कैसे बिना किसी खामी के आप तक ऑर्डर्स की डिलिवरी करती है Amazon

दिग्गज ई-रिटेल कंपनी Amazon हर दिन हजारों लोगों तक ऑर्डर्स की डिलिवरी पहुंचाती है। कंपनी का कहना है कि वह दिन देश के 20,500 पिन कोड्स तक प्रॉडक्ट्स की डिलिवरी करती है। यह काम बिना किसी खामी और पूरी स्पीड के साथ किया जाता है।
अमेरिकी कंपनी के भारत में ऐसे 50 वेअरहाउस हैं, जहां से प्रॉडक्ट्स की डिलिवरी का काम होता है। हाल ही में हरियाणा के मानेसर में भी कंपनी ने ऐसा एक वेअरहाउस शुरू किया है। राज्य में यह ऐसा छठा वेअरहाउस है।
जानें कि कैसे कंपनी ग्राहकों तक आसानी और तेजी के साथ पहुंचाती है सामान-
एक बार जब कोई प्रॉडक्ट Amazon के फैसिलिटी सेंटर में पहुंचता है, तो उसकी यात्रा ऐल्गोरिदम के जरिए तय होती है। वहां मौजूद एंप्लॉयीज को सिर्फ इंस्ट्रक्शंस फॉलो करने होते हैं। चाहे बात स्कैनिंग, पिकिंग या फिर पैकेजिंग की हो। हर कदम और गलत कदम का आकलन किया जाता है। पूरी बिल्डिंग में आपको वॉशरूम समेत कहीं भी कोई मिरर नहीं मिलेगा। इसकी वजह यह है कि यदि आप कॉलर सेट करने के लिए कुछ मिनट भी खर्च करते हैं तो वह समय की बर्बादी जैसा होगा। काम को इस तरह से प्रायॉरिटी दिए जाने से ही पार्सल दो दिन के भीतर ग्राहकों तक पहुंच जाते हैं।
फैसिलिटी सेंटर में कैसे होता है काम
तय समय पर सामान के ट्रक गोदाम में पहुंचते हैं। मर्चेंट्स की ओर से बारकोड के साथ पैकेज भेजे जाते हैं। हर आइटम का अपना एएसआईएन (ऐमजॉन स्टैंडर्ड आइडेंटिफिकेशन नंबर) होता है। इन आइटम्स को रिसीव करने के बाद क्लर्क उसके बारकोड को स्कैन करते हैं। ऐमजॉन को भी हर आइटम के वजन और माप की जानकारी होती है। ऐमजॉन के सिस्टम में किसी भी आइटम की एंट्री के बाद उसे स्कैन किया जाता है और फिर उसके बाद उसका वजन आदि तय होता है। इससे यह तय होता है कि आइटम को स्टोर किया जाता है या फिर उसकी पैकेजिंग का साइज क्या होगा।
बारकोड पेरिंग
बारकोड्स के जरिए फैसिलिटी सेंटर में आइटम और उसके कंटेनर की पेरिंग की जाती है। कार्ट समेत जो भी आइटम कंटेनर के साथ एक क्षेत्र से दूसरे में जाते हैं, उनका अपना बारकोड होता है। क्लर्क आइटम्स के बारकोड को स्कैन करने के बाद उन्हें तय शेल्फ में रखते हैं। इस तरह ऐमजॉन को अपने हर आइटम के बारे में हर समय जानकारी होती है।
रैंडम स्टोरिंग
वेअरहाउसिंग से जुड़ी दो स्ट्रैटजी वेअरहाउस में होती हैं- कैटिगरी बेस्ड स्टोरिंग और रैंडम स्टोरिंग। कैटिगरी बेस्ड स्टोरिंग के तहत सभी जूते एक तय एरिया में रखे जाते हैं। लेकिन, ऐमजॉन की ओर से रैंडम स्टोरेज को फॉलो किया जाता है, जो ज्यादा प्रभावी है। इसका अर्थ यह हुआ कि जूते फैसिलिटी सेंटर की लगभग सभी सेल्फ में रखे होते हैं। ऐसे में आइटम का ऑर्डर होने के बाद फैसिलिटी सेंटर में तुरंत ही चीजों की पैकेजिंग करने में आसानी रहती है।
वर्गीकरण और पैकेजिंग
कंटेनर्स का भी दो तरह से क्लासिफिकेशन होता है। एक सिंगल आइटम के ऑर्डर्स के लिए और दूसरा मल्टिपल आइटम के ऑर्डर्स के लिए। सिंगल आइटम वाले में कोई समस्या नहीं होती है। इसमें कर्मचारी बारकोड की स्कैनिंग करते हैं और सिस्टम बताता है कि कैसे पैकेजिंग करनी है लेकिन मल्टीपल ऑर्डर वाले कंटेनर्स में ऐल्गोरिदम के जरिए सामानों का क्लासिफिकेशन होता है और फिर उसकी पैकेजिंग की जाती है।
-एजेंसियां

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