Janavi M. Folmsbee ने डिज़ाइन किया ह्यूस्टन मैराथन मूरल

अर्से बाद भारत में लगेगी Janavi M. Folmsbee की कला प्रदर्शनी

मुम्बई। आर्टिस्ट, लेखिका और स्कूबा डाइवर Janavi M. Folmsbee की अनोखी कला अब मुम्बई में होनेवाले इंडिया आर्ट फ़ेस्टिवल में प्रदर्शित की जाएगी. Janavi M. Folmsbee की कलाकारी का प्रदर्शन ई-आर्ट गैलरी में किया जाएगा, जिसमें मरीन लाइफ़ को दर्शाया जाएगा.

उल्लेखनीय है बहुमुखी प्रतिभा की धनी फोम्सबी अपने स्कूबा डाइविंग के अनुभवों और समंदर में बिताए पलों से प्रेरणा हासिल करती हैं. उन्हें वीडियो इंस्टॉलेशन, विशालकाय फ़ाइन आर्ट मूरल्स, लेंटिकुलर प्रिंट्स, पारंपरिक तैल चित्रों और मिक्स्ड मीडिया में महारत हासिल है.

इंडिया आर्ट फ़ेस्टिवल के लिए फोम्सबी ने हिंद महासागर के 70 फ़ीट नीचे खींची गयी तस्वीर से दो लेंटिकुलर प्रिंट्स तैयार किए हैं, जिसमें सॉफ़्ट कोरल और मरीन लाइफ़ को दर्शाया जाएगा. एक तस्वीर ग्रैंड केमन तो दूसरी मालदीव में खींची गई है. फोम्सबी का कहना है “ये दोनों ही लोकेशन भले ही दुनिया के अलग अलग छोर पर मौजूद हों, मगर दोनों ही बदलते वातावरण और प्रदूषण का शिकार हैं.”

समंदर में होनेवाली हलचल का पता करने के लिए वो लेंटिकुलर प्रिंट्स‌ की तकनीक का इस्तेमाल करती हैं. फोम्सबी का कहना है, ‘ये एक बेहद पुरानी प्रिंट प्रोसेस तकनीक है, जिससे जुड़ा इतिहास काफ़ी रोचक है.” उन्होंने कहा, “मुझे ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना था जिसे कभी एक छलावे‌ से अधिक कुछ नहीं समझा जाता था, मगर मुझे इसे एक विस्तृत और शाही रूप में परिवर्तित करना था. मुझे डाइविंग के वक्त दिखाई देने वाले तमाम रंगों और वहां होने वाली हलचल को यहां पर साकार करना था.”

Houston-based Janavi M. Folmsbee is being featured in India Art Festival
Houston-based Janavi M. Folmsbee is being featured in India Art Festival

उनका मानना है मरीन लाइफ़ की ख़ूबसूरत ज़िंदगी पर थोड़ी सी रौशनी डालने से लोगों में जागरुकता का स्तर बढ़ेगा.
इसके अतिरिक्त, फोम्सबी इस आर्ट फ़ेस्टिवल में अपने नये तैल चित्र का प्रदर्शन भी करेंगी. ये चित्र जमैका के रीफ़्स से प्रेरित है और इसकी रचना कस्टम पिंगमेंट के ज़रिए की गई है, जिसका इस्तेमाल वो अपने लाइन ऑफ़ पेंट में करेंगी. हर ट्यूब पेंट से हासिल होने वाले मुनाफ़े का एक हिस्सा मरीन लाइफ़ के संरक्षण के लिए काम करनेवाली विभिन्न संस्थाओं को दान स्वरूप दिया जाएगा.

फोम्सबी ने‌ कहा, ” मैं एक ऐसी दुनिया में रहना चाहती हूं, जहां अगर मैं बंद करूं, तो मैं चाहूंगी कि समंदर से प्लास्टिक पूरी तरह से गायब हो जाए.” उन्होंने कहा “मैं मरीन लाइफ़ को बचाने के लिए चले रहे संघर्ष का हिस्सा बन गई हूं और कला के माध्यम से जागरुकता फ़ैलाने की कोशिश कर रही हूं.”

फोम्सबी हाल ही में पेरिस के आर्टिस्ट रेसिडेंसी से ह्यूस्टन लौटीं हैं. उनके कला का प्रदर्शन इन दिनों मेमोर दे लेवनिर के गैलरी ‘मैंजर’ में 12 जनवरी, 2019 से किया जा रहा है.

2019 के ह्यूस्टन मैराथन के आधिकारिक आर्टवर्क के निर्माण के लिए हाल ही में फोम्सबी को चेवरन ह्यूस्टन मैराथन‌ कमिटी द्वारा कमिशन किया गया है. उनकी कलात्मकता जल्द इस रेस के लिए इस्तेमाल की जानेवाली टी-शर्ट्स और दिये जानेवाले मेडल्स पर नज़र आएगी. इसके अलावा मार्केटिंग और शहर में होने वाले इस बड़े इवेंट के चिह्नों के रूप में भी इनकी झलक देखने को मिलेगी.

साल की शुरुआत में फोम्सबी की कला को ‘स्काई आर्ट’ प्रोजेक्ट‌ में स्थान मिला था. ये प्रोजेक्ट सिटी ऑफ़ ह्यूस्टन के ह्यूस्टन ऑफ़ कॉर्पोरेशन की मिल्कियत है. इस कार्यक्रम के लिए तमाम आर्टिस्ट को जूरी सदस्य के रूप में चुना गया था, जो शहर का जश्न मनाती पेंटिग्स को शहर भर के बिलबोर्ड्स पर चस्पां कर देते हैं.

जाह्नवी एम फोल्म्सबी के बारे में अधिक जानकारी

आर्टिस्ट, लेखिका और स्कूबा डाइवर जाह्नवी एम फोम्सबी ने कई देशों और दुनिया के कई शहरों की यात्राएं की हैं ताकि वो दुनिया में अपनी एक जगह बना पाएं. जब वो समंदर में डाइव करतीं हैं, तो जैसे उन्हें घर में होने का एहसास होता है. भारत के मुम्बई‌ शहर में पैदा हुईं जाह्नवी एम फोम्सबी 2005 में अमेरिका के शिकागो शहर में जाकर बस गईं थीं, जहां के द स्कूल ऑफ़ आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ़ शिकागो से उन्होंने बैचलर ऑफ़ फ़ाइन आर्ट की डिग्री हासिल की. तब से अब तक उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन, भारत, बीजिंग, यूरोप और अमेरिका जैसी जगहों पर किया है. उनकी कला प्रदर्शनियां कंस्ट्स राय और आर्ट रोटरडम जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेले में लग चुकीं हैं. अगर प्रिंट मीडिया की बात जी जाए तो उ‌नकी अद्भुत कलाकृतियों को हार्पर बाज़ार (मलयेशिया एडिशन), टाइम्स ऑफ़ इंडिया, वर्व इंडिया, ह्यूस्टन मॉडर्न लक्ज़री और ह्यूस्टन सिटी बुक मैगज़ीन में जगह मिल चुकी है.

जाह्नवी एम फोम्सबी फिलहाल ह्यूस्टन में रहती और वहीं कार्यरत हैं. वो विभिन्न तरह की संरक्षण संस्थाओं से जुड़ी हैं, जिसमें गैलवेस्टन बे फ़ाउंडेशन का भी शुमार है. ये फ़ाउंडेशन कला के ज़रिए मरीन लाइफ़ के संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत है.

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