गृह मंत्री शाह ने कहा, नए नजरिए से इतिहास लिखने का वक्‍त

वाराणसी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज वाराणसी में कहा कि वक्त आ गया है, जब देश के इतिहासकारों को इतिहास नए नजरिए से लिखना चाहिए। उन लोगों के साथ बहस में नहीं पड़ना चाहिए, जिन्होंने पहले इतिहास लिखा है। उन्होंने जो कुछ भी लिखा है, उसे रहने दीजिए। हमें सत्य को खोजना चाहिए और उसे लिखना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपना इतिहास लिखें। हम कितने वक्त तक अंग्रेजों पर आरोप लगाते रहेंगे?
गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को वाराणसी में एक रैली में कहा कि अगर वीर सावरकर नहीं होते तो 1857 का स्वतंत्रता संग्राम इतिहास में दर्ज नहीं हो पाता।
दरअसल, भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने घोषणा पत्र में कहा था कि पार्टी सावरकर को भारत रत्न देने की मांग करेगी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने सावरकर को गांधीजी की हत्या की साजिश रचने वाला बताया था। शाह ने वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में इन्हीं बयानों का जवाब दिया।
शाह ने कहा, अगर सावरकर नहीं होते तो हम 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को अंग्रेजों के नजरिए से देख रहे होते। वीर सावरकर ही वह व्यक्ति थे, जिन्होंने 1857 की क्रांति को पहले स्वतंत्रता संग्राम का नाम दिया था।
ज्योतिबाफुले को भी भारत रत्न देने की मांग करेगी भाजपा
भाजपा ने 15 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए अपना संकल्प पत्र जारी किया था। भाजपा ने वादा किया था कि दोबारा सत्ता में आने पर वह स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर, समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न देने की मांग करेगी।
मनीष तिवारी ने कहा, गोडसे को भारत रत्न देने की मांग करे भाजपा
सावरकर को भारत रत्न दिन जाने के भाजपा के वादे पर मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बुधवार को कहा कि सावरकर के जीवन के दो पहलू थे।
पहला आजादी के आंदोलन में शामिल होना और दूसरा माफी मांगकर (कालापानी से) वापस आने पर उनका नाम महात्मा गांधी की हत्या के साजिशकर्ताओं में दर्ज हुआ। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने तंज कसा कि मोदी सरकार भारत रत्न सावरकर को नहीं, बल्कि गोडसे को दे।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा था कि भारत रत्न दिए जाने में अगला नंबर गोडसे का ही है। सावरकर के बारे में सब जानते हैं। सबूतों के अभाव में वे गांधीजी की हत्या के मामले में रिहा हो गए थे। आज यह सरकार उन्हें भारत रत्न देने की मांग कर रही है।
-एजेंसियां

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