भ्रष्‍टाचार में “मजा” कैसे आता है राहुल जी, Please Explain

Please Explain, क्‍या भारत में भ्रष्‍टाचार अब मजे की बात बन गया है। क्‍या भ्रष्‍टाचार किसी राजनीतिक दल के लिए मजे लेने और मजे देने का विषय हो सकता है।
राहुल गांधी की बातों से तो यही लगता है कि हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्‍टाचार भी उनके लिए मजे लेने और मजे देने की बात है।
अपने अमेठी दौरे के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील में मोदी सरकार पर भ्रष्‍टाचार के अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि अभी तो शुरुआत है, अभी देखना मजा आएगा। आने वाले दो-तीन महीनों में ऐसा ही मजा दिखाएंगे आपको।
राहुल गांधी के सारे आरोपों को भी यदि सही मान लिया जाए तो क्‍या वो यह बता पाएंगे कि इसमें मजा कैसे आएगा, और किसे आएगा।
राहुल गांधी एक राष्‍ट्रीय पार्टी के अध्‍यक्ष हैं और कांग्रेस के स्‍वाभाविक उत्तधिकारी भी, लेकिन वह राफेल डील के ‘स्‍वरचित’ भ्रष्‍टाचार को लेकर इस कदर उतावले हैं कि हर किस्‍म की मर्यादा त्‍याग रहे हैं।
भ्रष्‍टाचार के किसी भी मामले में कैसे तो वह मजा ले सकते हैं और कैसे दे सकते हैं। हो सकता है कि प्रधानमंत्री पद से मजाक वाला उनका पुराना रिश्‍ता हो क्‍योंकि वह मनमोहन के आदेशों की भी सरेआम धज्‍जियां उड़ा चुके हैं किंतु जनता से मजाक करना बहुत महंगा साबित होता है। वो महसूस भी कर रहे होंगे शायद। तो क्‍या राहुल गांधी देश के साथ मजाक कर रहे हैं, या फिर खुद एक मजाक बनते जा रहे हैं। कभी पीएम को सीधे ‘चोर’ कहने लगते हैं तो कभी ‘कमांडर ऑफ थीफ’ बताते हैं।
मैं तो कहता हूं कि राहुल गांधी जितने आरोप लगा रहे हैं और जो कुछ बोल रहे हैं, वो सारे के सारे सच हैं।
अब राहुल गांधी और उनकी पार्टी के नेता क्‍या यह बताएंगे कि वह एक ‘चोर प्रधानमंत्री’ को जेल भिजवाने में विलंब किसलिए कर रहे हैं।
कौन नहीं जानता कि जिस देश में एक राज्‍य की सरकार का गठन कराने के लिए सर्वोच्‍च न्‍यायालय आधी रात को सुनवाई पूरी करके सुबह होते-होते फैसला सुना देता है, वहां राहुल गांधी के अनुसार हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्‍टाचार करने के आरोपी प्रधानमंत्री को जेल भिजवाने के लिए क्‍या दिन में भी सुनवाई नहीं हो सकती।
पता नहीं राहुल गांधी किस बात का इंतजार कर रहे हैं, और क्‍यों कर रहे हैं।
कहीं ऐसा तो नहीं कि राहुल गांधी वास्‍तव में यह सबकुछ मजे लेने और मजे देने के लिए ही कर रहे हों और हकीकत में खाली हाथ हों।
यदि ऐसा है तो तय मानिए कि राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों के लिए मजे लेने का यह खेल बहुत भारी पड़ सकता है।
राहुल गांधी को चाहिए कि वह देश के साथ काफी समय से राफेल को लेकर जो मजाक कर रहे हैं, उस पर गंभीर हो जाएं और सीधे-सीधे सबूत सामने रखें।
माना कि आज राजनीति अपने निम्‍नतम स्‍तर पर आ चुकी है और मान-मर्यादा जैसी बातों का उसमें कोई स्‍थान नहीं रह गया है किंतु कहीं कुछ तो बाकी है जो जनता चुपचाप अनर्गल प्रलाप सुन रही है।
जिस तरह सत्ता का एक धर्म होता है उसी तरह विपक्ष का भी एक धर्म होता है। लक्ष्‍मण रेखा सबके लिए निर्धारित है। उस लक्ष्‍मण रेखा को लांघना हरेक के लिए नुकसानदायक है।
राजनीति की बिसात पर आरोप-प्रत्‍यारोप मोहरों जैसे होते हैं परंतु जिस तरह हर मोहरे की एक मर्यादा होती है, उसी तरह आरोप-प्रत्‍यारोपों की भी मर्यादा होती है। मर्यादा का उल्‍लंघन नाश की निशानी है।
कई बार देखा गया है कि तमाशा देखने और दिखाने वाले ही तमाशा बन जाते हैं। राहुल गांधी को याद रखना चाहिए कि दूसरों के पाप गिनाने का अधिकार सबके पास है लेकिन औरों के पाप गिनाकर स्‍वयं को पाप करने का अधिकार किसी के पास नहीं है।
बकौल राहुल गांधी और कांग्रेस, नरेन्‍द्र मोदी स्‍वतंत्र भारत के सर्वाधिक गए गुजरे प्रधानमंत्री हैं। तो क्‍या राहुल इस मामले में उनसे प्रतिस्‍पर्धा कर रहे हैं ताकि देश को यह बता सकें कि मैं मोदी से कहीं अधिक गया-गुजरा हूं।
भ्रष्‍टाचार में मजा तो उसी को आ सकता है जो ऐसे किसी मजे से बखूबी वाकिफ हो अन्‍यथा भ्रष्‍टाचार सजा हो सकता है किंतु मजा नहीं।
महीनों हो गए राफेल के नाम पर मजे लेते लेते। अब या तो मजे लेना बंद करो या मजे की समूची गठरी खोल दो। उसके बाद जनता फिर किसे मजा चखाती है और किसे सजा, यह जनता को तय करने दो अन्‍यथा लेने के देने पड़ते देर नहीं लगेगी।
-Legend News

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