सपनों का मॉडर्न आशियाना! ऐसे भी होते हैं घर

घर एक ऐसी सुकून वाली जगह होनी चाहिए जहां आप सुरक्षित महसूस करें और दिन ख़त्म होने पर आराम कर सकें. साथ ही, घर ऐसा होना चाहिए जहां आप दोस्तों के साथ समय बिता सकें काम या पढ़ाई कर सकें.
20वीं सदी में अपनाई गई विधियों और सामग्रियों ने वास्तुकारों को उन जगहों पर भी घर बनाने का मौका दिया जहां रहना मुश्किल लगता था. अलग हटकर सोचने वाले ग्राहकों ने घर को नये सिरे से परिभाषित किया.
एक नई किताब “हाउसेज: एक्स्ट्राऑर्डिनरी लिविंग” में घर के बारे में हमारी पसंद, शैली और सोच में आए बदलावों की के बारे में बताया गया है.
इसमें स्वीडन के जंगल के बीच बने घर से लेकर कैलिफोर्निया के रेगिस्तान में बने आशियाने तक का ज़िक्र है.
कांच के बक्से, प्रयोगात्मक प्रोटोटाइप, ओपन-प्लान लेआउट का इस्तेमाल कर किसी भी प्रोजेक्ट को बनाना नामुमकिन नहीं है.
पश्चिमी तट के इस आधुनिक घर को कनाडा के मशहूर वास्तुकार आर्थर एरिक्सन ने ज्यॉफ्री मैसे के साथ मिलकर डिजाइन किया था.
पश्चिमी वैंकूवर की उबड़-खाबड़ पहाड़ी चट्टान पर एक घर का निर्माण 1963 में पूरा हुआ था. लिविंग एरिया का मुख्य हिस्सा लकड़ी की बीम और कांच से बनाया गया.
वास्तुकारों ने चार मंजिला घर का प्रवेश द्वार सबसे ऊपरी मंजिल पर बनाया और सबसे नीचे की मंजिल प्रशांत महासागर के किनारे की चट्टानों पर टिकाई.
हर मंजिल में खुली जगह छोड़ी गई जहां से प्रशांत महासागर को देखा जा सकता था. यह जगह असल में नीचे वाली मंजिल की छत थी.
दिवंगत एरिक्सन ने लिखा था, “ग्राहम हाउस ने वास्तुकार के रूप में मेरी प्रतिष्ठा बढ़ाई थी.” इस घर को 2007 में ध्वस्त कर दिया गया.
डेजर्ट हाउस, अमरीका
कैलिफोर्निया के पाम स्प्रिंग में बने एक ख़ूबसूरत घर को वास्तुकार जिम जेनिंग्स और लेखिका थेरेस बिसेल ने इत्मीनान से बनाया था.
1999 में ज़मीन खरीदने के 10 साल बाद उन्होंने इसे बनाना शुरू किया. जेनिंग्स और बिसेल इसे अपने लिए बना रहे थे.
जेनिंग्स ने आर्किटेक्चुरल डाइजेस्ट से कहा था, “जब आप ख़ुद के ग्राहक हों तो आप अपनी मर्जी से काम कर सकते हैं. आप जानते हैं कि यह सब कितना मुश्किल होगा, ख़ासकर जब यह आसान लगता हो.”
इस घर में बीम और कांच की डेजर्ट मॉडर्निज्म शैली को नहीं अपनाया गया है. इसकी जगह लिविंग एरिया को 2.4 मीटर मोटी कंक्रीट की दीवार से घेरा गया है जिसके ऊपर स्टील की छत डाली गई है.
डेजर्ट हाउस में दो आंगन हैं जहां से बाहर के नजारे दिखते हैं- पाम ट्री, सैन जेसिंटो पहाड़ और नीला आसमान.
एजलैंड हाउस, अमरीका
वास्तुकार बर्सी चेन स्टूडियो ने एजलैंड हाउस बनाने के लिए देसी अमरीकियों के पिट हाउस को मॉडल के रूप में चुना. टेक्सास के ऑस्टिन में निर्माण शुरू करने से पहले उन्होंने ज़मीन में 2 मीटर गहरी खुदाई की.
यह घर 2012 में बनकर तैयार हुआ. इसकी टर्फ छत और ज़मीन में सात फीट तक धंसी इमारत तांक-झांक करने वालों को मौका नहीं देती. सर्दियों में यह घर गर्म रहता है और गर्मियों में ठंडा.
लिविंग रूम और सोने के कमरे के बीच जानबूझकर कोई रास्ता नहीं रखा गया है, ताकि यहां रहने वाले लोग ज़्यादा से ज़्यादा वक्त बाहर बिता सकें.
हाउस इन इत्सुरा, जापान
जापान के इबाराकी प्रांत की एक मंजिला झुकी हुई इमारत लकड़ी से बने दो खंभों पर टिकी है. दो खंभों के अलावा इमारत का पूरा भार पहाड़ी ढलान पर है. घर की अंदरूनी साज-सज्जा में लकड़ियों का भरपूर इस्तेमाल है जिनको स्थानीय जंगल से लाया गया है.
घर जिस कोण पर झुका है उससे तापमान नियंत्रित होता है, रोशनी पूरी आती है और प्राइवेसी बनी रहती है. यह घर दो हिस्सों में बंटा है- लंबे हिस्से में लिविंग स्पेस है जबकि छोटे हिस्से में सोने के कमरे हैं.
वास्तुकार लाइफ़ स्टाइल काउबौ ने यहां 60 पेड़ लगाए. ऐसा सोचा गया था कि समय के साथ यह घर परिवेश से ज़्यादा से ज़्यादा जुड़ता चला जाएगा.
बक्काफ्लोट 1, आइसलैंड
1960 में पेरिस के इकोले डेस ब्यूक्स-आर्ट्स से स्नातक होने के कुछ ही समय बाद हॉना सिगरोआर्डोटिर आइसलैंड की पहली पेशेवर महिला डिजाइनर बनीं.
कुछ साल बाद उन्होंने देश की सबसे महान इमारतों में से एक को डिजाइन किया. आधुनिक टर्फ हट जैसा यह घर रेक्याविक के दक्षिणी उपनगर में रहने वाले परिवार के लिए बनाया गया है.
1963 में सिगरोआर्डोटिर ने 6 सदस्यों वाले परिवार से कहा था, “मैं आपके लिए एक घोंसला बनाने जा रही हूं.” आइसलैंड के कठिन मौसम से घर वालों को बचाने के लिए उन्होंने मिट्टी के तीन टीलों का इस्तेमाल किया.
यह घर ब्रुटलिस्ट तकनीक का इस्तेमाल करके कंक्रीट से बनाया गया है जिन पर कोई प्लास्टर नहीं है. घर के फर्नीचर- जैसे कि सोफा और बाथटब- अंदर और बाहर के बीच संबंध बनाते हैं.
हाउस ऑन द क्लिफ़, स्पेन
ग्रेनाडा में एक खड़ी पहाड़ी ढलान पर मिट्टी और चट्टानों में धंसे इस घर को वास्तुकार पाब्लो गिल और जैमे बार्टोलोम ने “समकालीन गोडीसेक गुफा” कहा है.
ऐसा उन्होंने कैटलन आधुनिकतावाद के सबसे बड़े वास्तुकार अंटोनी गोडी (स्पेन) के सम्मान में कहा. 2015 में तैयार हुए इस दो मंजिला घर का तापमान हमेशा 19.5 डिग्री सेल्सियस रहता है. इसके लिए धरती की कुदरती ठंडक का इस्तेमाल किया जाता है.
इसकी छत बनाने के लिए धातु के घुमावदार फ्रेम पर कंक्रीट के दो स्तर डाले गए हैं. उसके ऊपर हाथ से जस्ते की टाइलें जोड़ी गई हैं. दूर से देखने पर लगता है जैसे यह छत ड्रैगन की खुरदुरी खाल हो. यह भूमध्य सागर से भी दिखता है.
इसके वास्तुकार कहते हैं, “धातु की छत से प्राकृतिक और कृत्रिम का भ्रम पैदा होता है. नीचे से देखें तो लगता है कि ड्रैगन बैठा है, ऊपर से देखें तो समुद्र की लहरों का भ्रम होता है.”
ड्रैगस्पेल हाउस, स्वीडन
स्वीडिश में ड्रैगस्पेल का अर्थ होता है अकॉर्डियन (वाद्य यंत्र). 19वीं सदी के आख़िर में ओवरे ग्ला झील के किनारे देवदार की लाल लकड़ी से बने घुमावदार केबिन को यही नाम दिया गया है.
इस घर का आकार ग्लसकोजन संरक्षित क्षेत्र की ख़ूबसूरती से घुल-मिल जाता है. इसका दृश्य प्रभाव न्यूनतम है, घर की खिड़कियां बाहरी आवरण में छिपी हुई हैं.
आने वाले समय में केबिन के बाहरी हिस्से की लकड़ी धूसर रंग की हो जाएगी जो इस पथरीली पहाड़ी परिदृश्य से मिल जाएगी. इसकी एक और ख़ूबी है- गर्मियों में केबिन के अगले हिस्से को झील की धारा के ऊपर बनाए गए केंटिलीवर तक बढ़ाया जा सकता है.
खिड़कियों से पानी की कल-कल को साफ-साफ सुना जा सकता है. बारिश या सर्दियों के दिनों में इसे वापस समेटा जा सकता है. मौसम या मेहमानों की संख्या के आधार पर इसे समायोजित किया जा सकता है.
टिल हाउस, चिली
चिली में नेविडाड के चट्टानी तट पर एक गहरे शेल्फ़ में यह छोटा सा घर एक दंपति की साप्ताहिक छुट्टियों के लिए तैयार किया गया था. यह तीन तरफ से प्रशांत महासागर से घिरा है. समुद्र की गर्जना यहां साफ-साफ सुनी जाती है. इस घर को सड़क से नहीं देखा जा सकता.
इसकी ओपन-प्लान छत महासागर की विशालता को देखने के लिए एकदम सही है जबकि घर की बाकी जगह सोने और खाने के लिए है. निजता बनाए रखने के लिए हर कमरे को अलग किया गया है. पूरी छत एक विशाल डेक की तरह दिखती है. चट्टानों के बीच बनाई गई पगडंडी से वहां पहुंचा जा सकता है.
अगर आराम के लिए इतना काफी नहीं है तो यहां लकड़ी का जकूज़ी भी है जिसमें आग पर गर्म किया गया पानी आता है.
किर्श आवास, अमरीका
इलिनोइस के ओक पार्क उपनगर में यह भ्रम हो सकता है फ्रैंक लॉयड राइट (वास्तुकार) का घर और स्टूडियो ही सबसे बेमिसाल है.लेकिन 1982 में एरोल जे किर्श ने जिस विशाल बंकरनुमा घर को बनाया है उसे देखने के बाद ऐसा नहीं लगता. ऐसे घर साई-फ़ाई फ़िल्मों में ही दिखते हैं.
किर्श आवास की बाहरी असामान्य ज्यामितीय संरचना पूरी तरह कंक्रीट से बनी है. इससे सुरक्षा का अहसास होता है- लेकिन इसकी ख़ूबियां बस इतनी नहीं हैं. कोण पर झुकी छतें, जिगुरत (मेसोपोटामिया) जैसा आकार और स्लिट खिड़कियां सौर ऊर्जा के अधिकतम इस्तेमाल के लिए डिजाइन की गई हैं.
मालाटोर हाउस, वेल्स
वास्तुकार दंपत्ति जान कैप्लिकी और अमांडा लेवटे ने सेना के पुराने बैरक को मालाटोर हाउस में बदला है. इसका दूसरा नाम टेलीटबी हाउस भी है. दो कमरों का यह आरामगाह पेम्ब्रोकशायर तट पर बनाई गई कृत्रिम पहाड़ी में धंसा हुआ है. यह घर 1998 में बनकर तैयार हुआ था. इसकी प्लाईवुड छत पर घास लगाई गई है, जिससे बाहर से पता भी नहीं लगता कि यहां कोई घर भी है.
अंदर की जगह को बाथरूम, रसोई और बड़े सोफा और फायरप्लेस वाले लिविंग रूम में बांटा गया है.
पहाड़ी के अंदर कोई घर है इसका एक ही सुराग छोड़ा गया है- एक अंडाकार खिड़की मानो समुद्र की ओर देखती आंख.
-BBC

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