राजनयिक ‘शहीद’ के. शंकर पिल्लई को क‍िया याद

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय हितों को आगे ले जाने में भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के अधिकारियों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। सही मायने में कहा जाए तो जैसे देश की सीमाओं की सुरक्षा हमारे सेना के जवान करते हैं, वैसे ही विदेशों में हमारे फर्स्ट लाइन ‘सोल्जर’ इस सेवा के अधिकारी होते हैं। जिनके बारे में हमें बहुत कम जानकारियां मिल पाती है। के. शंकर पिल्लई ने देश की सेवा करते हुए ड्यूटी पर अपनी जान दे दी, जिन्हें याद करते हुए विदेश मंत्री डा. एस. जयशंकर ने ट्वीट किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

जयशंकर ने लिखा कि ”के. शंकर पिल्लई, (IFS: 1948) को याद करिए जिनकी मृत्यु आज ही के दिन कनाडा के ओटावा मे 60 साल पहले ड्यूटी के दौरान हुई थी। भारतीय राजनयिकों ने हमेशा देश की निस्वार्थ भाव से सेवा की है और वह परंपरा आज भी चली आ रही है।” उन्होंने यह भी लिखा कि ओटावा स्थित भारतीय हाई कमीशन के हॉल का नाम के. शंकर की स्मृति में रखा गया है।

कौन हैं के. शंकर पिल्लई

के. शंकर पिल्लई की गिनती स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय राजनयिक “शहीद” में की जाती है। के. शंकर कनाडा स्थित भारतीय उच्चायोग के पहले सचिव थे। उनकी हत्या 19 अप्रैल 1961 को ओटावा में उस वक्त कर दी गई थी, जब वह लंच करके अपने ऑफिस से बाहर निकल रहे थे।

यूगोस्लोवाकिया के नागरिक ने की थी हत्या

पिल्लई की हत्या युगोस्लोवाकिया मूल को शनि फरीजी ने की थी। फरीजी भारत में ब्लैकलिस्टेड था, जिसके कारण उसे भारतीय उच्चायोग ने वीजा देने से मना कर दिया था। इस बात से नाराज फरीजी बधाई देने के बाहने के. शंकर पिल्लई के पास पहुंचा और हाथ मिलाने के बाद उन्हें गोली मार दी।

38 वर्ष की उम्र में हुए थे शहीद

गोली मारने के बाद फरीजी ने पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया। पिल्लई की जब मृत्यु हुई तो वह 38 वर्ष के थे और उनकी पत्नी गर्भवती थी। उनकी मृत्यु पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने देश की संसद में शोक व्यक्त किया था।

  • Legend News
50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *