Civil aviation क्षेत्र को निशाना बनाने के लिए हद पार कर रहे हैं आतंकवादी: राजनाथ सिंह

Civil aviation क्षेत्र की प्रकृति अत्यधिक संवेदनशील है। किसी भी हमले की ओर पूरी दुनिया का ध्यान जाता है

नई दिल्‍ली। अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा पर दो दिवसीय सेमिनार को संबोधित करते हुए गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने आज मंगलवार को 2009 के ‘अंडरवियर’ हमलावर का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवादी वैश्विक नागरिक विमानन क्षेत्र को निशाना बनाने के लिए अपनी सारी सीमाएं पार कर रहे हैं। इस सेमिनार का आयोजन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने किया है। सीआईएसएफ एक संघीय बल है जो अभी 60 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा कर रहा है। सेमिनार में 18 देशों और कई विमानन कंपनियों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

2009 में अंडरवियर हमलावर ने किया था एम्सटर्डम-डेट्राइट उड़ान को उड़ाने का प्रयास

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत में करीब 40 छोटे हवाई अड्डों और हेलीपोर्टों की सुरक्षा सुनिश्चित करना ऐसा विषय है जिसकी ‘अनदेखी’ नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि नागर विमानन क्षेत्र की प्रकृति अत्यधिक संवेदनशील है। किसी भी हमले की ओर पूरी दुनिया का ध्यान जाता है, अक्सर इन घटनाओं के भू-राजनैतिक असर होते हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि 2001 में जूता हमलावर का मामला हो या 2006 में लंदन में तरल विस्फोटकों का उपयोग या 2009 में एम्सटर्डम में अंडरवियर हमलावर का मामला, इनसे स्पष्ट रूप से संकेत मिलता है कि आतंकवादी हद को पार कर रहे हैं तथा विमानन क्षेत्र में हमले के लिए अजीबोगरीब साधनों तक का इस्तेमाल कर रहे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि सीआईएसएफ जैसी सुरक्षा एजेंसियों को एयरपोर्ट पर पूर्ण सुरक्षा के लिए अथक और गंभीर प्रयास करने चाहिए, जहां प्रतिदिन लाखों यात्रियों आते हैं।

Civil aviation सुरक्षा बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है 
उन्होंने कहा कि नागर विमानन सुरक्षा बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि यह आतंकवादी संगठनों के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बना हुआ है। आतंकवादी हमेशा अधिकतम ध्यान आकृष्ट करने और मीडिया कवरेज पाने के अवसर तलाशते हैं।

राजनाथ सिंह ने घरेलू परिदृश्य की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (आरसीएस) के तहत 40 अन्य हवाई अड्डे और हेलीपोर्ट चालू हैं। उनकी सुरक्षा, संबंधित राज्य पुलिस बलों से तैयार की गयी हवाईअड्डा सुरक्षा इकाइयों द्वारा की जाती है। उन्होंने कहा कि छोटे हवाई अड्डों की सुरक्षा की भी कभी अनदेखी नहीं जा सकती।

अधिकारियों ने कहा कि आरसीएस या उड़ान योजना के तहत हवाई अड्डों पर सीआईएसएफ कर्मियों को तैनात करने की बात चल रही है, लेकिन इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों की सुरक्षा राज्य पुलिस बलों द्वारा की जा रही है जो केंद्रीय बल की तरह पेशेवर नहीं हैं।

ब्रसेल्स और इस्तांबुल हवाई अड्डों पर हुए हमलों ने हवाई अड्डों की कमजोरी उजागर की

राजनाथ ने कहा कि ब्रसेल्स और इस्तांबुल हवाई अड्डों पर हुए हमलों ने हवाई अड्डों की कमजोरी उजागर की है और यह विमानन प्रतिष्ठानों के लिए नए खतरों को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि अब तक विमानन क्षेत्र में कई आतंकवादी हमले हुए हैं और उनमें से सबसे विनाशकारी सितंबर 2001 (अमेरिका में) का हमला था जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया।

राजनाथ ने कहा कि विमानन सुरक्षा के लिए पैदा हो रहे खतरों को देखते हुए नवाचार और नए सिरे से विचार आवश्यक है। उन्होंने विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कानूनी कदमों का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए 1999 से विमान अपहरण तंत्र को अपग्रेड किया गया है। आतंकवादियों द्वारा विमान के अपहरण के खतरे को ध्यान में रखते हुए भारत ने इस तरह की स्थिति के प्रति अपनी तैयारी की समीक्षा की है।

उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ ने विभिन्न हवाई अड्डों पर पूर्ण सुरक्षा बनाए रखने के लिए अथक और गंभीर प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में नौ सितंबर, 2011 और कंधार (1999 में भारतीय एयरलाइंस के विमान का का अपहरण) घटनाओं ने हमें कई सबक सिखाए हैं।

2000 में CISF को हवाई अड्डों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था
कंधार घटना के बाद 2000 में सीआईएसएफ को हवाई अड्डों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। इस बल की स्थापना 1969 में की गई थी और अभी इसमें लगभग 1.45 लाख कर्मचारी हैं. करीब 22,000 सीआईएसएफ कर्मी देश भर में विभिन्न हवाईअड्डों की सुरक्षा के लिए तैनात हैं।

गृह मंत्री ने सभी पक्षों, खासकर Civil aviation सुरक्षा ब्यूरो (राष्ट्रीय विमानन सुरक्षा नियामक) और सीआईएसएफ को Civil aviation सुरक्षा के लिए नई तकनीक का उपयोग करने और प्रशिक्षित कर्मियों तथा आधुनिक सुरक्षा बुनियादी ढांचे का मिश्रण करने की सलाह दी।

-एजेंसी

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